Breaking News:

स्पष्ट हार को देखकर खेला जा रहा सेक्यूलरिज्म का खेल.. खिलाड़ी वो जिनके चलते दशकों तंबू में रहे श्रीराम


अब जब सुप्रीम कोर्ट अयोध्या श्रीराम मंदिर मामले में फैसला सुनाने वाला है. सुप्रीम कोर्ट में जिस तरह से बहस हुई तथा दलीलें दी गईं, सुनवाई के आखिरी दिन मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने बौखलाहट में श्रीराम जन्मभूमि का नक्शा फाड़ दिया, उससे साफ़ नजर आ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या आने वाला है. ऐसे में संभावित हार को खेलते हुए वो लोग अब सेक्यूलरिज्म का खेल रहे हैं, जिनके कारण दशकों से प्रभु श्रीराम तंबू में बैठे हुए हैं.

खबर के मुताबिक़, आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष तथा शिया मौलाना कल्बे सादिक ने कहा है कि उनकी निजी राय है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले मुसलमानों को चाहिए कि वे अयोध्या के विवादित स्थल की जमीन हिन्दुओं को मंदिर निर्माण के लिए सौंप दें. हालांकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद के पक्षकारों की पैरोकारी करता रहा है. मौलाना कल्बे सादिक ने  कि मुसलमानों को यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि उनके लाख चाहने पर भी अब अयोध्या में विवादित स्थल पर नई मस्जिद नहीं बन सकती

मौलाना कल्बे सादिक ने कहाकि इससे पहले मुम्बई के एक बड़े जलसे में भी वह कह चुके हैं कि हमेशा कुछ हासिल करके ही जीता नहीं जाता बल्कि कुछ देकर भी जीता जा सकता है. उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर के पक्ष में आता है तो मुसलमानों को चाहिए कि वे पूरी खामोशी के साथ फैसले को स्वीकार करें और हिन्दुओं को बधाई दें. अगर मुल्क की इस सबसे बड़ी अदालत में मुसलमानों को जीत मिलती है तो भी वे मस्जिद की जमीन खुशी-खुशी हिन्दुओं को सौंप दें.

मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि अयोध्या की मस्जिद की जमीन हिन्दुओं को सौंपकर मुसलमान करोड़ों दिल जीत सकते हैं. उन्होंने मुसलमानों से कहा, ‘जब तक आप कुछ दें नहीं तो ले भी नहीं सकते. आप कुछ दीजिए तो आप कुछ लेने के भी अधिकारी रहेंगे. मैंने कहा था कि एक प्लाट अगर आप दे देंगे, एक मस्जिद आप दे देंगे जो आपके पास नहीं रह सकती है, पता है कि वह नहीं रह सकेगी आपके पास तो जो कल जाने वाली है वह आज खुशी खुशी दे दें तो एक मस्जिद से आप करोड़ों दिल जीत लेंगे.’

मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि मैं मुसलमान भाइयों को राय दे रहा हूं…वह यह है कि अगर हिन्दू भाई जीत जाते हैं और भगवान करे कि जीत जाएं तो वे खुशी का जुलूस निकालने के लिए जो भी करेंगे तो मुसलमान कोई प्रतिक्रिया न करें। वे खामोश बैठे रहें बल्कि जाकर बधाई दें और जो भी कर सकते हैं, अपनी नेक ख्वाहिशात बताएं उनको. बता दें कि एकतरफ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अयोध्या में बाबरी मस्जिद का समर्थन करता है, ऐसे में मौलाना कल्बे सादिक ने सुप्रीम कोर्ट का  फैसला आने से पहले सेक्यूलरिज्म के उस खेल को खेलना शुरूदिया है, जिसके कारण श्रीराम अब तक तंबू में हैं.


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share