एसएसपी ने मुस्लिम पुलिसकर्मियों दाढ़ी न रखने का दिया था आदेश.. फिर पड़ा ऐसा दवाब कि आदेश लिया गया वापस.. पुलिस विभाग में शरिया की आहट?


इस घटना के बाद ये सवाल स्वतः ही खड़ा हो रहा है कि क्या ये पुलिस विभाग में शरिया की आहट है? सवाल ये भी है कि ये सब यहीं तक रुक जाएगा या बात इससे आगे तक जायेगी? इससे भी बड़ा सवाल ये है कि आज शरिया की ये आहट समाज की रक्षक, समाज की सच्ची सेवक पुलिस विभाग से सामने आई है तो क्या कल को यही सब राष्ट्र की रक्षक सेना में भी होगा? अगर हाँ तो फिर भारत का भविष्य क्या होने वाला है, इस पर अभी से चर्चा किया जाना जरूरी है.

ये वो घटना है तथा ये वो सवाल है जिन्हें सुदर्शन टीवी के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके जी अक्सर बिंदास बोल के माध्यम से उठाते रहे हैं. कई बार इन सवालों का मजाक भी बनाया गया लेकिन सुरेश चव्हाणके जी पुलिस विभाग में अप्रत्यक्ष रूप से शरिया की आहट के इन सवालों को उठाते रहे. अब कांग्रेस शासित अलवर की ये घटना सुरेश जी के उन सवालों पर मुहर लगा रही है. बता दें कि अलवर पुलिस अधीक्षक द्वारा अपने उस फरमान को वापस ले लिया गया है जिसमें पुलिसकर्मियों को दाढ़ी न रखने की बात कही गई थी.

बता दें कि अलवर पुलिस अधीक्षक ने मुस्लिम पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान दाढ़ी न रखने के आदेश दिए थे. अलवर पुलिस अधीक्षक के इस आदेश के बाद मुस्लिम समाज एसएसपी पर भड़क उठा था. इसके बाद अलवर एसएसपी पर इतना दवाब बनाया गया कि उन्हें अपना आदेश वापस लेना पड़ा. अलवर पुलिस अधीक्षक के आदेश में नौ पुलिसकर्मियों को दाढ़ी काटने के लिए कहा गया था ताकि वे ड्यूटी पर रहते हुए ‘निष्पक्ष’ दिखाई दें.

दरअसल राजस्थान में यह परंपरा है कि अल्पसंख्यक पुलिसवालों को दाढ़ी रखने के लिए जिला पुलिसअधीक्षक को आवेदन देना पड़ता है. उसके बाद ये दाढ़ी रखते हैं. अलवर एसपी पारिस देशमुख का कहना था, ‘कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हमने ये आदेश निकाले गए. हमने 32 पुलिसवालों को दाढ़ी रखने की इजाजत दे रखी है जिसमें से 9 को दी गई इजाजत वापस ली गई.’ इसके बाद मुस्लिम समाज अलवर पुलिस अधीक्षक के खिलाफ भड़क उठा तथा अलवर एसएसपी को आदेश वापस लेना पड़ा.


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