Pariksha Pe Charcha : मोदी सर ने ली छात्रों की क्लास.. परिक्षा के दवाब से निपटने को दिए गुरुमंत्र


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में जुटे देश के छात्रों के साथ “परिक्षा पे चर्चा” की. इस दौरान पीएम मोदी ने न सिर्फ छात्रों बल्कि उनके अभिभावकों को भी परिक्षा के तनाव से निपटने के टिप्स दिए. पीएम मोदी तथा छात्रों के बीच दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ये Pariksha Pe Charcha हुई. बच्चों के लिए पीएम मोदी के कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ का ये तीसरा साल रहा. 2018 में पहली बार इसकी शुरुआत की गई थी। बोर्ड परीक्षाओं से पहले प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम का उद्देश्य है छात्र-छात्राओं को परीक्षा के तनाव से दूर करना और उन्हें सफलता के मायने समझाना. कार्यक्रम के अंत में पीएम मोदी बच्चों से मिले और उन्हें ऑटोग्राफ भी दिए.

मंच पर आते ही पीएम मोदी ने कहा- नमस्ते, एक बार फिर से आपका दोस्त आपके बीच है. उन्होंने कहा कि 2020 के शुरू होते ही नया दशक शुरू हो रहा है. ये दशक देश और आपके दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. पीएम मोदी ने कहा कि अभिभावकों का ही काम मैं भी करता हूं. लेकिन अलग तरीके से करता हूं. एक मददगार बनकर, दोस्त, साथी बनकर. इसलिए मैं शायद आपको बोझ नहीं लगता हूं. बातचीत शुरू करेंगे हैशटैग विदाउट फिल्टर जैसे आप दोस्तों से बात करते हैं वैसे ही करें, जो भी सवाल हो आप बिना झिझक के पूंछें.

इसके बाद छात्रों ने पीएम मोदी से सवाल पूंछे तथा पीएम मोदी ने अपने ही तरीके से उसका जवाब भी दिया है. ऐसे ही पीएम मोदी ने राजस्थान की छात्रा यशश्री के एक सवाल का जवाब देते हुए चंद्रयान 2 का जिक्र किया तथा बेहद ही अनोखे तरीके से दवाब से निपटने का गुरुमंत्र दिया-
सवाल- बिना तनाव और घबराहट के परीक्षा का सामना कैसे करें? कई बार मूड ऑफ हो जाता है.
मोदी सर का जवाब- ‘नौजवानों का मूड ऑफ कभी नहीं होना चाहिए. लेकिन कभी-कभी हमारे सोचने का तरीका परेशानी का सबब बन जाता है. अपनी अपेक्षा को अपने साथ इतना न जोड़ दें, कि उसके पूरा न होने से हमारा मूड ऑफ हो जाए. मोटिवेशन और डिमोटिवेशन… ये ऐसी चीजें हैं जिससे हर किसी को गुजरना पड़ता है. बार-बार गुजरना पड़ता है. जैसे- चंद्रयान. चंद्रयान के लॉन्चिंग के दिन आप सब रात को जाग रहे थे, आपका चंद्रयान को भेजने में कोई योगदान नहीं था, वैज्ञानिकों ने मन लगाकर काम किया, जब चंद्रयान सफल नहीं हुआ तो आप सबके साथ पूरा देश डिमोटिवेट हो गया था. कभी-कभी विफलता हमको ऐसा कर देती है. उन्होंने कहा, ‘उस दिन मैं भी वहां मौजूद था. कई लोग कह रहे थे कि मोदी को इस कार्यक्रम में नहीं जाना चाहिए था, कुछ लोग कह रहे थे कि आप जाएंगे और फेल हो गया तो क्या करोगे, मैंने कहा था इसीलिए मुझे जाना चाहिए और जब आखिर कुछ मिनट थे मैं देख रहा था वैज्ञानिकों के चहरों पर बदलाव दिख रहा है, तनाव दिख रहा है, मुझे लग रहा था कि कुछ अनहोनी हो रही है, फिर थोड़ी देर में आकर मुझे बताया, मैंने कहा कि ठीक है कि आप ट्राई करिए फिर 10 मिनट बाद बताया नहीं हो रहा है. फिर मैंने चक्कर लगाया, रात को करीब 3 बजे मैं अपने होटल पर गया. मैं चैन से बैठ नहीं पाया.
