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फिर सामने आया पीएम मोदी का सन्यासी वाला अवतार.. स्वामी विवेकानंद जी के बेलूर मठ में रात्रि बिताने के बाद कही ये बात


कोलकाता स्थिति स्वामी विवेकानंद जी की तपस्थली बेलूर मठ के साथ प्रधानमंत्री मोदी का संबंध किसी से छिपा नहीं है. ये बात भी सभी जानते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री शुरुआत में सन्यासी बनना चाहते थे लेकिन ऐसा हो नहीं सका. इसका कनेक्शन भी बेलूर मठ के साथ ही जुड़ा हुआ है. अध्यात्म के प्रति पीएम मोदी की क्या सोच है, ये समय-समय र जाहिर होता भी रहता है. यही कारण है कि विख्यात योगगुरु स्वामी रामदेव जी पीएम  मोदी को राष्ट्रऋषि भी कहते हैं.

पीएम मोदी का सन्यास तथा अध्यात्म से प्यार उस समय एक बार पुनः सामने आया जब वह कोलकाता पहुंचे. पीएम मोदी ने कोलकाता के बेलूर मठ में रात्रि विश्राम किया तथा सुबह ध्यान भी किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बेलूर मठ को एक तीर्थस्थल बताते हुए कहा कि हावड़ा जिले में स्थित रामकृष्ण मिशन के वैश्विक मुख्यालय की यात्रा करना उनके लिए ‘घर आने’ जैसा है. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि मठ में एक रात बिताने का अवसर देने के लिए वह इसके व्यवस्थापकों के आभारी हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि यह स्थान(बेलूर मत्थ) किसी तीर्थस्थल से कम नहीं है. मेरे लिए, यह घर आने जैसा है. मैं सौभाग्यशाली हूं कि रामकृष्ण मठ एवं मिशन के अध्यक्ष ने मुझे यहां रात बिताने की अनुमति दी. उन्होंने कहा कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के मुताबिक मुझे हर जगह जाने की इजाजत नहीं दी गयी. मैं यहां रात बिताने की अनुमति देने के लिए (राज्य) सरकार का आभारी हूं. सफेद कुर्ता और धोती तथा गले में उतरिया पहने मोदी ने राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए यह बात कही. मठ अधिकारियों ने स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाने के उपलक्ष्य में इस कार्यक्रम का आयोजन किया था.

प्रधानमंत्री ने कहा कि बेलूर मठ के माहौल ने उन्हें लोगों के प्रति अपने कर्तव्य की याद दिलायी. उन्होंने मठ परिसर में मौजूद स्कूली छात्रों के समूह से कहा, ‘इस भूमि में, यहां की हवा में स्‍वामी राम कृष्‍ण परमहंस, मां शारदा देवी, स्‍वामी ब्रह्मानंद, स्‍वामी विवेकानंद सहित तमाम गुरुओं का सान्निध्य हर किसी को अनुभव हो रहा है. जब भी यहां बेलूर मठ आता हूं तो अतीत के वो पृष्‍ठ खुल जाते हैं जिनके कारण आज मैं यहां हूं और 130 करोड़ भारतवासियों की सेवा में कुछ कर्तव्‍य निभा पा रहा हूं.’

मिशन के पूर्व अध्यक्ष एवं उनके आध्यात्मिक गुरु स्वामी आत्मास्थानंद का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी शिक्षाओं ने सोचने का दायरा व्यापक किया और रास्ते दिखाये. उन्होंने स्वामी आत्मस्थानंद के साथ अपने वक्त को याद किया और कहा कि संत के शब्दों ने उनके जीवन का नजरिया बदल दिया. प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली बार मैं यहां से स्वामी आत्मास्थानंद के आशीर्वाद के साथ लौटा था. वह ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने मुझे सिखाया कि जनसेवा प्रभु की सेवा करने का एकमात्र रास्ता है.

आज वो शारीरिक रूप से हमारे बीच विद्यमान नहीं हैं. लेकिन उनका काम, उनका दिखाया मार्ग, रामकृष्ण मिशन के रूप में सदा-सर्वदा हमारा मार्ग प्रशस्त करता रहेगा. मोदी 2013 के अपने कोलकाता दौरे के दौरान स्वामी आत्मस्थानंद से मिले थे और उनसे आशीर्वाद लिया था. दो साल बाद उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान (अस्पताल) में बीमार संत से मुलाकात की थी और उनकी सेहत की जानकारी ली थी. 2017 में स्वामी आत्मस्थानंद के निधन के बाद प्रधानमंत्री ने इसे ‘व्यक्तिगत नुकसान’ बताया था.

रामकृष्ण मठ एवं मिशन के महासचिव स्वामी सुविरानंद ने कहा कि मोदी मठ में रात बिताने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं. उन्होंने कहा, ‘सच में हमारे लिए भी यह अपने बेटे का उसके घर में स्वागत करने जैसा है. कोई भी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति अब तक यहां नहीं ठहरे थे. मोदी जी पहली बार यहाँ पर रुके हैं. इसका अनुभव हमारे लिए बिल्कुल वैसा ही था जैसे कोई बेटा अपने घर आया हो.


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