राफ़ेल विमान की पूजा पर विवाद अन्य पंथों का हिंदू धर्म के सिद्धांतों से टकराव के चलते है- रॉफेल पर ॐ व हिन्दू पूजा पद्धति पर सवाल उठाने वाले वामपंथियों व बुद्धिजीवियों की कुंठा पर सुरेश चव्हाणके जी का सम्पादकीय

राफ़ेल विमान की पूजा पर विवाद अन्य पंथों का हिंदू धर्म के सिद्धांतों से टकराव के चलते है.इस देश के बहुसंख्यक समाज के दर्शन की वैज्ञानिक खोज और मान्यता के विरुद्ध अन्य धर्मों के अवैज्ञानिक अधूरे दर्शन के कारण यह विवाद है. हमारे यहाँ घटना पर ज़्यादा चर्चा होती है, सिद्धांतो पर नहीं.. इसलिए मैं आज इसके मूल सिद्धांतो पर प्रकाश डालने जा रहा हूँ..

इस्लाम और ईसाईयत दर्शन का सिद्धांत है, सम्पूर्ण प्रकृति के कण कण का मालिक ईश्वर है.. हिंदू दर्शन का सिद्धांत है कि प्रकृति के प्रत्येक कण में ईश्वर है, इसलिए हिंदू प्रकृति के हर एक कण को पूजता है. इसीलिए प्रकृति के जिस रूप का भी उसे स्वागत या धन्यवाद करना है, उसका वह पूजन करता है.. लेकिन इसके ठीक विपरीत ख़ुद को प्रकृति के मालिक का बच्चा बताने वाले हमेशा उस पर अधिकार जताने और बाप की उस संपत्ति के उपभोग की सोचते हैं.. उसके लिए मूर्ति में भी ईश्वर नहीं है, क्योकि उस मूर्ति का मालिक भी ईश्वर है.. परंतु हिंदू उस मूर्ति के अंदर भी ईश्वर को मानता है, इसलिए उसकी पूजा करता है.. यह विवाद हिंदू धर्म और अन्य पंथो के दर्शन में फ़र्क़ के चलते है..परम्परा उनकी भी है, वह उसके सिद्धांतो उसका पालन करते हैं. हमारे सिद्धांतो की परंपराओं का हम पालन करते हैं.. हिंदुस्थान हिंदुओ का है इसलिए उनके मान्यता के अनुरूप कार्य करना सरकार का भी काम है.. सरकार भी एक ईकाई है. उसमें भी ईश्वर रहेगा तो ही वह धर्मानुसार सब का साथ सब का विकास कर पाएगी, अन्यथा अन्य पंथो के सिद्धांतो के अनुसार वह बादशाहत या सत्ता के लिए जनता का शोषण करेगी.. हमारी सोच में राजा या सरकार जनता की सेवा के लिए है, इस लिए जरूरत पड़ने पर राजा ख़ुद को जनता के लिए स्वाहा कर देता है. हँसते – हँसते बलिदान हो जाता है. प्रजा की रक्षा उसका प्रथम कर्तव्य है, उसे पूरा करना मतलब ईश्वर का कार्य करने जैसा है. वह भी मानता है कि जनता में ईश्वर है.. क्या मुस्लिम और ईसाई जनता को ईश्वर मानते हैं ? इसलिए वो बादशाह या सरकार के लिए जनता को बलि दे सकते हैं. उनके लिए तो जनता का मालिक भी ईश्वर है परंतु जनता में ईश्वर नहीं है.. विवाद इस अवधारणा का है. राफ़ेल बस एक घटना है, हिंदू केवल राफ़ेल की ही पूजा नही करता, झोपड़ी हो या महल, पूजा सबकी होनी है. बच्चों की सायकिल हो या महँगी से महँगी आधुनिक लक्जरी गाड़ी, पूजा दोनों की होनी है. हम गाड़ी ख़रीदते है तो भी पूजा इसलिए करते है जिस से हम उसमें जो यात्रा करने वाले है, वह यात्रा सुरक्षित रहे. वह वाहन यात्रा करवा रहा है , यात्रा शुभ व सुरक्षित हो, इसलिए उस वाहन की पूजा की जाती है. पश्चिम भी आज मानने लगा है कि प्रकृति को बचाने के लिए उसके प्रति मालिकाना भाव के बजाए धन्यवाद का भाव लाना ज़रूरी है.. हमारे विद्वान पूर्वजों ने लाखों वर्ष पूर्व ही इसे समझा और हमको समझाया, जिसका हम आज भी पालन कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे.

परंतु हमारे यहाँ धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अकेले हिंदुओ को ही अपनी मान्यताएँ , संस्कार और परम्परा को त्यागने के लिए कहा जाता है. राफ़ेल विमान की पूजा के समय सरकार सेक्युलर रहनी चाहिए, परंतु हज सब्सिडी के समय सरकार इस्लामी बने तो कोई आपत्ति नहीं.. सरकार शंकराचार्य जी को मान्यता नहीं देती परंतु ईसाइयों के पंथ प्रमुख पोप जब भारत में आते है तो लाल क़ालीन से उनका स्वागत करती है. शंकराचार्य जी के देहांत को नज़रंदाज़ करने वाली सरकार पोप की मौत के बाद राष्ट्रीय शोक प्रकट करती है, राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को झुकाती है. आखिर पोप का हिंदुस्थान से क्या सम्बंध ? परंतु इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं, यह भेद – भाव कैसे चलता है ?

