क्या सच में जायज है पीलीभीत में शंखनाद और घंटानाद करने वाले पुलिस अधिकारी और जिलाधिकारी का एकतरफा विरोध ? - Hindi News, हिंदी समाचार, Samachar, Breaking News, Latest Khabar -

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क्या सच में जायज है पीलीभीत में शंखनाद और घंटानाद करने वाले पुलिस अधिकारी और जिलाधिकारी का एकतरफा विरोध ?


पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया के साथ कुछ अन्य समाचार प्लेटफार्म पर एक खबर वायरल हो रही है जिसमे उत्तर प्रदेश के जिला पीलीभीत के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक जनता कर्फ्यू के दौरान शाम को कुछ आम लोगों के बीच में दिखे और उसी समय पुलिस अधीक्षक ने शंखनाद किया और जिलाधिकारी ने घंटानाद किया. ये कृतज्ञता व्यक्त की जा रही है कोरोना से लड़ते समाज के उन सभी वर्गो को जो आने वाले समय में भारत के स्वर्णिम इतिहास में दर्ज होने तय हैं.

इसी बीच में एक वीडियो वायरल किया जाने लगा जिसमे पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी के साथ कुछ स्थानीय लोग भी दिखने लगे. ये सभी उनके साथ शंखनाद और घंटानाद में शामिल हो गये.. यकीनन इसको भीड़ नहीं कहा जा सकता है क्योकि चल रहे समूह में पुलिसकर्मियों और जिले के अन्य प्रशासनिक अधिकारियो की संख्या ज्यादा थी. कुछ स्थानीय लोगों को उसमे शामिल कर के उसको एक छोटा समूह जरूर कहा जा सकता है, लेकिन भीड़ किसी भी हाल में नहीं.

लेकिन इस समूह को तत्काल ही असंवैधानिक आदि घोषित किया जाने लगा और सोशल मीडिया के माध्यम से जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को ऐसे दर्शाया जाने लगा जैसे कि वो किसी पार्टी के नेता या मज़हबी प्रचारक हों और उन्होंने कोई राजनैतिक या धार्मिक सभा कर के लोगों को खतरे में डाला हो. अगर कोई साजिशकर्ता हो तो उसका विरोध जायज़ और उचित भी है लेकिन एक सही मंशा और एक सही सोच का उपहास करना निश्चित तौर पर किसी को मानसिक पीड़ा देता है और ये पीड़ा DM व् SP पीलीभीत को जरूर हुई होगी.

असल में जिले के २ सबसे वरिष्ठ अधिकारी अचानक ही गलियों से गुजरने लगे तो कुछ स्थानीय लोगों में कौतूहल होना स्वाभाविक था. उन्हें अच्छा भी लगा होगा कि जिस प्रकार से उस समय कोई थाली बजा रहा था और कोई ताली , उसी प्रकार से उन्ही की तरह उनके DM और SP उनके बीच में शंख और घंटा बजाते निकले.. ये उन कुछ लोगों के लिए एक अपनेपन के एहसास जैसा था जिसको उन्होंने भावनात्मक रूप में लिया और अपनी गली से निकलते DM और SP के साथ अपने दरवाजे के आगे भर चल लिए.

ये असल में एक सम्मान था अपने जिले के वरिष्ठों को जिसको कहीं न कहीं नकारात्मक रूप में लिया गया और इसका कुछ ही देर का विडियो एकतरफा वायरल किया जाने लगा. यहाँ एक बात जो सबसे ज्यादा गौर करने योग्य है वो ये है कि कुछ स्थान ऐसे भी हैं जहाँ एक पुलिस कांस्टेबल के आने से लोगों में भय जैसा महौल बन जाता है लेकिन वहीँ पीलीभीत जिले के SP और DM को देख कर लोग उनके साथ चलने लगे. इसका अर्थ ये है कि इन दोनों अधिकारियो का व्यवहार उनके जिले की जनता के लिए बेहद मिलनसार और सौहार्दपूर्ण रहा है. पर अफ़सोस इस पक्ष को कहीं न कहीं इग्नोर किया गया.

