अपने लोगों को खुद से गोली मार दी और आरोप लगा दिया था पुलिस पर.. ये भारत के जिहाद का नया रूप है


नागरिकता संशोधन अधिनियम CAA के विरोध के नाम पर उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुई हिंसा तथा आगजनी को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. खुलासा हुआ है कि मेरठ में 20 दिसंबर 2019 के उपद्रव में छह लोगों की मौत पुलिस की गोली से नहीं बल्कि खुद उपद्रवियों की गोलियों से हुई थी. यह खुलासा बुधवार को पुलिस ने किया है. पुलिस ने उपद्रव करने के तीन आरोपियों को हत्या का आरोपी बनाया है, जिनमें से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.

बता दें कि मेरठ में हिंसा एके दौरान हुई मौत का जिम्मेदार पुलिस को बताया जा रहा था. उन्मादी आरोप लगा रहे थे कि पुलिस की गोली से ये मौतें हुईं लेकिन जांच में सामने आया है कि दंगाईयों ने खुद गोली मारी तथा इसका आरोप पुलिस पर लगा दिया. इसके बाद एक सवाल जरूर खडा हो रहा है कि कहीं ये जिहाद का कोई नया रूप तो नहीं है जिसके तहत योजनाबद्ध तरीके से हिंसा की जाए, लोगों की जान ली जाए तथा इसका आरोप उस पुलिस पर लगा दिया जाए जो इस हिंसा को रोकने की कोशिश करती है, समाज की सुरक्षा करती है.

बता दें कि नागरिकता संशोधन अधिनियम CAA के विरोध में 20 दिसंबर 2019 को लिसाड़ी गेट और हापुड़ रोड क्षेत्र में हिंसा हुई थी, जिसमें आसिफ, मोहसिन, अलीम, आसिफ, जहीर और हबीब की मौत हुई थी. पुलिस का उपद्रवियों की गिरफ्तारी करने का अभियान चल रहा है. 25 दिसंबर को पुलिस को एक सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में तीन लोग पुलिस पर गोलियां चलाते दिखाई दिए जिनकी पहचान अनस, अनीस उर्फ खलीफा व नईम के रूप में हुई. पुलिस ने पहले अनस और फिर अनीस उर्फ खलीफा को गिरफ्तार किया.

अभी तक पुलिस पर सवाल उठ रहे थे कि हिंसा में छह लोगों की हत्या कैसे हुई. पीड़ित परिवार के लोग पुलिस पर हत्या करने का आरोप लगा रहे थे. अनस के बाद अनीस उर्फ खलीफा से पूछताछ के बाद पुलिस ने खुलासा किया कि हिंसा के दौरान जिन लोगों ने पुलिस को निशाना बनाकर गोलियां चलाई थीं, उन गोलियों से इन छह लोगों की मौत हुई. पुलिस ने मुकदमे में अनस और अनीस को शामिल कर लिया है, जिसमें दोनों को हत्या से संबंधित धाराओं में आरोपी बनाया गया. इसके अलावा हिंसा में गोली चलाने वाले नईम और उसके अन्य साथी भी हत्या के आरोपी बनाए गए हैं.

मेरठ हिंसा में गोली चलाने वाले 20-20 हजार के इनामी अनस और अनीस से बरामद हथियारों को पुलिस फोरेंसिक लैब भेजेगी. पुलिस का कहना है कि छह लोगों की मौत गोली लगने से हुई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि गोली कौन से बोर की है. इसको लेकर विशेषज्ञों से राय ली जा रही है. फोरेंसिक लैब की जांच रिपोर्ट के बाद इसकी जानकारी लगेगी. पुलिस के मुताबिक हिंसा में गोली और पत्थर चलाने वाले लोगों को पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने उकसाया था. अनस और अनीस खलीफा को हथियार भी उपलब्ध कराए थे.

पुलिस का दावा है कि अनीस के भाई रईस की 1987 के दंगे में मौत हुई थी. उसके चलते पीएफआई ने अनीस को पुलिस के खिलाफ भड़काया और गोली चलाने के लिए तैयार किया. अनीस ने लिसाड़ीगेट के कई लोगों को अपने गिरोह से जोड़ा. 20 दिसंबर को पूरी प्लानिंग के साथ पुलिस पर गोलियां बरसाई. पुलिस ने मंगलवार को अनीस गिरफ्तार कर लिया था, जिसको बुधवार को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा गया. पुलिस गोली चलाने वाले 20 हजार के इनामी नईम की तलाश में लग गई है.


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