सब कुछ सही नहीं चल रहा अमेठी में.. जिलाधिकारी को सबने देखा लेकिन पुलिस विभाग में उस से भी आगे है मामला


ये वो गढ़ है जो जिसको भारतीय जनता पार्टी ने 70 साल के इतिहास में कांग्रेस से पहली बार छीना है.. यहाँ से कांग्रेस का किसी भी पार्टी से हारना ठीक वैसे ही सोचा जाता था कि जैसे कि अमेरिका जैसा देश युद्ध में किसी गरीब अफ्रीकी देश से पराजित हो जाए.. भारतीय जनता पार्टी ने इस से पहले भी अपने तरकश के हर तीर आजमा कर देख लिए थे लेकिन रायबरेली और अमेठी का किला कांग्रेस का सलामत रहा.. पर इस बार वो परिणाम आया जो किसी ने इस से पहले सोचा भी नहीं था..

अमेठी में स्मृति ईरानी ने वो कर के दिखा दिया जो आज तक किसी और के बस का नहीं था.. स्मृति ईरानी की इस बार जीत में मोदी लहर के साथ साथ उत्तर के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी.. अपराधियों के खिलाफ जिस प्रकार से योगी आदित्यनाथ शासित उत्तर प्रदेश प्रशासन ने अभियान छेड़ा था, उस से आम जनता ही नहीं विपक्ष के कई नेता भी प्रभावित थे.. और इसी वजह से विजयश्री स्मृति ईरानी को मिली थी..

इस विजयश्री में स्मृति ईरानी का एक अलग ही चेहरा बेहद कारगर भूमिका निभाया था जिसमे उन्होंने कभी खेतों में लगी आग को बुझाने के लिए अपने हाथो से नल चलाया तो कभी जमीन पर बैठ कर गाँव की महिलाओं के साथ घुल मिल कर दिखाया.. लेकिन जब अमेठी की जनता ने उन्हें विजयश्री दिलाई उसके बाद केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी निभाने के चलते वो दिल्ली में भी समय देने लगीं, इस आशा से कि वहां के प्रशासनिक अधिकारी उनकी ही परिपाटी को आगे बढ़ाएंगे.. पर वैसा एकदम नहीं हुआ..

अमेठी जनपद में अभी हाल में जिलाधिकारी महोदय का एक वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है.. अमेठी की जनता ने इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी को विजय दिला कर एक बड़ा दांव खेला था जिसमे विश्वास का पूरा ट्रांसफर दूसरी तरफ हुआ था. ये दांव उन पर भारी वहां के अधिकारियो के चलते दिखाई दे रहा है. सबसे खास बात ये है कि अमेठी में कुछ भी होना लखनऊ में योगी आदित्यनाथ से ज्यादा जवाबदेह दिल्ली में स्मृति ईरानी के लिए होता है, और वो हो भी रहा है..

जिलाधिकारी महोदय बाकायदा एक पढ़े लिखे व्यक्ति से बात करते हुए खुद न जाने किस स्तर पर चले गये और उन्होंने सामने वाले को पहले एहसास दिलाया की वो जिले के सबसे बड़े अधिकारी से बात कर रहा है. हालाँकि उसने ये मान भी लिया कि वो जिले के सबसे बड़े अधिकारी से बात कर रहा है फिर भी उसको अपनी ताकत का एहसास दिलाने के लिए धक्का जैसा दिया गया.. इस बार भीड़ ने भी एक स्वर में उनके इस कृत्य की आलोचना की पर वो भीड़ पर अकेले भारी दिखे..

खुद स्मृति ईरानी को इस मामले में ट्विट कर के जिलाधिकारी अमेठी को सौम्यता का संदेश देना पड़ा.. यद्दपि बाद में जिलाधिकारी महोदय ने कई ट्विट अपने आप को सही साबित करने के लिए किये, लेकिन मामला यही समाप्त नहीं हुआ है. जिले में जिला प्रशासन के अलावा एक विभाग और होता है जो जिले की कानून व्यवस्था को सुधारने और शांति व् सौहार्द स्थापित करने के लिए जिम्मेदार होता है.. और वो विभाग है पुलिस विभाग जो वर्तमान समय में एक महिला पुलिस अधिकारी द्वारा संचालित है जिनका नाम पुलिस अधीक्षक ख्याति गर्ग जी है..

इनकी तैनाती के बाद ये माना जा रहा था कि महिला सांसद व् महिला पुलिस अधिकारी मिल कर जिला अमेठी के लिए कुछ मील के पत्थर स्थपित करेंगे पर अंत में ढाक के तीन पात वाला हाल ही रहा.. बेटी बचाओ बेटी पढाओ और बेटियों द्वारा संचालित जनपद में पहले तो फुरसतगंज थाने में तैनात के सिपाही की खबर आती है जो अपनी बेटी के इलाज के लिए छुट्टी मांगता है और उसको छुट्टी के लिए इतना परेशान कर दिया जाता है कि वो नौकरी ही त्याग देता है..

