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इस्लाम कबूल करने वाली ब्रिटिश ईसाई पत्रकार रिडले ने कैसे किया दुर्दांत हत्यारे और बलात्कारी आतंकियों का महिमामंडन ? क्या आप करेंगे विश्वास ?


अगर किसी अफगानी और ख़ास कर तालिबानी सोच वाले से आप इस घटना की तस्दीक करेंगे तो वो रटा रटाया किस्सा बताना शुरू कर देगा कि किस प्रकार से एक विदेशी महिला पत्रकार को तालिबान आतंकियों ने पहले तो गिरफ्तार किया उसके बाद उसको बहन की तरह से रखा और बाद में रिहा कर दिया.. जब वही महिला अपने मुल्क में जा कर क़ुरान पढ़ कर आतंकियों की सोच को समझने की कोशिश करने लगी तब धीरे धीरे वही मुसलमान बन गई और उसने अपने ईसाइयत मत को त्याग दिया..

फिलहाल उस से पहले ये जानना बेहद जरूरी है कि किस प्रकार से ISIS के कुख्यात आतंकियों ने कभी यजीदी तो कभी शिया महिलाओं के साथ पूरे ईराक और सीरिया में बर्बरता का खेल खेला.. उनके चंगुल से कुर्द महिलायें भी नहीं बची जिनकी गर्दने उन्होंने रेत डाली. अभी तक कई यज़ीदी महिलाएं अपने दर्द को बताते हुए रोने लगती हैं कि उनको अंडरवियर तक नही बदलने दिया जाता था क्योकि उनका नियमित अंतराल पर बलात्कार किया जाता रहा.. ऐसे में जो कहानी विदेशी महिला पत्रकार ने बताई उस पर कईयों को शक हो रहा है..

इंग्लैंड में पैदा हुई ब्रिटिश रिपोर्टर का जन्म 1958 में हुआ था “वाननी रिडले” को तालिबानी अफ़ग़ानिस्तान में रिपोर्टिंग के लिए भेजा गया था.वहां वो बुर्के में रहकर गांव गांव रिपोर्टिंग करती थी कि उनके हिसाब से एक दिन तालिबान के बीच उनका हाईटेक कैमरा गिर जाने के कारण वो पकड़ी गईं। तालिबान के घेरे में आने के बाद वो अपने इबरत्नाक भयानक अंजाम के बारे में सोच कांप रही थी कि अब ये बर्बर तालिबानी उनके साथ गैंगरेप करेंगे.

आगे बताते हुए वो कहती हैं की तालिबानी मर्दो ने उन्हें हाथ तक नहीं लगाया ..उनका कहना था कि तालिबान में एक महिला आतंकी ने आकर उनकी तलाशी लेनी चाही, इस पर बिदक कर रिडले ने बुर्के समेत नीचे के अपने स्कर्ट को उठाना चाहा जिसपर वो तालिबानी मर्द 180 डिग्री घूम कर नीची नज़रे किये फौरन चले गए. हैरानी की बात ये है की वो कुछ समय पहले खुद को डरा हुआ बता रही थीं और बाद में खुद को बिदक कर स्कर्ट उतार देने की बात कहने लगीं..

इसके बाद उन्होंने आगे चल कर तालिबानी आतंकियों की शान में कसीदे गढ़ डाले.. उन्होंने एक किताब तक प्रकाशित कर डाली और अपनी किताब “in the hands of Taliban” में लिखा कि तालिबानियों को मारने के लिए बम की ज़रूरत नही, वो इतने हयादार और शर्मीले मुसलमान है कि औरत के कपड़े ही उनपर फेंक दो तो शर्म से मर जायेंगे ।बाद में अपना नाम बदल कर मरियम रिडले रखने वाली ये महिला पत्रकार पूरी दुनिया में घूम घूम कर इस्लाम का प्रचार करने लगीं. 2013 में जमात-ए-इस्लामी द्वारा आयोजित ‘स्प्रिंग ऑफ इस्लाम’ मे हिस्सा लेने दिल्ली आना चाहती थी पर भारत सरकार ने उन्हें वीज़ा ही न दिया था. फिलहाल इनके द्वारा बताई गई कहानी और अब के प्रत्यक्ष हालत में काफी फर्क लगता है एक आम व्यक्ति को.

 

 

 


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