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9 फ़रवरी को महाराष्ट्र गूंजेगा “बंगलादेशी और रोहिंग्या भगाओ” के उद्घोष से. हाथो में होगा भगवा ध्वज और सबसे आगे होंगे राज ठाकरे


बाला साहब ठाकरे के देहांत के बाद जो एक बड़ा शून्य महाराष्ट्र की राजनीति में रह गया था अब उस शून्य की भरपाई होती दिखाई दे रही है. ये शून्य महाराष्ट्र की उस राजनीति में था जो भगवा ध्वज, जय भवानी के उद्घोष के साथ छत्रपति शिवाजी और वीर सावरकार को आगे रखा करता था. सबसे पहले ये उम्मीद उद्धव ठाकरे से लगाईं गई थी जिसको बाला साहब ठाकरे ने शिवसेना की पूरी विरासत सौंप दी थी लेकिन बाद में कांग्रेस के साथ शिवसेना के जाने से इस उम्मीद को रखने वालों को मायूस होना पड़ा था.

अब उस शून्य को भरने का ज़िम्मा लिया है राज ठाकरे ने. सबसे पहले तो अपनी पार्टी का ध्वज भगवा करने के साथ अपने बेटे को भी सक्रिय राजनीति में उतार कर राज ठाकरे ने ये जता दिया कि उनकी राजनीति महाराष्ट्र में व्यापक स्तर और दीर्घकालिक रूप से होने वाली है. इसी के साथ भगवा ध्वज में छत्रपति शिवाजी के एतिहासिक चिन्ह भी उस ध्वज में लगा कर राज ठाकरे ने ये साबित कर दिया कि महाराष्ट्र में अब हिंदुत्व की पारी अकेली भाजपा नही खेल पाएगी.

राज ठाकरे ने एलान किया है कि हम नौ फरवरी को पाकिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए अवैध घुसपैठियों को भगाने के लिए एक विशाल रैली का आयोजन करेंगे.  अपने इस एलान के साथ राज ठाकरे ने अपने चाचा बाल ठाकरे को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए मुस्लिम घुसपैठियों को देश से बाहर करने के लिए हम केंद्र सरकार का समर्थन करेंगे। उन्होंने आगे कहा, मैं कुछ मुद्दों पर राज्य के गृहमंत्री या मुख्यमंत्री से मिलूंगा।


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