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ISRO का एक और एलान पहिचान बन गया भारत की नई इच्छाशक्ति की.. दुनिया देख रही एक नया जुझारू भारत


चंद्रयान 2 के विक्रम लैंडर की चाँद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग न हो पाने के बाद भी भारतीय अन्तरिक्ष एजेंसी इसरो के कदम रुकने वाले नहीं है. हाल ही में जानकारी आई थी कि अगले साल नवम्बर में चंद्रयान 3 की लौन्चिंग की जा सकती है लेकिन अब जो खबर सामने आई है वो भारत की नई तथा मजबूत इच्छाशक्ति को दर्शाती है. इसरो के इस एलान के बाद दुनिया उस भारत को देख रही है जो असफलताओं से डरता नहीं है बल्कि और मजबूती के साथ न सिर्फ आगे आता है बल्कि जीतता भी है.

बता दें कि  2021 में भारत की ओर से पहला मानव मिशन ‘गगनयान’ भेजा जाएगा. इसके लिए 12 संभावित यात्रियों को चुना गया है. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने गुरुवार को कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की ओर से प्रस्तावित पहले मानव मिशन ‘गगनयान’ के लिए अंतरिक्ष यात्रियों का चुनाव पेशेवर तरीके से किया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘संभावित अंतरिक्ष यात्रियों के चयन की प्रक्रिया जारी है और मेरा मानना है कि यह बहुत ही पेशेवर तरीके से किया जाएगा. इसरो के साथ बढ़ते संवाद से स्वयं चयन प्रक्रिया के प्रति समझ बढ़ी है.’

बेंगलुरु में आयोजित इंडियन सोसायटी फॉर एयरोस्पेस मेडिसिन (आईएसएएम) के 58 वें वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भारतीय वायुसेना की भूमिका के बारे में एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने कहा कि टीम इसरो के साथ समन्वय कर रही है और अंतरिक्ष यान के डिजाइन के पहलुओं को देख रही है. जैसे कि जीवन रक्षक प्रणाली, कैप्सूल का डिजाइन, साथ ही विमानन चिकित्सा प्रकोष्ठ यह सुनिश्चित कर रहा है कि इसरो चुनौती का सफलतापूर्वक सामना कर सफलता प्राप्त करे.

सम्मेलन को संबोधित करते हुए वायुसेना के चिकित्सा सेवा के महानिदेशक एयर मार्शल एमएस बुटोला ने बताया, ‘गगन यात्रियों के चयन का पहला चरण पूरा हो गया है और संभावित अंतरिक्ष यात्रा के लिए वायुसेना के चुने गए कुछ चालक दल सदस्यों का रूस में प्रशिक्षण पूरा हो गया है.’ बुटोला ने बताया कि जो काम उन्हें दिया गया था, उसे समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया है। वायुसेना अधिकारी के मुताबिक, बल के 12 लोगों को गगनयान परियोजना के लिए संभावित यात्री के रूप में चुना गया है और इनमें से सात प्रशिक्षण के लिए रूस गए हैं.

पहचान जाहिर नहीं करते हुए EK अधिकारी ने कहा कि रूस गए सात संभावित अंतरिक्ष यात्रियों के वापस आने के बाद चुने गए शेष संभावित यात्रियों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएग. उन्होंने कहा, ‘पहले चरण में गगनयान परियोजना के लिए 12 अंतरिक्ष यात्रियों का चुनाव किया गया है और इनमें से चार को अंतिम रूप से अंतरिक्ष यात्रा के लिए चुना जाएगा. परियोजना को लॉन्च करने के वक्त एक या दो गगन यात्री को मिशन के लिए चुना जाएगा.’

गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसे इसरो द्वारा दिसंबर 2021 तक प्रक्षेपित करने का लक्ष्य रखा गया है. इसरो भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूरा करने के लिए काम कर रहा है. अधिकारी ने बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाएगा और यान में पर्याप्त ऑक्सिजन और यात्रियों के लिए जरूरी अन्य सामान के साथ कैप्सूल जुड़ा होगा.


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