मेरठ के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट SSP ने अयोध्या फैसले से पहले 10 उन्मादियों को भेजा नोटिस.. कहा जितनी जल्दी हो सके छोड़ दो मेरठ


अयोध्या में श्रीराम मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है. जैसे जैसे फैसले की तिथि नजदीक आ रही है, लोगों की धडकनें बढ़ती जा रही हैं. हालाँकि फैसला कब सुनाया जाएगा, इसकी कोई निश्चित तिथि सुप्रीम कोर्ट ने नहीं बताई है लेकिन ये तय माना जा रहा है कि 15 नवम्बर तक फैसला आ जाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि CJI रंजन गोगोई 17 नवम्बर को रिटायर हो रहे हैं तो इससे पहले कोर्ट अपना फैसला सुना देगा.

अयोध्या प्रकरण पर फैसला आने से पहले पुलिस-प्रशासन तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. इसी को लेकर मेरठ के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट SSP ने सुरक्षा के मद्देनजर एक पूर्व विधायक और एक पूर्व मंत्री समेत दस बवालियों को जिला छोड़कर जाने का नोटिस भेजा गया है. चेतावनी दी गई है कि यदि फैसले वाले दिन ये लोग मेरठ में दिखाई दिए तो उनकी तुरंत गिरफ्तारी होगी. बता दें कि ये 10 वो लोग हैं जो कई बार उन्मादी कार्यों में संलिप्त रह चुके हैं तथा सांप्रदायिक माहौल खराब कर चुके हैं.

सुरक्षा के लिहाज से मेरठ जिले को आठ सेक्टरों और 31 जोन में बांटा गया है. 163 संवेदनशील प्वाइंट बनाए गए हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिले में 1250 पुलिसकर्मी, पांच कंपनी पीएसी और एक कंपनी आरएएफ तैनात की गई है. 200 अतिरिक्त पुलिसकर्मी मांगे गए है. बुलंदशहर के नरोरा और हिंडन नदी पर कैमरे लगाए गए हैं, ताकि बवालियों पर नजर रखी जाए. जिन बवालियों को चिह्नित करने के साथ ही नोटिस जारी किए गए हैं, यदि अयोध्या प्रकरण में फैसला आने वाले दिन ये दस लोग मेरठ में दिखाई दिए तो पुलिस उनको तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजेगी.

जिन लोगों को पुलिस ने मेरठ छोड़ने का नोटिस भेजा है, उनके नाम नहीं बताये गये हैं लेकिन बताया जा रहा है कि पूर्व विधायक योगेश वर्मा और उन्मादी खनन माफिया याकूब कुरैशी के अलावा ऐसे कई बवालियों को चिह्नित किया गया है, जिन पर पूर्व में संगीन धाराओं में केस दर्ज हैं. वहीं, सोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए साइबर सेल, सर्विलांस और क्राइम ब्रांच टीम को लगाया गया है. मेरठ एसएसपी अजय कुमार साहनी ने कहा है कि अयोध्या प्रकरण को लेकर पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किए है. सेना के साथ मीटिंग हो गई है.

SSP अजय कुमार साहनी ने बताया है कि जिले के दस बवाली चिह्नित किए गए है, जिन्हें अयोध्या प्रकरण में फैसले से पहले जिले से बाहर जाने के लिये नोटिस भेजा गया है. कानून व्यवस्था को देखते हुए सारे इंतजाम हो रहे हैं. अयोध्या प्रकरण पर फैसला आने के बाद यदि कहीं कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो सेना कमान संभालेगी. इस संबंध में बृहस्पतिवार को कैंट स्थित सब एरिया मुख्यालय सभागार में सेना और पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त बैठक कर सुरक्षा योजना को साझा किया. सिविल और सैन्य प्रशासन के बीच यह बैठक कमिश्नर अनीता सी. मेश्राम और पश्चिमी यूपी के जीओसी पीएस साईं की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित की गई.

बैठक में मुख्य रुप से अयोध्या प्रकरण को लेकर सुरक्षा संबंधी, कानून व्यवस्था, अतिक्रमण, यातायात प्रबंधन व आर्मी क्लीनिक्स आदि प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की गई. कमिश्नर और आईजी रेंज आलोक सिंह ने सैन्य अधिकारियों को सभी बिंदुओं पर जिला प्रशासन की ओर से सहयोग करने के लिए आश्वस्त किया. वहीं, पश्चिमी यूपी के जीओसी ने भी आश्वासन दिया कि सैन्य प्रशासन द्वारा आवश्यक  सहयोग दिया जाएगा. तय हुआ कि बेहतर समन्वय और तालमेल बनाए रखने के लिए सेना और जिला प्रशासन की ऐसी बैठकें नियमित तौर पर होती रहेंगी. फिलहाल देश को इन्तजार उस दिन का है जब सुप्रीम कोर्ट अयोध्या पर फैसला सुनाएगा.


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