सावरकर के बाद अब स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अपमान.. करने वाले वही जो लेनिन के लिए मचा दिए थे कोहराम. नारे लिखे गये थे उर्दू में


ये वही सोच है जो कुछ समय पहले लेनिन के लिए उन्माद फैला दी थी.. इसमें से कुछ उस फोटो के भी समर्थक थे जो जिन्ना की अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी में लगाई गई थी.. उस समय पाकिस्तान के जन्मदाता की फोटो लगाने का समर्थन करने वालों ने अब बेहद घृणित रूप दिखाया है और अपमानित किया है संसार को सत्य और धर्म की राह दिखाने वाले स्वामी विवेकानंद जी को.. ये वही थे जो कुछ समय पहले वीर सावरकर जी की प्रतिमा को अपमानित कर के कई नेताओं के दुलारे भी बन गये थे..

फिर भी इनकी इच्छा है की उनको देशभक्त कहा जाय और उन्हें भारत का शुभचिंतक माना जाय.. फ़िलहाल एक बार फिर से JNU में हिन्दू और भगवा से नफरत देखने को मिली है.. जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन पर उनके ही नाम से देश की राजधानी में स्थापित विश्वविद्यालय के छात्रों ने जो कृत्य किया, वह बेहद शर्मनाक है। पिछले तीन दिनों से फीस में बढ़ोत्तरी को लेकर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में चल रहे विरोध प्रदर्शन का आज एक वीभत्स चेहरा सामने आया।

कभी अपने उन्मादी नारों के लिए चर्चा में रह चुके JNU के प्रशासनिक भवन पर कब्जा जमाए बैठे छात्र संगठन के लोगों ने वहां स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को न केवल खंडित कर दिया बल्कि उसके आसपास लाल स्याही से बहुत ही भद्दे और निंदनीय नारे भी लिखे जो उनकी माओवादी-नक्सलवादी-अलगाववादी मानसिकता को दर्शाते हैं। जल्द ही इस प्रतिमा का अनावरण होने वाला था। जेएनयू की नियमावली के तहत जांच होगी .. यहाँ ये ख़ास बात है कि बहुत से नारे उर्दू में लिखे गए हैं।


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