पीएम बोले, ‘सोने का मन नहीं कर रहा था. हमारी पीएमओ की टीम अपने कमरे में चली गई थी. आधा-पौन घंटा ऐसे ही बिताया चक्कर काट रहा था, मैंने फिर सबको बुलाया. मैंने कहा कि देखिए सुबह हमको जाना है, सुबह हम जल्दी नहीं जाएंगे, देर से जाएंगे. ये वैज्ञानिक सुबह 7 से 7.30 एकत्र हो सकते हैं क्या? उनसे पूछिए.’ उन्होंने कहा कि अगर मैं चला भी जाता तो देश में कोई नोटिस भी नहीं करता लेकिन मैं खुद को समझा नहीं पा रहा था. उन्होंने कहा, ‘मैंने वैज्ञानिकों को इकट्ठा किया, मैंने अपनी बात कही, उनके परिश्रम को सराहा. एक पूरा माहौल बदल गया, पूरे देश का माहौल बदल गया. बाद में क्या हुआ आपने टीवी पर देखा है. हम विफलताओं में भी सफलता की शिक्षा पा सकते हैं. हर प्रयास में हम उत्साह भर सकते हैं और किसी चीज में आप विफल हो गए, इसका मतलब ये है कि आप सफलता की ओर चल पड़े हैं. अगर वहीं रुक गए फिर तो कितनी भी ट्रैक्टर लगा दो, आप नहीं निकल सकते हो.’
इसके बाद पीएम मोदी से कई सवाल किये गए तथा पीएम मोदी अपने अनोखे अंदाज में छात्रों की समस्याओं का समाधान करते गए. आज जिस तरह से पीएम मोदी ने छात्रों के साथ वार्तालाप किया, उस दौरान पीएम मोदी मोटिवेशनल गुरु के रूप में नजर आये. आज के पीएम मोदी के गुरुमंत्र सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि देश के हर व्यक्ति को प्रेरित करने वाले थे. एक छात्र के सवाल कि क्या परीक्षा का अंक ही सबकुछ है, इसपर पीएम ने कहा, ‘कोई परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है बल्कि एक पड़ाव है. हमें इसे पूरे जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव मानना चाहिए. मां-बाप से मैं प्रार्थन करना चाहता हूं कि ये नहीं तो कुछ नहीं का मूड नहीं बनाना चाहिए. कुछ न हुआ तो जैसे दुनिया लुट गई, ये सोच आज के युग में उपयुक्त नहीं है. जीवन के किसी भी क्षेत्र में जा सकते हैं.
पीएम ने कहा कि उन्होंने कहा कि वह कई साल तक सीएम रहे, फिर लोगों उन्हे पीएम बना दिया. इस कारण कई जगह जाना होता है. कुछ जानने को मिलता है, कुछ सीखने को मिलता है. हर का अपने महत्व होता है. लेकिन अगर कोई मुझे कहे कि इतने कार्यक्रमों के बीच परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम मेरे दिल के करीब है और दिल को छूने वाला है. पीएम ने छात्रों को 2020 के दशक की अहमियत समझाई. उन्होंने कहा कि यह दशक हिंदुस्तान के लिए बहुत अहम है. इस दशक में देश जो भी करेगा, उसमें 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों का सबसे ज्यादा योगदान होगा. मोदी ने कहा कि यह दशक नई ऊंचाइयों को पाने वाला बने, यह सबसे ज्यादा इस पीढ़ी पर निर्भर करता है.