इस मामले में एक और एकपक्षीय विषय ये रहा कि मात्र एक वीडियो को वायरल किया गया जबकि उसी के थोड़ी देर बाद जिलाधिकारी पीलीभीत का इसी मामले में बयान भी आया जिसको तवज्जो नही दी गई. इसका सीधा अर्थ ये भी हो सकता है कि लक्ष्य सिर्फ जिलाधिकारी व् SP पीलीभीत के ऊपर नकारात्मक रूप में था. यहाँ ये ध्यान रखने योग्य ये भी है कि मौके पर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी थे जिसमे इस समूह के ज्यादातर लोग उनके साथ चल रहे थे.

अगर इसी मामले के अन्य पहलुओं पर गौर किया जाय तो पीलीभीत जिले में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या न के बराबर है . पीलीभीत जिला अन्तराष्ट्रीय सीमा नेपाल से जुडा हुआ है जहाँ से दोनों देशो के लोगों का आना जाना लगा रहता है. लेकिन इसके बाद भी DM के नेतृत्व में पीलीभीत के जिला प्रशासन और SP के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन ने कोरोना के समय में इतनी सख्त निगाह इस सीमा पर रखी कि कोई भी ऐसा संक्रमण नहीं फ़ैल पाया जो भारत और नेपाल दोनों देशो के लिए सिरदर्द बने.. ख़ास बात ये है कि इन दोनों अधिकारियो ने चेहरे पर मास्क लगा रखे थे जिस से ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये कोरोना पर खुद की सुरक्षा के साथ शासकीय नियमो के पालन के लिए कितने सजग रहे होंगे.

इस मामले ने राजनैतिक तूल तब पकड़ा जब योगी आदित्यनाथ ही नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी तक की तमाम , बल्कि लगभग हर नीति का विरोध करने वाले वामपंथी नेता मोहम्मद सलीम ने इस वीडियो का गलत अर्थ निकालते हुए ट्विट किया. उस ट्विट में उन्होंने जिस प्रकार से एकतरफा बातें बिना तथ्यों को गहनता से जाने कहने का प्रयास किया. असल में समझने के लिए इतना भी काफी हो सकता था कि शंखनाद और घंटानाद को संभवतः कहीं न कहीं कम्युनिस्ट नेता मोहम्मद सलीम ने योगीराज में किसी धार्मिक रूप में लिया हो और उन्होंने इसको जनता के अन्य रूप का रंग देने का प्रयास किया हो..

लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि अंत में सोशल मीडिया में कुछ वैसा ही माहौल कुछ समय के लिए बन गया.. यहाँ ये बात सबसे ज्यादा ध्यान रखने योग्य है कि जिस मोहल्ले से ये काफिला गुजरा और पीलीभीत की बहुसंख्यक जनता भी वहां के DM और SP के खिलाफ इस प्रकार के दुष्प्रचार से खुश नहीं है ..ऐसे में DM व् SP पर इस प्रकार के आरोप कहीं न कहीं सार्थक सिद्ध नहीं होते दिखाई दे रहे है. इसी के साथ जनता कर्फ्यू के उल्लंघन की भी सबसे कम शिकायते जिन जिलों में से आ रही हैं उसमे पीलीभीत भी है.

साम्प्रदायिक रूप से मिश्रित आबादी वाले पीलीभीत में धर्मस्थलों पर श्रधालुओं के आवागमन को सीमित करने आदि में भी किसी प्रकार का तनाव नहीं देखने को मिला.. इस प्रकार अगर सब तथ्यों को जोड़ कर देखा जाय तो कहीं न कहीं ये माना जायेगा कि पीलीभीत जिले के वरिष्ठ अधिकारियो के खिलाफ इस प्रकार की एकतरफा बातें अच्छा कार्य कर रहे व् करने की चाह रख रहे लोगों का मनोबल तोड़ने वाली साबित हो सकती हैं. फिलहाल इस मामले को तूल देने के बजाय उपरोक्त दोनों अधिकारी जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसी की प्राथमिकता पर केन्द्रित है.

रिपोर्ट –

राहुल पाण्डेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज़ 

मुख्यालय- नॉएडा

मोबाईल – 9598805228


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