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उसके नाम में हाजी जुड़ा था लेकिन मकसद कुछ और ही था.. बारूद के कनेक्शन में एक और खुलासा


कुतुबुद्दीन के नाम में तो हाजी जुड़ा था लेकिन उसके कारनामे कुछ अलग ही थी. हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के अंवरवा सोफीगंज के बैरागीपट्टी मस्जिद में विस्फोट के बारे में. खबर के मुताबिक़, मस्जिद में जो विस्फोट हुआ था उस  विस्फोट की जड़ में गांव के हाजी कुतुबुद्दीन का परिवार था. शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि दहशत फैलाकर वह गांव में नेता बनना चाहता था. मस्जिद में विस्फोटक क्यों रखा गया, इसके पीछे का मकसद क्या था, इस बात की जांच की जा रही है.

एसपी विनोद कुमार मिश्र ने बुधवार को कहीं तुर्कपट्टी थाना परिसर में संवाददाताओं से मुखातिब होते हुए अब तक की जांच का ब्यौरा देते हुए बताया कि सोमवार को मस्जिद में विस्फोट की घटना इत्तफाक नहीं थी बल्कि सोची समझी रणनीति के तहत विस्फोटक रखा गया था. धमाके की सूचना पर पहुंची पुलिस को पता चला कि बैटरी फटने से मस्जिद की खिड़की व दरवाजे के शीशे टूट गए हैं. उन्होंने बताया कि वह खुद भी फोरेंसिक टीम व डॉग स्क्वॉड के साथ पहुंचे.

उन्होंने कहा कि इस घटना पर मौलवी से पूछा गया तो वह कुछ बता नहीं पाए. छानबीन में पाया गया कि सीलिंग फैन से लटकाया गया पदार्थ विस्फोट कर गया था. उसकी मात्रा और प्रकृति के बारे में जानने के लिए टीम जांच कर रही है. एसपी ने बताया कि सघन पूछताछ में मौलवी ने बताया कि गांव के हाजी कुतुबुद्दीन अंसारी ने इसे अप्रैल 2019 में मस्जिद के स्टोर में रखवाया था. हाजी ने तब इसे मरम्मत का सामान बताया था.

एसपी का कहना है कि उन्हें मौलवी की यह बात समझ में नहीं आ रही है कि अगर ह्वाइट सीमेंट था तो मौलवी ने खोलकर देखा क्यों नहीं? इसकी जांच-पड़ताल की जा रही है. उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इसमें हाजी कुतुबुद्दीन अंसारी व उनके परिवार के कुछ लोगों की मंशा गांव में दहशत फैलाने की थी, जिससे आपस में तनाव पैदा हो और वह नेता साबित हो जाए. एसपी ने बताया कि देशद्रोही गतिविधियां या बाहरी लिंक पर उससे पूछताछ की जा रही है.


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