वामपंथ- उधर Pulwama में बलिदान हुए थे राष्ट्र के 40 योद्धा, इधर जश्न के साथ मनाया जाता रहा Valentines Day .. आज वीरो की पहली बरसी पर भी वही सब जारी - Hindi News, हिंदी समाचार, Samachar, Breaking News, Latest Khabar -

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वामपंथ- उधर Pulwama में बलिदान हुए थे राष्ट्र के 40 योद्धा, इधर जश्न के साथ मनाया जाता रहा Valentines Day .. आज वीरो की पहली बरसी पर भी वही सब जारी


ये वो दिन था जब रो रहा था राष्ट्र. हर तरफ या तो आंसू थे और या तो आक्रोश. देश मांग रहा था आतंकवाद के उस घृणित रूप को सदा के लिए खत्म करने का संकल्प और हर तरफ जनता निकल चुकी थी सडको पर.. अपने वीरो का इस तरह से बलिदान किसी से भी सहन नही हो रहा था और राष्ट्रभक्तों ने अपने व्यक्तिगत तमाम दर्द को भुला कर मांग शुरू कर दी थी जिहाद को खत्म करने के लिए भारत सरकार के आगाज़ की.

देश ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम कोनो में रहने वाले भारतवंशी भी खुल कर मांग कर रहे थे आतंकवाद को कुचल देने की. देश की पीड़ा इस तरह से थी कि उस दिन कई राष्ट्रभक्तों ने ठीक से खाना भी नहीं खाया था पर अगर कही कोई इस दर्द से अछूता था तो वो था वामपंथी समाज का एक बड़ा वर्ग. हलाकि ये वही हैं जो इस से पहले नक्सलियों की मौत पर आंसू और CRPF के जवानो के बलिदान पर जश्न मनाने के लिए बदनाम हुए थे.

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इस बार फिर निशाने पर CRPF थी. वो CRPF जो देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ कही जाती है. उसके वीरों ने बलिदान दे कर देश को रुला दिया था पर ठीक उसी समय वामपंथी वर्ग ट्विटर पर वैलेंटाइन डे तो ट्रेंड करवा रहा था. उस दिन कई वामपंथियो की सोशल मीडिया प्रोफाइल को देखा जाय तो उन्होंने एक शब्द भी पुलवामा के वीरो के लिए नहीं लिखा था और वैलेंटाइन डे की शुभकामनाएं उनके वाल पर भरी पड़ी थी.

उन वामपंथियो के बड़े अगुवा अथवा नेताओं की बात की जाय तो उन्होंने इस बात पर जोर मारना शुरू कर दिया कि RDX कहा से आया. इतना ही नहीं , जब सेना के जांबाजो ने पाकिस्तान में घुस कर सर्जिकल स्ट्राइक की तब वही वामपंथी नेता भारत की सरकार और सेना से उनकी कार्यवाही का सबूत मांगने लगे. देश ने ये सब कुछ अपनी आँखों से देखा और मन मसोस कर रहा गया था.

आज भी उसी पुलवामा हमले की पहली बरसी है. आज देश फिर से रो रहा उन वीरो को याद कर के और आक्रोश के साथ मांग कर रहा आतंकवाद की इस बेल को जड से उखाड़ देने की. लेकिन फिर से अगर सोशल मीडिया पर नजर घुमाई जाय तो वही वामपंथी वर्ग आज पुलवामा हमले से ज्यादा वैलेंटाइन डे को प्रमुखता दे रहा है. फिलहाल समाज का जागरूक वर्ग सब देख रहा है और निश्चित तौर पर बारीकी से समझ भी रहा.


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