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मोदी सरकार ने कसे खालिस्तानी चरमपंथियों के पेंच. खालिस्तान लिबरेशन फ़ोर्स हुई बैन

किसी भी प्रकार के चरमपंथ को किसी भी हाल में स्वीकार न करने के लिए आख़िरकार नरेंद्र मोदी सरकार ने मन बना ही लिया है . जहाँ NIA ने ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए इस्लामिक आतंकवाद समूह के ISIS से जुड़े 10 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है तो वहीँ खालिस्तान के नाम पर देश में उन्माद फैलाने की कोशिश करने वाले और देश विरोधी कार्यों में संलिप्त एक खालिस्तानी समूह को बैन कर दिया गया है .

ज्ञात हो कि पिछले काफी समय से आतंकी व उन्मादी हरकतों में शामिल होने और हिंसा फैलाने के आरोप में सरकार ने चरमपंथी समूह खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) पर प्रतिबंध लगा दिया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने यूएपीए (Unlawful Activities (Prevention) Act) के अंतर्गत इस संगठन पर बैन लगाया है। केएलएफ नाम का ये समूह पिछले कई वर्षों से भारत के अभिन्न अंग और गुरुओं की पावन भूमि पंजाब को भारत से अलग कर देने की मांग करता जा रहा था .

इतना ही नहीं इस चरमपंथी समूह ने इसके लिए 2020 में एक रेफरेंडम की भी योजना बनाई गई है। पिछले कुछ महीनों में कई केएलएफ के कई संदिग्ध अलगाववादियों को भारतीय एजेंसियों ने हिरासत में लिया है। गृह मंत्रालय के अपने आदेश में बुधवार को खालिस्तान लिबरेशन फोर्स और उसकी सभी गतिविधियां को गैरकानूनी घोषित करते हुए यूएपीए प्रतिबंध लगाया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि इस कानून के तहत प्रतिबंधित होने वाला यह अब तक का 40वां संगठन होगा।

 

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