कराची के उस अल्ताफ के बारे में जानिये जिसे भारत से शरण और पैसा दोनों चाहिए


क्या आप अल्ताफ हुसैन के बारे में जानते हैं? अल्ताफ हुसैन.. पाकिस्तान का वो नेता जिसे कराची का किंग कहा जाता है.. वो भारत में शरण तथा भारत से पैसा लेना चाहता है. अल्ताफ हुसैन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा है कि वह या तो भारत में शरण दें या फिर उसको आर्थिक मदद मुहैया कराएं. आपको बता दें कि अल्ताफ हुसैन मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM)  का प्रमुख तथा इस समय ब्रिटेन में शरण लिए हुए है.

बता दें कि साल 1978 में पाकिस्तान में छात्र संगठन ‘ऑल पाकिस्तान मुत्ताहिदा स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन’ की नींव रखी गई. ये संगठन आगे चलकर में मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के नाम से मुकम्मल सेकुलर राजनैतिक संगठन बन गया, जिसके पहुंच पाकिस्तान में जमीनी लेवल पर है. इस संगठन की नींव अल्ताफ हुसैन ने रखी थी जो अभी लंदन में शरण लिए हुए हैं. अब वो भारत आना चाहते हैं और इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी से गुहार लगाई है.

अल्ताफ हुसैन का कराची क्षेत्र में इतना क्रेज था कि एक जमाने में उसको ‘कराची का किंग’ कहा जाता था. आज भी कराची में जनसभाओं को संबोधित करने के लिए उन्हें मोबाइल का सहारा लेते देखा जाता है जिसके कारण लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता बनी हुई है. उन्होंने पीएम मोदी से भारत में शरण और आर्थिक मदद मांगी है तथा कहा है कि भारत में उनके हजारों रिश्तेदार दफ्न हैं.

1984 से एक्टिव मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के चीफ अल्ताफ हुसैन का मकसद उर्दू भाषी मुहाजिरों का नेतृत्व और अधिकार की लड़ाई करना था. मुहाजिर वो रिफ्यूजी हैं, जो आजादी के बाद भारत से पाकिस्तान चले गए थे. कनाडा की फेडरल कोर्ट ने MQM को 2006 में आतंकी संगठन करार दिया. अल्ताफ हुसैन के किसी भी बयान को पाकिस्तानी मीडिया में दिखाने की इजाजत नहीं है. लाहौर हाईकोर्ट ने 7 सितंबर 2015 को अल्ताफ की तस्वीर, वीडियो या बयान मीडिया में दिखाने पर पूरी तरह बैन लगा दिया है.

MQM के विरोध की एक बड़ी वजह यूनिवर्सिटी और सिविल सेवाओं में सिंधियों को तरजीह देना था. उनकी मांग साफ सी कि उर्दू भाषी मुहाजिरों को हुकुमत और सरकारी नौकरियों में तरजीह दी जाए, पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में इस वक्त MQM के 25 सांसद हैं कुछ दिन पहले ही पार्टी के 23 सांसदों ने इस्तीफा दे दिया था. सरकार पर आरोप लगाया कि कराची में पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं पर जबरन कार्रवाई की जा रही है. अभी लोकल जनरल चुनावों में कराची शहर में एमक्यूएम की जीत हुई है. नवाज शरीफ और इमरान खान की पार्टी से ज्यादा अल्ताफ की पार्टी का परचम रहा.

अल्ताफ हुसैन पाक से वो 1992 में लंदन चले गए और वहां राजनीतिक शरणार्थी बनकर जिंदगी काट रहे हैं. वहीं पर बैठकर वो MQM के फैसले ले रहे हैं. वहां रहने की वजह 1992 में पाकिस्तानी सरकार का ऑपरेशन क्लीन अप. यानी मिलिट्री भेजकर MQM का सफाया करना था. जिससे उस दौर में मचे सियासी भूचाल को खत्म करने की कोशिश की गई लेकिन इस ऑपरेशन के शुरू होने से ठीक एक महीने पहले अपनी जिंदगी पर मंडराते खतरे को देख अल्ताफ यूनाइटेड किंगडम (यूके) चले गए तथा उन्हें ब्रिटिश नागरिकता मिली. जून 2014 में मेट्रोपॉलिटन पुलिस लंदन में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में अल्ताफ को गिरफ्तार भी किया था लेकिन तीन दिन बाद ही रिहाई हो गई. जानकारी के अनुसार अल्ताफ हुसैन पर भ्रष्टाचार समेत लगभग 3576 केस दर्ज हैं.

पाकिस्‍तान में पिछले तीन दशकों से कराची से एक बुलंद आवाज उठा करती थी, सिंध से लेकर कराची तक इस आवाज की नुमाइंदगी करने वाली मुत्‍ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्‍यूएम) के प्रत्‍याशियों के लिए उनका हर फरमान पत्‍थर की लकीर की मानिंद होता था. पाकिस्‍तान की चौथी सबसे बड़ी पार्टी है एमक्यूएम, इस पार्टी के नेता है अल्‍ताफ हुसैन, दो दशक से भी ज्‍यादा वक्‍त से लंदन में स्‍व-निर्वासित जिंदगी गुजार रहे अल्‍ताफ हुसैन इस बार पाकिस्‍तान के चुनावों में अपना भाषण देने तक नहीं आ पाए. मुहाजिरों (भारत छोड़कर पाकिस्‍तान में बसने वाले उर्दू जुबान के लोग) की सबसे बुलंद आवाज अल्‍ताफ हुसैन की मानी जाती रही, उनको एमक्‍यूएम का पर्याय माना जाता रहा. उनकी बात का इतना जबरदस्त असर रहता था कि कराची में उनकी समानांतर सत्‍ता रही है. उनके कहने से शहर जागता, सोता या रोता। उनके कहने पर इस शहर में वोट पड़ते रहे हैं या चुनावों का बहिष्‍कार किया जाता.

2016 में अल्‍ताफ हुसैन ने एक इंटरव्‍यू में पाकिस्‍तान को दुनिया का कैंसर बताया. उसके बाद एमक्‍यूएम के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई. पार्टी में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले फारूक सत्‍तार समेत तमाम पार्टी सांसदों और नेताओं को पकड़ लिया गया. महीनों इनको जेल में बंद रखा गया.हालांकि इस बयान के लिए अल्‍ताफ हुसैन ने माफी मांगी क्‍योंकि अपने कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई के चलते वह तनाव में थे इसका नतीजा ये हुआ कि अल्‍ताफ को घोषणा करनी पड़ी कि मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पार्टी के फैसले अब वह खुद नहीं करेंगे, उन्होंने फैसले लेने के अधिकार पार्टी की कोऑर्डिनेशन कमेटी को दे दिए.

अब अल्ताफ हुसैन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कह रहे हैं कि उनको भारत में शरण दी जाए तथा उनको आर्थिक मदद प्रदान की जाए.


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