3 तलाक के मुद्दे पर आखिर किस के खिलाफ जा रहे हैं नीतीश कुमार ? सरकार के या समाज के ?

ये मांग जन जन की आवाज बनी थी . इस मांग के खिलाफ जाने वाले गिने चुने लोगो को उनके ही समाज के बहुसंख्यको द्वारा विरोध का सामना करना पड़ा था. ये मुद्दा था महिलाओं के मान , सम्मान और स्वभिमान की रक्षा का लेकिन राजनीति और कुछ वोटों के बैंक की तलाश में जब इसका विरोध को सत्ता पक्ष में बैठ कर करे तो सवाल उठता ही है कि ये विरोध किसका है , सिर्फ सरकार का या समाज का भी ? फिलहाल ये सवाल अभी सब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जरूर जानना चाह रहे हैं .

3 तलाक पीडिता महिलाओं को जहाँ मोदी सरकार से तमाम आशा है वही उसके सहयोगियों से भी उन्हें उतना ही उम्मीद है.. राष्ट्र के विकास , पीडितो को न्याय और गरीबो के कल्याण के समूहिक एजेंडे पर भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार में सहयोगी कहे जाने वाले नीतीश कुमार ने जब तीन तलाक बिल के विरोध का एलान किया तब हर कोई चौंक गया क्योकि इस से सबसे जयदा आघात उन मुस्लिम महिलाओं को लगा है जो मात्र 3 शब्दों में बेसहारा कर दी जाती हैं .

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार आज संसद में तीन तलाक का विधेयक पेश करेगी, लेकिन जदयू इसका विरोध करेगा। अपने बचे में जेडीयू ने कहा है कि बीजेपी को इस मुद्दे पर सभी से बात करनी चाहिए थी।जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा है कि बीजेपी विधेयक पेश करने के पहले को इस मुद्दे पर सबको बिठाकर बात करनी चाहिए थी। जेडीयू सुप्रीमो व बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार लॉ कमीशन को पहले बता चुके हैं कि यह संवेदनशील मामला है, जिसपर आम सहमति जरूरी है।

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