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महिला पुलिस ट्रेनिंग के दौरान जो हंगामा वाराणसी में हुआ था, कहीं उसकी पुनरावृत्ति न हो जाए लखनऊ में भी.. महिला आरक्षियों की पूरी जिम्मेदारी पुरुषो को


कुछ समय पहले की ही बात है जब वाराणसी में उत्तर प्रदेश पुलिस की महिला सिपाहियों की ट्रेनिंग के दौरान एक ऐसा हंगामा देखने को मिला था जिसने वर्दी वाले विभाग में भी महिलाओं का कुछ पुरुष प्रधान जैसी मनिकता वालों द्वारा शोषण को सामने जीवंत रूप में रख दिया था.. ये मामला था जून २०१९ का जब महिला अभ्यर्थी बैरको से और यहाँ तक की ट्रेनिंग सेंटरों से निकल कर सडको पर आ गई थीं और उन्होंने अपने खिलाफ पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा प्रताड़ना का आरोप लगाया था..

ये बात जून के प्रथम सप्ताह २०१९ की है.. वाराणसी पुलिस लाइन गेट पर सुबह- २ प्रशिक्षु महिला आरक्षियों ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया था.. इतना ही नहीं उन्होंने आगे बढ़ कर पुलिस लाइन-पांडेयपुर मार्ग को जाम भी कर दिया था.. उस समय प्रशिक्षु महिला आरक्षियों का कहना था कि मंगलवार रात उनके बैरक में एक युवक ने घुस आया था. जब महिला आरक्षियो ने शोर मचाया तो वो भाग निकला था जिसकी सूचना उन्होंने तत्कालीन RI को दी पर वो मामले को देखने तक नहीं आये थे..

आखिरकार हालत इतने बुरे हुए थे कि मजबूर हो कर अपनी इज्जत व् मान सम्मान की सुरक्षा करने के लिए महिला प्रशिक्षु आरक्षियों ने सडको पर उतरना ठीक समझा था और तब जा कर उनके प्रदर्शन की सूचना पाकर आला अधिकारी मौके पर पहुंचे थे.  अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया थे कि सुरक्षा व्यवस्था में चूक नहीं होने दी जाएगी, तब सभी शांत हुईं और बैरकों की ओर रवाना हुईं थी.. इसी  साथ बताया ये भी जा रहा था कि तब तत्कालीन एसएसपी ने कहा था कि अब महिला प्रशिक्षु आरक्षियो के लिए महिला अधिकारियो की ही ड्यूटी लगेगी..

उस समय जहाँ मुख्य समस्या आई थी वो थी महिला प्रशिक्षु सिपाहियों की आवासीय बैरको इत्यादि में पुरुष पुलिस स्टाफ की ड्यूटी जिसमे उन्होंने अपने नहाने आदि में समस्या बताई थी.. बाद में इसको सुधार करवाया गया था. लेकिन अब जिस प्रकार से लखनऊ में हो रहा है उसके चलते वाराणसी की घटना की पुनरावृत्ति सम्भव दिखाई दे रही है.. नाम न छापने की शर्त पर लखनऊ पुलिस लाइन में ट्रेनिंग ले रही एक महिला पुलिसकर्मी के परिजनों से चौंकाने वाले तथ्य सामने आये..

महिला पुलिसकर्मी के परिजनों के अनुसार लखनऊ में ट्रेनिंग ले रही तमाम महिला पुलिस स्टाफ का पूरा जिम्मा पुरुष पुलिसकर्मियों के हवाले कर दिया गया है.. परिजनों के अनुसार ट्रेनिंग के दौरान नाममात्र की महज आधे दर्जन महिला कांस्टेबल वहां सुरक्षा आदि के लिए तैनात की गईं हैं लेकिन ट्रेनिंग के दौरान मुख्य रूप से “मेजर” कहा जाने वाला स्टाफ और हॉस्टल वार्डन इत्यादि सभी पुरुष पुलिसकर्मी ही हैं.. अर्थात महिला पुलिसकर्मियों के सोने , नहाने इत्यादि का मुख्य प्रभार पुरुष पुलिसवालों के हाथ में है.

यद्दपि अभी तक किसी प्रकार की वाराणसी जैसी कोई घटना लखनऊ से प्रकाश में नहीं आई है लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और ट्रेनिंग विभाग के मुखिया को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए क्योकि एकमात्र गलती पूरे शासन के लिए जवाबदेह बन सकती है.. फ़िलहाल ताजा समाचार मिलने तक ट्रेनिंग स्टाफ में कोई बदलाव नहीं किया गया है और लखनऊ पुलिस लाइन में हो रही ट्रेनिंग यथावत है ..

 


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