इस बार एक युनिवर्सिटी में लगे “हिंदुत्व मुर्दाबाद’ के नारे. युनिवर्सिटी के नाम में “मुस्लिम’ शब्द


बहुत कम समय पहले की बात है जब मात्र आस्था के अपमान का नाम ले कर लखनऊ में २ दरिंदो के घुस कर कमलेश तिवारी की गर्दन पर चाकुओ के कई वार कर डाले थे. उस समय नेताओं और राजनीति के एक खास वर्ग ने पहले तो इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता को दोषी ठहराने की कोशिश की लेकिन जब वो उसमे सफल नहीं हुए तो उन्होंने हत्यारों के परोक्ष समर्थन में बयान दिए थे कि किसी की भी आस्था को चोट नहीं पहुचाई जानी चाहिए.

लेकिन अचानक ही वही वर्ग अब खामोश सा हो गया है क्योकि इस बार युनिवर्सिटी के अन्दर सीधे सीधे हिन्दू और हिंदुत्व को मुर्दाबाद बोला गया है. ये युनिवर्सिटी कोई और नही बल्कि वो है जिसके नाम में मुस्लिम लिखा और अभी कुछ समय पहले यहाँ भारत के विभाजक मुहम्मद अली जिन्ना के लिए खूब प्यार उमड़ा था. इसका नाम है अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी जहाँ पर नागरिकता संसोधन विधेयक का विरोध करने के लिए जमा हुए उन्मादियो ने भाजपा एक बजाय सीधे सीधे हिंदुत्व मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं.

सोमवार देर शाम खुद को छात्र कहने वाले उन्मादियो के समूह ने कैंपस में सभा की, जिसमें कैब को मुस्लिम विरोधी करार दिया गया। बाद में छात्रों ने कैब की प्रतियां फूंकीं और हिंदुत्व मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। इस मौके पर उन्मादियों ने कहा कि यह कानून संविधान के खिलाफ है।  यह गांधी, नेहरू, मौलाना आज़ाद की सोच के खिलाफ विधेयक है. आगे कहा गया कि ये विधेयक कैब उस वादे के खिलाफ  है जो 1947 में यह कहकर रोका गया था कि मत जाओ यह देश तुम्हारा है, यह उन मुसलमानों के साथ गद्दारी है.

 


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