बड़े बंगलों के लिए बड़ी बात.. बंगलौर के बंगलों के लिए साफ़ एलान – “बंगलादेशी नौकर किसी हाल में नहीं”


ये वो सार्थक पहल है जिसको बेहद जरूरी माना जा रहा है राष्ट्र की सुरक्षा के लिए.. जहाँ सीमाओं पर हमारे सैनिक जान की बाजी लगा कर देश की रक्षा कर रहे हैं तो वहीँ पर देश के अन्दर पनप रहे मजहबी संक्रमण और घुसपैठ को रोकने के लिए अब जनता ने भी कमर कस ली है और पुलिस का सहयोग करने के साथ साथ देश को घुसपैठ मुक्त करवाने के लिए अपनी तरफ से पुलिस से भी २ कदम आगे चल कर काम करने का एलान कर दिया है.. ये एलान समाज के उच्च मध्य वर्ग से आ रहा है ..

ये मामला है कर्नाटक के बंगलौर का जहाँ पर आवासीय सोसईटी वालों ने साफ़ साफ नोटिस लगा दिया है की किसी भी हाल में बंगलादेशी नौकर स्वीकार नहीं किये जायेंगे.. असम आदि क्षेत्रो में NRC लागू होने के बाद बंगलादेशी घुसपैठी उस क्षेत्रो की तरफ पलायन कर रहे हैं जहाँ फ़िलहाल NRC की बात सरकार की प्राथमिकता में नहीं है . उसी में से एक जगह कर्नाटक भी है जहाँ बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में बंगलादेशियो ने नौकर आदि के रूप में शरण लेने का रुख किया है .

ऐसे में एक सतर्क और जागरूक समाज ने इसका प्रतिकार करने का फैसला किया है. बंगलुरु में अपार्टमेंट सोसाइटियों ने ऐसे सभी लोगों को नौकरी पर न रखने का फैसला किया है जो बाद में बांग्लादेशी अवैध प्रवासी निकल सकते हैं ! इसके लिए उन्होंने अपने यहाँ घरेलू नौकर, सिक्योरिटी गार्ड समेत कामगार भेजनेवाली नौकरी एजेंसियों को निर्देश भेजा है कि, उनकी सोसाइटी में बंगाली बोलनेवाले लोगों को काम पर न भेजा जाए, क्योंकि, बाद में वे अगर बांग्लादेशी निकले तो उन्हें नौकरी पर रखनेवाले मालिकों, यानि अपार्टमेंट सोसाइटी के निवासियों, के लिए भी क़ानूनी पचड़े में फँसने की संभावना हो सकती है !

इसके अलावा सरकार भी अपनी तरफ से घुसपैठ के प्रयासों को नगण्य करने के लिए प्रतिबद्ध है .. कर्नाटक के गृह मंत्री बासवराज बोम्मई ने दावा किया था कि, बंगलुरु और मैसूर शहर जिहादी गतिविधियों के केंद्र बनते जा रहे हैं ! उन्होंने इन राज्यों में आतंकियों के स्लीपर सेल सक्रिय होने की बात कही थी। उन्होंने जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश संगठन का नाम भी लिया।फॉरेनर्स एक्ट में मुकदमा दर्ज कर हिरासत में लिए गए अवैध अप्रवासियों को डिपोर्ट करने की तैयारी पुलिसद्वारा की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह निर्णय लेनेवाली सोसाइटियाँ मुख्यतः वाइटफ़ील्ड, मराठाहल्ली और इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी में स्थित हैं। यह तीनों इलाके बंगलुरु के टेक कॉरिडोर कहे जाते हैं, जहाँ आईटी इंडस्ट्री के ऑफिस और उन्हीं के आसपास उनमें काम करनेवाले लोगों के रिहाइशी इलाके हैं ! राज्य के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने इस आशय से घोषणा भी की थी। गौरतलब है कि, कर्नाटक के पास पहले से ही एक एटीएस पूरे प्रदेश के लिए है।


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