संविधान की शपथ में “अल्लाह हु अकबर” कैसे ? संविधान बड़ा या अल्लाह ?- ओवैसी के विधायक की चरमपंथी हरकत पर सुरेश चव्हाणके जी का ब्लॉग


संविधान की शपथ में “अल्ला हु अकबर” कैसे ? संविधान बड़ा या अल्लाह / किसी का निजी भगवान ?

महाराष्ट्र विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ. उसमें ओवैसी की पार्टी के धुले से निर्वाचित एक मुस्लिम विधायक फारुख शाह ने विधानसभा में जो शपथ ली उस पर मेरी 4 कठोर आपत्तियाँ हैं.

पहले तो उन्होंने अल्लाह के नाम पर शपथ ली. मुझे याद हैं, जम्मू कश्मीर की विधानसभा में भाजपा के विधायक रविंद्र रैना ने जैसे ही अपनी शपथ में माता वैष्णो देवी जी का नाम लिया तो उन्हें पीठासीन सभापति ने तत्काल रोक दिया. सभागार में मौजूद विरोधी सदस्यों ने भी नीचे हंगामा करना शुरू कर दिया ..विधानसभा के सचिवालय स्टाफ़ ने भी तुरंत नियमवाली बताना शुरू कर दिया कि आप ईश्वर, गॉड या संविधान के नाम पर ही शपथ ले सकते हैं. विधायक रैना जी ने कहा कि जब मुस्लिम सदस्य अल्लाह के नाम पर शपथ ले सकते हैं तो हमें भगवान के नाम पर शपथ लेने से कैसे रोका जा सकता हैं ? उन्होने आग्रह का भरपूर प्रयास किया परंतु शायद किसी ने भी उनका साथ नही दिया, यहाँ तक कि उनकी खुद की पार्टी के विधायकों ने भी नहीं.

मेरी दूसरी आपत्ति ये है कि फारुख शाह ने शपथ के साथ भरी विधानसभा में “अल्लाह हु अकबर” का नारा लगाया. इसका अर्थ होता है “अल्लाह ही सर्वश्रेष्ठ है”. मुस्लिम एकेश्वरवादी हैं और बच्चे के जन्म से लेकर आतंकवादियो द्वारा बम फोड़ते समय यही नारा लगाते हैं. सोशल मीडिया पर ऐसी हजारों वीडियो हैं जब गर्दने रेतते हुए यही नारा लगाया गया है. ग़ैर मुस्लिमों को आतंकी हमले में लगे ये नारे पता होते हैं, उनके लिए यह निजी आस्था हो सकती हैं. संविधान भारतीय नागरिक को उसकी निजी आस्था की पूरी स्वतंत्रता देता है, लेकिन वह अपने घर व् व्यक्तिगत स्वतंत्रता तक ही सीमित है. घर के अंदर की स्वतंत्रता विधानसभा में उसी संविधान पर आक्रमण कैसे कर सकती हैं ? जिस विधानसभा में यह शपथ हुई, वो संविधान की रक्षा के लिए है. इसीलिए वहाँ संविधान की शपथ ली जाती है, परंतु वहाँ कोई निर्वाचित सदस्य अगर संविधान से बड़ा अपने निजी भगवान को मानता हो तो वह संविधान की रक्षा कैसे करेगा ? परंतु ऐसा हुआ.

मेरी तीसरी आपत्ति विधानसभा के सभापति, स्टाफ़ और विधायकों पर हैं जो ये सब अपनी खुली आँखों और खामोश जुबान से तमाशे की तरह देख रहे थे. हैरानी की बात ये है कि उनमे से किसी एक के भी कान पर जूँ तक नही रेंगी. इसमें अकेले ओवैसी भर की पार्टी के विधायक नही थे, इसमें सेक्युलर कोंग्रेस थी जिनसे अपेक्षा ग़लत ही है. शरद पवार जी की पार्टी के नाम में ही राष्ट्रवादी हैं, परंतु उनके पार्टी ने इस राष्ट्र से बड़ा अल्लाह को बताने वाले की बात का एक बार भी विरोध नही किया. उनके नाम में कोंग्रेस हैं, शायद उसका असर रहा होगा. वहाँ हिन्दू हृदय सम्राट स्वर्गीय बाला साहब ठाकरे जी की पार्टी शिवसेना के 56 विधायक भी थे. उनके मुखिया को मुख्यमंत्री बनाए जाने के चलते वह सत्ताधारी भी थे मतलब पावर में थे, परंतु उन्होंने भी कुछ भी नही बोला. उस समय अगर बाला साहेब ठाकरे जी होते तो ये जरूर कहते कि “क्या विधानसभा में सारे हिजड़े थे ?” उन्ही की पार्टी शिवसेना कोंग्रेस और एनसीपी के साथ जाने के कारण शिवसेना के बजाए सोनिया सेना जैसा व्यवहार कर रही थी. उसी सभागार में भाजपा के भी चुन कर आये हुए विधायक थे, उन्होंने भी किसी भी प्रकार की कोई आपत्ति नही दर्ज की. जिस पार्टी की नींव ही राष्ट्रवाद हैं वह क्यूँ चुप बैठी रही, ये पता नही. या वहां मौजूद किसी को भी अल्लाह हु अकबर का मतलब ही नही पता था ? लाखों लोगों के मत पा कर संविधान से राज्य चलाने और संविधान की रक्षा करने के लिए विधानसभा में आए विधायकों को यह पता ही न होना और ज़्यादा ख़तरनाक है.

मेरी चौथी आपत्ति उस मीडिया से हैं जो बात- 2 पर हिंदू विरोधी व्यवहार करती है. अगर किसी सदस्य ने वहां जय श्री राम के नारे लगाए होते तो उसकी ब्रेकिंग न्यूज़ दिन भर चलती और कई पैनल डिस्कशन हो रहे होते, जबकि किसी के आराध्य की जय बोलने की तुलना “अल्लाह हु अकबर” से की ही नही जा सकती. जय कहने और सर्वश्रेष्ठ कहने में बहुत बड़ा अंतर है. कोई भी मुस्लिम अल्लाह की जय करे तो चलेगा परंतु वह संविधान की शपथ में भी केवल अल्लाह ही सर्वश्रेष्ठ का एलान करेगा तो मैं सवाल हर हाल में उठाऊँगा.

अब उपाय यह हैं कि सदन मेरे द्वारा लिखे इस लेख, मेरे TV शो बिंदास बोल के आधार पर या मेरे द्वारा दर्ज इस पर आपत्ति पर संज्ञान ले कर तत्काल उस विधायक की शपथ पुनः कराए और उसके ऐसा न करने पर सख्त सजा दे. इस बहाने सदन में भी चर्चा हो और सारे दलो के सदस्य सामूहिक रूप से संविधान ही सर्वश्रेष्ठ का नारा लगायें. इसी से शुरू हो रही ऐसी ग़लत परम्परा को रोका जना सम्भव हैं. मेरा एसा मनाना है कि हिंदू हृदय सम्राट बाला साहब ठाकरे जी को इससे ज्यादा आनंद आएगा, ना कि सेक्युलर सरकार बनने से.

इसी मुद्दे पर मेरा बिंदास बोल कार्यक्रम देखिए, ज़्यादा विस्तार से

Bindas Bol YouTube Link-

https://www.youtube.com/watch?v=_EZVcbuhQvA

मेरे विचार पढने के लिए https://sureshchavhanke.in पर जाएँ 

जय हिंद.

आपका – सुरेश चव्हाणके 


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