पीएम मोदी ने कहा कि यह वह दौर है, जब माता-पिता बच्चों पर ऐक्स्ट्रा ऐक्टिविटी के लिए भी दबाव डालने लगे हैं. मां-बाप का भी काम है कि यह देखें कि वह बच्चों की रुचि देखें और उसके मुताबिक उन्हें अवसर दें. बच्चों की ऐक्स्ट्रा ऐक्टिविटी को भी कहीं न कहीं बांधना चाहिए, तभी बच्चे अपनी क्षमता का सही आकलन कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि यदि आप स्कूली जीवन में विविधताओं के साथ आगे बढ़ते हैं तो फिर आपके जीवन में निराशा नहीं रहती. नई तकनीक को सीखने के लिए छात्रों को प्रेरित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हम सिर्फ इसका ज्ञान ही नहीं होना चाहिए बल्कि उसकी उपयोग अपने हित के लिए करना सीखना चाहिए. ऐसा देखा जा रहा है कि बहुत से लोगों का समय तकनीक चुरा लेती है. यह सोचिए कि आखिर स्मार्टफोन कितना समय चोरी कर लेता है. तकनीक को जीवन में साथी के तौर पर जोड़ें, लेकिन उसे जिंदगी का हिस्सा न बनने दें.
पीएम मोदी ने कहा कि आज की पीढ़ी घर से ही गूगल से बात करके ये जान लेती है कि उसकी ट्रेन समय पर है या नहीं. नई पीढ़ी वो है जो किसी और से पूछने के बजाए, तकनीक की मदद से जानकारी जुटा लेती है.इसका मतलब कि उसे तकनीक का उपयोग क्या होना चाहिए, ये पता लग गया. पीएम मोदी ने कहा कि ‘स्मार्ट फोन जितना समय आपका समय चोरी करता है, उसमें से 10 प्रतिशत कम करके आप अपने मां, बाप, दादा, दादी के साथ बिताएं. तकनीक हमें खींचकर ले जाए, उससे हमें बचकर रहना चाहिए. हमारे अंदर ये भावना होनी चाहिए कि मैं तकनीक को अपनी मर्जी से उपयोग करूंगा.
पीएम ने कहा कि हमने डर के कारण आगे पैर नहीं रखे, इससे बुरी कोई अवस्था नहीं हो सकती. हमारी मनोस्थिति ऐसी होनी चाहिए कि हम किसी भी हालत में डगर आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे, ये मिजाज तो हर विद्यार्थी का होना चाहिए. पीएम ने कहा कि कुछ करने के सपने हम पालेंगे तो जो भी करेंगे उसे अच्छा करने का मन करेगा. जीवन को कुछ बनने के सपने से जोड़ने के बजाय कुछ करने के सपने से जोड़ना चाहिए. अगर आप ऐसा करेंगे तो कभी आपको एग्जाम का दबाव नहीं होगा.
पीएम ने कहा कि विद्यार्थी कोई कालखंड के लिए नहीं होता. हमें जीवन भर अपने भीतर के विद्यार्थी को जीवित रखना चाहिए. जिंदगी जीने का यही उत्तम मार्ग है, नया-नया सीखना, नया-नया जानना. पीएम ने कहा कि ‘अगर आप बोझ लेकर परीक्षा हॉल में गए हैं तो सारे प्रयोग बेकार जाते हैं. आपको आत्म विश्वास लेकर जाना है.  परीक्षा को कभी जिंदगी में बोझ नहीं बनने देना है. आत्मविश्वास बहुत बड़ी चीज है. साथ ही फोकस एक्टिविटी होनी जरूरी है.
पीएम ने कहा कि अगर हम प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर जीवन जिएंगे, तो प्रकृति स्वयं आपको आगे ले जाने में सहायता करेगी. इसीलिए समय और परिस्थिति की पसंद में हमें, प्रकृति के अनुकूल समय खोजना चाहिए. पीएम ने कहा कि ‘संभव है कि सुबह उठकर आप पढ़ते हैं तो मन और दिमाग से पूरी तरह तंदुरुस्त होते होंगे. लेकिन हर किसी की अपनी विशेषता होती है, इसलिए आप सुबह या शाम जिस समय comfortable हों, उसी समय में पढ़ाई करो.
