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“मैं बाला साहेब का शिवसैनिक हूं, सोनिया के साथ नहीं जा सकता” .. कहकर महाराष्ट्र शिवसेना नेता ने दिया इस्तीफा


महाराष्ट्र में लंबे समय से जारी सियासी खींचतान अब थम चुकी है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे एनसीपी तथा कांग्रेस के समर्थन से राज्य के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. ये पहली बार होगा जब ठाकरे परिवार का कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेगा. इसके बाद शिवसेना खेमे में खुशी का माहौल है लेकिन कांग्रेस के साथ हाथ मिलाना कुछ शिवसैनिकों को रास नहीं आ रहा है तथा उन्होंने इसके खिलाफ आवाज बुलंद भी कर दी है.

खबर के मुताबिक़, कांग्रेस से हाथ मिलाने को लेकर शिवसेना नेता रमेश सोलंकी से शिवसेना की युवा सेना इकाई से इस्तीफा दे दिया है. सोलंकी शिवसेना आईटी सेल के मेंबर भी थे. उन्होंने महाराष्ट्र में बने नए गठबंधन के प्रति रोष जताते हुए एक के बाद कई ट्वीट किए तथा शिवसेना छोड़ दी. अपने पहले ट्वीट में इस्तीफा देते हुए कहा, ‘मैं शिव सेना और युवा सेना के सम्मानित पद से इस्तीफा दे रहा हूं. मैं @OfficeofUT और आदी भाई @AUThackeray का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने मुझे मुंबई, महाराष्ट्र और हिंदुस्तान के लोगों की सेवा करने का मौका दिया.’

रमेश सोलंकी ने कहा कि उनकी अंतरात्मा और विचारधारा कांग्रेस के साथ काम करने की अनुमति नहीं देती है. उन्होंने कहा, ‘मैं बालासाहेब ठाकरे का शिवसैनिक हूं और 12 साल की उम्र से ही शिवसेना में हूं. 21 साल से मेरा एक ही उद्देश्य रहा है और वह है ‘कांग्रेस मुक्त भारत’. मेरे ट्विटर पर डेढ़ लाख ट्वीट्स हैं, जिनमें एक लाख से ज्यादा ट्वीट राहुल गांधी, सोनिया गांधी और उनके भ्रष्टाचार के विरोध में हैं. मैं आज उनकी तारीफ नहीं कर सकता.’

रमेश सोलंकी ने इस्‍तीफा देने के साथ ही अन्‍य मुद्दों को भी उठाया है. उन्‍होंने कहा, ‘कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि श्री रामचंद्रजी का कोई अस्तित्व नहीं है, ऐसे लोगों के साथ मेरा बैठना नामुमकिन है. उद्धव ठाकरे जी को शुभकामनाएं, मैं दिल से हमेशा शिवसेना में ही रहूंगा.’ इससे पहले सोलंकी ने ट्वीट किया, ‘पिछले कुछ दिनों से मेरा पक्ष जानना चाहते थे, लेकिन अब में अपनी बात साफ तरीके से कह रहा हूं. जो मेरे श्री राम का नहीं है (कांग्रेस), वो मेरे किसी काम का नहीं है. एक बार फिर प्यार और सम्मान के लिए आदित्य भाई को धन्यवाद. आपके साथ काम करने में मजा आया.’

सोलंकी ने आगे कहा, ‘इस दौरान उन्होंने किसी पद या टिकट की मांग नहीं की. महाराष्ट्र में सरकार बनने और शिव सेना के मुख्यमंत्री चुने जाने को लेकर बहुत बधाई. मगर मेरी आत्मा मुझे कांग्रेस के साथ काम करने की अनुमति नहीं देती है. मैं आधे-अधूरे मन से काम नहीं कर सकता. यह मेरे पद, मेरी पार्टी और साथियों के लिए सही नहीं होगा.’ उन्होंने कहा, ‘इसलिए बहुत ही भारी मन से मैंने जिंदगी का सबसे मुश्किल फैसला लिया है.’ एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘कहावत है कि जब जहाज डूबता है तो सबसे पहले चूहे कूदकर भागते हैं. मगर मैं अपनी पार्टी को जब छोड़ रहा हूं जब वह शीर्ष पर है.’


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