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वो इजरायल की ताकत है जिसके आगे सिर्फ गिनाने भर के लिए रह गये 50 से ज्यादा मुस्लिम देश.. सिर्फ 1 को छोड़ कर बाकी तमाम ने घुटने टेके


पिछले कुछ समय से दुनिया भर के तमाम कट्टरपंथी अपनी धौंस को देने के लिए बार – २ एक जुमला उछाला करते हैं कि हमारे 50 से ज्यादा मुल्क हैं. यद्दपि ये सच भी है लेकिन जब उन मुल्को में आपसी एकता या सामंजस्य का परीक्षण किया गया तो हालात वैसे निकले जो किसी की कल्पना से भी परे थे. अन्तराष्ट्रीय समुदाय के लिए ये मामला तो एकदम नया था ही लेकिन तमाम मुस्लिम देशो की रहनुमाई करने का दावा करने वाले मुल्क तुर्की के लिए तो ये एक बड़े झटके जैसा था.

ध्यान देने योग्य ये है कि इस्लामिक मुल्को की रहनुमाई का दावा करने वाले और पिछले कुछ समय से युद्धोन्मादी हो चुके तुर्की ने अपना दर्द दुनिया के आगे बयान करते हुए कहा है कि तमाम मुस्लिम देशों ने इजरायल के आगे घुटने टेक दिए हैं और वो अकेले ही फिलिस्तीन मामले में आगे बढ़ कर लड़ रहा है. तुर्की का इशारा पाकिस्तान , ईरान और सऊदी अरब जैसे देशो की तरफ था जिनसे उसको किसी प्रकार का समर्थन न मिलने का दुःख अब खुल कर सामने आ गया है..

इस दर्द को सार्वजानिक रूप से बयान करते हुए तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने सोमवार को कहा कि यरूशलेम और फिलिस्तीन के मामले में ऐसा लगता है कि तुर्की को अकेला छोड़ दिया गया है। लेकिन फिर भी वह फिलिस्तीनो का समर्थन करना बंद नहीं करेगा। एर्दोआन ने इस्तांबुल में ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) की एक बैठक में कहा, “फिलिस्तीन और यरुशलम में हालात बिगड़ रहे हैं क्योंकि कुछ अरब देश इजरायल के उल्लंघनों को बढ़ावा देते हैं। मुझे लगता है कि तुर्की अकेला रह गया है, लेकिन हम दबंगों के साथ खड़े रहेंगे।


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