क्या उन्नाव के SP विक्रांत वीर ने सच में पीडिता के परिजनों के साथ की बदतमीजी या दिखाया जा रहा बस अर्ध सत्य ? पड़ताल सुदर्शन न्यूज पर


हैदराबाद की घटना के ठीक समय एक अन्य घटना ने आम जनता का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया और वो है उन्नाव में एक पीडिता की हत्या.. इस घटना ने जहाँ मानवीय संवेदना के तमाम मापदंड़ो को ध्वस्त कर दिया तो वहीँ बलात्कारियो और महिला विरोधी मानसिकता वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की मांग तो तेज भी कर दिया. तमाम दलों के राजनेताओं ने इस पर अपने अपने अंदाज़ में प्रतिक्रिया दे कर इस मामले को और भी ज्यादा धार दे दी.

लेकिन उसी के साथ एक अन्य घटना अचानक ही मीडिया के साथ सोशल मीडिया की सुर्खियाँ बन गई. इस मामले में अचानक ही उन्नाव के पुलिस अधीक्षक विक्रांत वीर का एक वीडियो सोशल मीडिया और मुख्य स्ट्रीम मीडिया पर वायरल होने लगा जिसमे उन्हें पीडिता के परिवार वालों के साथ एक संक्षिप्त बहस में कहते सुना जा रहा है कि “फिल्म बनवानी है तो बताओ”.. इस मामले ने अचानक ही तूल पकड़ लिया और SP उन्नाव को संवेदनहीन और न जाने क्या क्या नामो से नवाजा जाने लगा..

अगर इस मामले की तह तक जाया जाय तो उन्नाव के वर्तमान पुलिस अधीक्षक विक्रांत वीर के आने के बाद उन्नाव में तमाम अपराधो के साथ महिला के खिलाफ अपराधो में काफी गिरावट आई थी. इस घटना ने भले ही एक बार फिर से उन्नाव को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया हो लेकिन बेहद विषम हालात से उन्नाव को सम्भाल और उबार कर शांति और सौहार्द की तरफ अग्रसर करने में वर्तमान SP विक्रांत वीर का अथक परिश्रम सबसे ज्यादा सकारत्मक परिणाम दायक रहा .

इस बात को किसी मीडिया के बजाय स्थानीय जनता से तस्दीक किया जा सकता है. SP उन्नाव की जनता के लिए उपलब्धता और उनके हर समय सक्रियता ने उनके अधीनस्थ पुलिस बल को भी अपने जैसा बनाये रखा और उन्नाव में जनजीवन पटरी पर लाने में अहम् भूमिका अदा की. फ़िलहाल एक कुछ क्षणों के वीडियो के आधार पर उनकी छवि को जिस प्रकार से तोड़ने मरोड़ने की मुहिम चल गई है उस से खुद उन्नाव की जनता भी शायद संतुष्ट नही दिखाई दे रही है..

फिलहाल अगर बात उस वीडियो की हो तब उसमे उन्नाव पुलिस अधीक्षक बेहद शांत और संयत भाव से पीडिता के परिजनों से बात करते दिखाई दे रहे हैं. भीड़ ने पुलिस को ही नहीं बल्कि पीडिता के परिजनों को घेर रखा था और भीड़ कब किस पल क्या स्वरूप ले ले इसको ध्यान में रखते हुए पुलिस अधीक्षक उन्नाव बार बार पीडिता के परिजनों से अपील कर रहे हैं कि आप आराम से चलिए और बैठ कर बात करते हैं.. उनका प्रथम दृष्टया असल मकसद पीडिता के परिजनों की सुरक्षा प्रतीत होता था..

इसी मामले में दूसरा पहलू ये है कि उस समय कई अन्य लोगों ने अपने- २ मोबाईल फोन से कैमरे ऑन कर के वीडियो बनाने जारी रखे थे. शासकीय और न्यायिक नियमानुसार किसी भी ऐसे मामले में न सिर्फ पीडिता बल्कि परिजनों की पहिचान भी उजागर न हो.. भीड़ में पीडिता के कई परिजन ऐसे हालात में थे जो वहां कैमरा चला रहे कई लोगों द्वारा सार्वजानिक किये जा सकते थे , ऐसे में पुलिस अधीक्षक उन्नाव विक्रांत वीर को कहीं न कहीं उनकी पहिचान नियमानुसार छिपा कर रखना भी अपनी जिम्मेदारी प्रतीत हो रही थी..

पुलिस अधीक्षक उन्नाव का अचानक ही विरोध करना शुरू कर दिए कई ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने अभी हाल में ही देश के विभिन्न हिस्सों में भीड़ द्वारा किये गये उत्पात पर हंगामा किया था और पुलिस को भीड़ से निबटने में अक्षम बता कर न सिर्फ प्रदेश शासन बल्कि दिल्ली तक की क्षमता पर सवाल उठाये थे, ऐसे में पुलिस अधीक्षक उन्नाव विक्रांत वीर पीडिता के परिजनों को भीड़ से हटा कर सुरक्षित रखने की दिशा में प्रयासरत थे जिसमे कहीं से कुछ भी गलत नहीं साबित हो रहा..

रही बात उनके द्वारा वीडियो में बोले गये अंतिम शब्द की जिसके चलते उन पर तमाम उँगलियाँ उठनी शुरू हो गई हैं तो उन्होंने वहां फिल्म बनवानी है तो बताओ शब्द कहा. देखने पर ये उस पीडिता से ज्यादा उन लोगों की तरह इशारा था जो वहां एक गमगीन माहौल को अपने अपने अनुसार परिभाषित कर रहे थे. पीडिता की मृत्यु से अंतिम संस्कार तक पूरी तरह न्याय और संवैधानिक मार्ग का अनुसरण करते हुए हालत को सतर्कता से काबू करने वाले पुलिस अधीक्षक ने वहां अलग अलग बातें कर रहे तमाम लोगों को एक प्रकार से सम्बोधित जैसा किया था..

वीडियो को उनके उन शब्दों के बाद तत्काल रोक दिया गया और उसी शब्द को बार बार घुमा घुमा कर चलाया गया.. जबकि वीडियो खत्म होने के बाद भी वो पीडिता के परिजनों से शांति और सहयोगात्मक माहौल में बात करते रहे और उनके साथ वहां मौजूद भीड़ को शांत और संयत भाव से समझाते रहे. कई मिनटो की बातचीत में कुछ सेकेण्ड काट कर जिस प्रकार से वीडियो घुमाया गया उस से कहीं न कहीं ये जरूर लगता है कि जो दिखाया गया वो अर्ध सत्य है जबकि पूर्ण सत्य के लिए SP उन्नाव के स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा करनी चाहिए थी.

पीडिता के और उनके परिजनों के साथ न सिर्फ पुलिस अधीक्षक उन्नाव बल्कि उन्नाव जिला व् पुलिस प्रशासन के एक एक व्यक्ति की मानवीय संवदेनायें हैं.. हर कोई इस घटना से दुखी व् भावुक है, भले ही कुछ लोग सिर्फ कमियां निकाल रहे हो लेकिन उन्नाव पुलिस बिना थके लगातार संवैधानिक कार्यवाही कर के दोषियों को कड़े से कड़े दंड दिलाने के लिए रात दिन एक किये हुए है.. ऐसे में अपेक्षा पुलिस का मनोबल न गिरा कर सारा ध्यान दोषियों को कठोर दंड दिलाने पर केन्द्रित हो तो शायद बेहतर हो..

रिपोर्ट –

राहुल पाण्डेय

सुदर्शन न्यूज – नॉएडा 

सम्पर्क – 9598805228


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