आज कल विवादों का एक बड़ा कारण वैज्ञानिक, मानसिक परंपराओं को सामाजिक दृष्टिकोण से देखना है, या हिंदुओ की मान्यताओं को इस्लामिक – ईसाई चश्मे से देखना है..

रॉफेल पूजन विजयादशमी पर ही क्यूँ ? यह भी एक प्रश्न उपस्थित किया गया.. इस प्रश्न का उत्तर विजयादशमी के एक दिन में एक शहर में 700 मर्सिडीज बेंज़ लक्ज़री गाड़ियों को खरीद कर लोगों ने दे दिया है. यह तो हुई शुभ मुहूर्त की बात, परंपराओं को देखा जाय तो हमारे योद्धा विजयदशमी के दिन से राज्य के बाहर युद्ध लड़ने, पराक्रम से राज्य का धर्मपूर्वक विस्तार करने, राक्षसों और दुष्टों का संहार करने निकला करते थे. महाराष्ट्र में तो आज भी विजयदशमी दे दिन सीमा उल्लंघन की परम्परा है, क्योकि हमारे पूर्वज इस दिन अपने सीमाओं के बाहर निकलते थे. आज भले ही हम नहीं जा रहे हों, परंतु परम्परा जारी रखे तो पुनः आवश्यकता पड़ने पर उसका प्रयोग होगा यह मान कर आज भी उसे जारी रखा गया है..पता नहीं कब यही पराक्रम की प्रेरणा बनेगी और बड़े से बड़े दुश्मन को समाप्त करने की शक्ति देगी..

उस ॐ को लिखने पर भी सवाल उठाया गया जो तथाकथित आधुनिक विज्ञान को भी स्वीकार करने को मजबूर करता है. नासा से लेकर खगोल और पृथ्वी के निर्माण की खोज पर कार्य करने वाली संस्थाऐं भी अब यह मानती है की प्रकृति के निर्मिति की ध्वनि ॐ ही है. आज भी इसके स्वर की तरंगो/ फ़्रीक्वेंसी से दूसरे ग्रहों पर रहने वाले प्रतिक्रिया देते है, ऐसा वो मानते हैं. ॐ की तरंगो से आज भी मनुष्य के चेतना की जागृति होती है.. Electromagnatic तरंगों की गणना में आज भी ॐ ध्वनि को सकारात्मक माना जाता है.. आपका पंथ इसकी खोज नहीं कर पाया तो ये आप की कमी है, परंतु आप हमारी उच्च वैज्ञानिक खोज को अपने अज्ञान से कैसे नकार सकते हैं ?

नारियल को हमारे यहां श्रीफल कहा जाता है. खाद्य विज्ञान भी इसे पूर्ण अन्न की मान्यता देता है. इसके प्रत्येक हिस्से का मनुष्य के लिए उपयोग होता है, यह इसकी उपयोगिता है.. यह बाहर से कठोर परंतु अंदर से मुलायम हो कर कठिन कार्य का आनंदित परिणाम मिलने का सकारात्मक मानसिक संदेश देता है. इसके अंदर के जाल का औषधीय उपयोग है, इसलिए हिंदू दर्शन में इस फल को सारे शुभ कार्य में एक दूसरे को दिया जाता है. पशुओं की बलि देने वाले जब नारियल फोड़ने पर आपत्ति उठाते है तो स्वाभाविक रूप से हँसी आ जाती है.

राफ़ेल की पूजा में नींबू के प्रयोग को ले कर भी मज़ाक़ उड़ाया गया. उसे जैसे किसी शस्त्र के रूप में प्रस्तुत किया गया, हम भी उसे कोई शस्त्र नहीं मानते. नींबू केवल नकारात्मक शक्ति को रोकने का साधन माना जाता है, नींबू के अंदर के औषधीय गुणों को पश्चिम भी स्वीकारा जाता है.. नकारात्मक शक्ति को राफ़ेल बनाने वाला फ़्रान्स ही नहीं बल्कि पूरा पश्चिम जगत भी मानता है.. वहाँ सप्त तरांकित होटलों में भी तेरहवी मंज़िल नहीं होती. किसी भी फ़्लोर पर तेरा नम्बर का कमरा नहीं होता.. फ़र्क़ इतना है कि वो नकारात्मकता के आगे झुककर उसे टालते हैं, हम उसका सकारात्मक समाधान करते हैं. यह हमारी प्रकृति के अंदर है कि हमने प्रत्येक फल, पेड़ पौधे और फूल को ईश्वर के किसी ना किसी तत्व के साथ जोड़ है, जिससे उसकी प्रकृति में स्वीकार्यता बनी रहे. नींबू खट्टा है इसलिए इस पौधे का क्या काम ? यह कह कर उसे नकारना नहीं है.

इस विवाद का वास्तविक उत्तर अगर सरकार और समाज दे तो वह ये है कि – “रक्षा मंत्री हिंदू हैं सिर्फ़ इसीलिए राफ़ेल विमान की पूजा नहीं की, बल्कि यह हिंदुराष्ट्र है इसलिए भी की.. सारे विवाद स्वतः समाप्त..

आपका – सुरेश चव्हाणके

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