एक तरफ देश मांग रहा है बलात्कारियो के खिलाफ कठोर दंड और महिलाओं की अभेद्य सुरक्षा तो वही मद्रास हाईकोर्ट का एक फैसला जो है एकदम अलग राह पर


जहाँ एक तरफ पूरे भारत में बलात्कार को खत्म करने की मुहिम चल रही है और एक स्वर में बलात्कारियो को बेहद कम समय में फांसी की सजा मांगी जा रही है तो वहीँ दूसरी तरफ तमाम समूह महिलाओं की सुरक्षा अभेद्य करने की भी वकालत करते हुए पुलिस के साथ सीधे शासन को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. ऐसे समय में नितीश कुमार जैसे मुख्यमंत्री खुद से आगे बढ़ कर बलात्कार की जड को उखाड़ फेंकने के लिए पोर्न साईटों पर बैन लगाने की मांग कर रहे हैं..

पर ठीक उसी समय मद्रास हाईकोर्ट का एक फैसला आया है जो सुनने में एक बार बेहद आश्चर्यजनक लग रहा है..  इस फैसले के खिलाफ अभी तक किसी ने कोई टिप्पणी नहीं की है और नारी सम्मान व् सुरक्षा को मांगने वाले तमाम समूह इस से सहमत दिखाई दे रहे हैं.. ये फैसला साफ स्वतंत्रता देता है कि होटल के कमरे में एक अविवाहित लड़का और एक अविवाहित लड़की रह सकते हैं. कोर्ट ने होटल में अविवाहित जोड़ों का रहना बालिगों के लिव इन रिलेशनशिप जैसा माना है..

न्यायमूर्ति एम एस रमेश ने हाल के एक आदेश में कहा, ‘‘प्रत्यक्ष तौर पर कोई कानून या नियम नहीं है जो विपरीत लिंग के अविवाहित जोड़े को होटल के कमरे में मेहमान के तौर पर रहने से रोकता है.’’ उन्होंने यह टिप्पणी प्राधिकारियों को कोयबंटूर स्थित किराए पर दिए जाने वाले अपार्टमेंट पर लगे सील को खोलने का निर्देश देते हुए की. अपार्टमेंट को पुलिस और राजस्व विभाग ने इस साल जून में इस शिकायत के बाद मारे गए छापे के बाद सील कर दिया था कि वहां अनैतिक गतिविधि होती हैं. वहां छापा मारने वाली टीम को वहां एक अविवाहित जोड़ा मिला था और कमरे में शराब की कुछ बोतलें मिली थीं.


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share