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उद्धव की सरकार में एक ऐसा मंत्री ? क्या हिंदू विरोध के इस एलान को स्वीकारेगी शिवसेना ?


नागरिकता संशोधन विधेयक CAB संसद से पारित हो चुका है. बिल पास होने के बाद भी देश में सियासत गरमाई हुई है तथा हिन्दू विरोधी कथित ताकतें इस बिल का विरोध कर रही हैं. कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इस बात का एलान कर दिया है कि वो अपने राज्य में CAB को लागू नहीं होने देंगे. इस बीच छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यभूमि तथा हाल ही में महाराष्ट्र से CAB तथा हिंदू शरणार्थियों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. वो महाराष्ट्र जहाँ हाल ही में शिवसेना की सरकार बनी है तथा उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने हैं.

खबर के मुताबिक़, महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्री ने एलान कर दिया है कि महाराष्ट्र में CAB को लागू नहीं किया जाएगा. ये बयान दिया है कांग्रेस नेता नितिन राउत ने, जो उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री बने हैं. नितिन राउत के एलान के बाद सियासी हलकों में यही सवाल उठ रहा है कि क्या शिवसेना अपने मंत्री द्वारा हिन्दू विरोध के इस एलान को स्वीकार करेगी? क्या शिवसेना सत्ता के लिए हिन्दू शरणार्थियों को उनका हक़ तथा सम्मान देने वाले बिल CAB को महाराष्ट्र में लागू नहीं होने देने का एलान करने वाली कांग्रेस के आगे झुक जाएगी ?

महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री नितिन राउत ने शुक्रवार को कहा कि उनके राज्य में भी इस कानून के लागू होने का सवाल ही नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इस संवेदनशील मुद्दे पर पार्टी का समर्थन करेंगे. बता दें कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें कांग्रेस और राकांपा गठबंधन के अन्य साझेदार हैं. उद्धव सरकार के लोक निर्माण मंत्री राउत ने कहा, कांग्रेस नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ है. हमने संसद में इसका पुरजोर विरोध किया और हम इसे महाराष्ट्र में लागू नहीं होने देंगे.

नितिन राउत ने कहा कि राज्य में इसके लागू होने का सवाल ही नहीं है. उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि उद्धव जी इस मामले में हमारा पूरा सहयोग करेंगे. इस बीच महाराष्ट्र के ही मंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बालासाहेब थोराट ने कहा कि पार्टी की राज्य इकाई इस मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व के रुख पर आगे बढ़ेगी. उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, हम नागरिकता संशोधन कानून से जुड़े सरकार के कदम की निंदा करते हैं, जो संविधान की भावना के विरुद्ध है. पार्टी की राज्य इकाई इस मुद्दे पर उसी रुख पर आगे बढ़ेगी, जो केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा. अब देखना ये हैं कि इस मामले पर शिवसेना का क्या रुख होता है?  क्या शिवसेना कांग्रेस के विरोध की हिम्मत जुटा पाएगी ?


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