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दुखी होकर प्रमुख सचिव गृह को पत्र लिखकर इस्तीफा देने की बात कही है। पीड़ित सिपाही का कहना है कि दो बार पुलिस अधीक्षक से मिलने के बाद भी उसे छुट्टी नहीं मिली। पत्र में सिपाही ने लिखा है कि उसकी पुत्री अंजली सिंह का प्रयागराज के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है।  बेटी के इलाज के लिए बीते 25 अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक डा. ख्याति गर्ग से मिलकर अपनी समस्या बताते हुए अवकाश की मांग की तो उन्होंने दीपावली के बाद बुलाया था।

जिस पर 28 अक्टूबर को दोबारा एसपी से मिलकर अपनी दिक्कत बताई थी। इसके बाद भी उसे अब तक अवकाश नहीं मिल पाया है। जबकि उसकी बेटी गंभीर रूप से बीमार है। यद्दपि उस समय SP अमेठी महोदया के अनुसार अयोध्या प्रकरण के चलते किसी का भी अवकाश स्वीकृत करने में कई पेंच थे. सिपाही लाइन हाजिर भी कर दिया गया.. लेकिन सिर्फ मामला यही तक सीमित होता तो भी एक बार बात आई गई हो जाती.. मामला इस से भी आगे निकलता दिखाई दिया और एक अन्य सिपाही ने तो आत्महत्या तक की अनुमति मांग डाली .

अमेठी जनपद से ट्रांसफर न होने की दशा में आत्महत्या करने की बात करने वाले पुलिस लाइन अमेठी में तैनात सिपाही ने गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से स्थानांतरण कराए जाने की मांग की है। स्थानान्तरण न हो पाने की स्थिति में सिपाही ने आत्महत्या की अनुमति मांगी है। इटावा के शांति नगर कालोनी के मूल निवासी 50 वर्षीय कांस्टेबल महावीर सिंह यादव अमेठी तहसील के उपकोषागार में तैनात हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली को भेजे पत्र में उन्होंने कहा है कि उन्हें दो बार दिल का दौरा पड़ चुका है।

पर बात यही खत्म नहीं होती.. अब पुलिस लाईन में भ्रष्टाचार का एक अन्य मामला चर्चा में आ गया है.  एक सिपाही विश्वनाथ की शिकायत में उठाए गए बिंदु खासे गंभीर है। कई सिपाहियों ने नाम न छापने की शर्त पर पुलिस लाइन में फैले भ्रष्टाचार की जो कहानी बताई है। वह अंदर ही अंदर महकमें के दामन को दागदार बनाने में लगी हुई है। डयूटी से लेकर हर किसी काम के लिए यहां अपने ही सिपाही से वसूली होती है। इस मामले में DGP तक को बिन्दुवार जांच के आदेश देने पड़े..

पुलिस लाइन में फैले भ्रष्टाचार की बात सार्वजनिक होने के साथ ही महकमे में खलबली मच गई है.. सीओ अमेठी की जांच रिपोर्ट पर पहले भी जिले की स्वाट टीम पर बड़ी कार्रवाई हो चुकी है। ऐसे में पुलिस लाइन के जिम्मेदार भी सकते में है.. शिकायत की जांच कर रहे सीओ पीयूष कांत राय ने बताया कि जिस नाम से शिकायत हुई है। उस नाम का कोई सिपाही जिले में नहीं है पर शिकायत पत्र में जो आरोप लगे हैं। वह गंभीर हैं। विभाग के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है.

अब सवाल ये बनता है कि क्या अमेठी को ७३ साल से ज्यादा की तपस्या के बाद जीत पाने वाली भारतीय जनता पार्टी द्वारा अमेठी को दिया गया आश्वासन पूरा हो रहा है . क्या वहां सुराज्य स्थापित है , जहाँ की एक छोटी से छोटी से चीज पर उस विपक्ष की नजर है जो अपना खोया किला फिर से वापस पाना चाहता है वहां ऐसी हरकतें क्या योगी आदित्यनाथ सरकार और स्मृति ईरानी के खिलाफ एक हथियार जैसे नहीं दे रहे है ? फ़िलहाल प्रशासन की पोल खुलने के बाद अब योगी शासन इस मामले में क्या करता है ये देखने का विषय जरूर है..

 

रिपोर्ट –

राहुल पाण्डेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

मुख्यालय – नॉएडा 

सम्पर्क – 9598805228


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