सेकुलरिज्म की सही परिभाषा बताई उपराष्ट्रपति ने. देश ने सुना कि क्या है धर्मनिरपेक्षता और क्या है तुष्टीकरण ?


उस तथाकथित सेकुलरिज्म पर बहस बेहद जरूरी थी जिसकी आड़ में हिन्दू विरोध को ही एक पैमाना बना डाला गया था और उसी के बहाने कभी हिन्दू देवी देवताओं की अश्लील चित्रों की प्रदर्शनी आयोजित की जाने लगी और कभी कविताओं में हिन्दुओं के ग्रंथो को अपमानित कर के उसको भाईचारे का तराना बताया जाता था. जब यहाँ भी बात नहीं बनी तो और आगे बढ़ कर स्कूल की किताबों में क्रूर लुटेरे हत्यारे मुगल आक्रान्ताओं को महिमामंडित किया जाने लगा.

कुल मिला कर एक आंधी जैसी चलने लगी थी हिन्दू विरोध की जिसको भाईचारे का नाम दे कर उसका विरोध करने वाले को साम्प्रदायिक शक्ति के रूप में घोषित किया जाने लगा. लेकिन शायद ही किसी ने सोचा रहा होगा कि कभी समय ऐसा भी बदलेगा जब देश के प्रधानमन्त्री , मुख्यमंत्री और यहाँ तक कि उपराष्ट्रपति भी उस तथाकथित सेकुलरिज्म पर सवाल उठा देंगे. ऐसा हुआ है , योगी आदित्यनाथ , अमित शाह , नरेंद्र मोदी के बाद अब उपराष्ट्रपति ने भी उस कथित सेकुलरिज्म पर सवालिया निशान लगाया है.

चेन्नई में श्री रामकृष्ण मठ द्वारा प्रकाशित तमिल मासिक श्री रामकृष्ण विजयम के शताब्दी समारोह और स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में वेंकैया ने कहा कि भारत में कुछ लोगों को हिंदू शब्द से ऐलर्जी है। यह ठीक नहीं है, फिर भी उन्हें इस तरह का दृष्टिकोण रखने का अधिकार है। नायडू ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का मतलब दूसरे धर्मों का अपमान नहीं है, नायडू ने कहा कि देश ने हमेशा पीड़ित लोगों को शरण प्रदान किया है।


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