दुर्दांत आतंकी याकूब मेमन को बचाने की पैरवी कर मुंबई सहित पूरे देश को डराया था नसीरुद्दीन शाह ने… आज उस नसीरुद्दीन को लग रहा है डर ?

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री बॉलीवुड के अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को हिंदुस्तान में डर लगने लगा है. नसीरुद्दीन शाह का मानना है कि देश में असहिष्णुता, नफरत बढ़ गई है. नसीरुद्दीन शाह का मानना है कि देश में इन्सान सी जान से ज्यादा गाय को तवज्जो दी जाने लगी है. नसीरुद्दीन को ये भी लगता है कि कल को भीड़ उनके बच्चों को घेरकर पून्छेगी कि तुम हिंदू हो या मुसलमान? तो उनके पास इसका कोई जवाब नहीं होगा. नसीरुद्दीन को डर है कि बुलंदशहर में जिस तरह गोकशी के बाद हिंसा हुई तथा इसमें इंस्पेक्टर सुबोध की जान गई, उसी तरह उनके या उनके बच्चों के साथ भी हो सकता है.

नसीरुद्दीन शाह का ये बयान जितना अफसोसजनक है, उससे ज्यादा शर्मनाक भी है कि उसको उस हिंदुस्तान में डर लगता है जो हिंदुस्तान हिन्दू बाहुल्य है और हिन्दू बाहुल्य हिंदुस्तान में नसीरुद्दीन शाह फिल्मों के माध्यम के एक सुपरस्टार बन जाता है. नसीरुद्दीन शाह हिंदुस्तान में दौलत भी कमाता है, शोहरत भी कमाता है फिर अचानक उसको याद आता है कि भीड़ उसको बच्चों को घेरकर हमला कर सकती है और वह डर जाता है. अगर ये भीड़ नसीरुद्दीन शाह को डराती तो उसकी फिल्मों पर अपनी मेहनत से कमाया गया पैसा नहीं फूंकती. लेकिन ये तो नसीरुद्दीन शाह है और अब उसको हिंदुस्तान में डर लगने लगा है.

आश्चर्य इस बात का भी है कि नसीरुद्दीन शाह बुलंदशहर की हिंसा से तो डर गया लेकिन इस नसीरुद्दीन शाह ने जब दुर्दांत आतंकी याकूब मेमन की को बचाने के लिए पैरवी की थी तब इसने नहीं सोचा था कि उसके इस कदम से न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरा देश डर रहा था कि अगर याकूब बच गया तो पता नहीं वह कब और कहाँ-2 आतंकी हमले करेगा और हिन्दुस्तानियों की जान लेगा. नसीरुद्दीन शाह अपने बच्चों की फ़िक्र करते हुए हिंदुस्तान में डरता है लेकिन वह उस आतंकी को बचाने की नापाक कोशिश करता है जिसके हाथ भारतमाता को लहूलुहान करते हुए खून से रंगे हुए थे. जब मुंबई में बम धमाके हो रहे थे, लोगों की जान जा रही थी तब नसीरुद्दीन को डर नहीं लगा बल्कि उसने आतंकी याकूब को बचाने की भी कोशिश की.

याकूब की दया याचिका पर साइन करते समय नसीरुद्दीन ने ये नहीं सोचा कि वह न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे देश को डरा रहा है. डर तो नसीरुद्दीन को याकूब को बचाने को लगाई गयी याचिका पर साइन करते समय लगना चाहिए था. नसीरुद्दीन को अगर डर लग भी रहा है तो इस बात पर लगना चाहिए कि अगर वह या उसके बच्चे किसी रेस्टोरेंट में खाना खा रहे होते हैं तभी वहां याकूब जैसा आतंकी आकर ब्लास्ट करे तो क्या होगा लेकिन अफ़सोस नसीरुद्दीन को याकूब से डर नहीं लगेगा बल्कि बुलंदशहर से लगेगा क्योंकि हकीकत में नसीरुद्दीन को डर नहीं लग रहा है बल्कि वह “देश में असहिष्णुता बढ़ रही है पार्ट 2” नामक काल्पनिक फिल्म का हिस्सा बन चुका है तथा एक कैरेक्टर प्ले कर रहा है.

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