पीएम ने कहा कि ‘हमारा दिनभर के कामों, थकावट, में दिन बीतता है तो दिमाग कुछ engage रहता है. क्या उस वक्त आपका दिमाग खाली होगा क्या? दिन भर की घटनाओं का एक्शन-रिएक्शन भी चलता होगा. पीएम ने कहा कि ‘जितना ज्यादा आप बच्चे को प्रोत्साहित करोगे, उतना परिणाम ज्यादा मिलेगा और जितना दबाव डालोगे उतना ज्यादा समस्याओं को बल मिलेगा. अब ये मां-बाप और अध्यापकों को तय करना है कि उन्हें क्या चुनना है.
पीएम ने कहा कि मां-बाप को मैं कहूंगा कि बच्चे बड़े हो गए हैं ये स्वीकार करें, लेकिन जब बच्चें 2-3 साल के थे और तब आपके अंदर उनको मदद करने की जो भावना थी उसे हमेशा जिंदा रखिए. बच्चों को उनकी रुचि के सही रास्ते में आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करना चाहिए पीएम ने कहा कि मैं किसी परिजन पर कोई दवाब नहीं डालना चाहता, और न किसी बच्चे को बिगाड़ना चाहता हूं. जैसे स्टील के स्प्रिंग को ज्यादा खींचने पर वो तार बन जाता है, उसी तरह मां-बाप, अध्यापकों को भी सोचना चाहिए कि बच्चे कि क्षमता कितनी है.
पीएम ने कहा कि क्या हम तय कर सकते हैं कि 2022 में जब आजादी के 75 वर्ष होंगे तो मैं और मेरा परिवार जो भी खरीदेंगे वो Make In India ही खरीदेंगे. मुझे बताइये ये कर्त्तव्य होगा या नहीं, इससे देश का भला होगा और देश की economy को ताकत मिलेगी. पीएम ने कहा कि अधिकार और कर्त्तव्य जब साथ साथ बोले जाते हैं, तभी सब गड़बड़ हो जाता हैं, जबकि हमारे कर्त्तव्य में ही सबके अधिकार समाहित हैं. जब मैं एक अध्यापक के रूप में अपना कर्त्तव्य निभाता हूं, तो उससे विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा होती है.
पीएम ने कहा कि इस देश में अरुणाचल ऐसा प्रदेश है जहां एक दूसरे से मिलने पर जय-हिंद बोला जाता है.  ये हिंदुस्तान में बहुत कम जगह होता है. वहां के लोगों ने अपनी भाषा के प्रचार के साथ हिंदी और अंग्रेजी पर भी अच्छी पकड़ बनाई है. हम सभी को नॉर्थ ईस्ट जरूर जाना चाहिए. पीएम मोदी ने कहा कि पिछली शताब्दी के आखरी कालखंड और इस शताब्दी के आरंभ कालखंड में विज्ञान और तकनीक ने जीवन को बदल दिया है. इसलिए तकनीक का भय कतई अपने जीवन में आने नहीं देना चाहिए. तकनीक को हम अपना दोस्त माने, बदलती तकनीक की हम पहले से जानकारी जुटाएं, ये जरूरी है.
पीएम मोदी ने कहा कि हमें जो शिक्षा मिलती है, वह दुनिया का द्वार है. वर्णमाला सीखते समय, बच्चे एक नई दुनिया में प्रवेश करते हैं. हमारी शिक्षा हमारे लिए नई चीजों को सीखने का एक तरीका है. हमें इसे दिनचर्या के मूल में रखने और उसके  बारे में और जानने की जरूरत है. पीएम ने कहा कि सिर्फ परीक्षा के अंक जिंदगी नहीं हैं. कोई एक परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है. ये एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. लेकिन यही सब कुछ है, ऐसा नहीं मानना चाहिए. मैं माता-पिता से भी आग्रह करूंगा कि बच्चों से ऐसी बातें न करें कि परीक्षा ही सब कुछ है.

सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share