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शिवसेना से हाथ मिलाने के कारण अजित पवार ने कर दी बगावत तथा तोड़ दी एनसीपी ? शरद पवार तथा सुप्रिया सुले के बयान यही कहते हैं


महाराष्ट्र की राजनीति में आज शनिवार सुबह बहुत बड़ा सियासी उलटफेर हुआ है. कल शाम को इस बात की घोषणा की जा चुकी थी कि उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनेंगे. लेकिन आज सुबह अचानक से खबर आई कि बीजेपी के देवेन्द्र फडणवीस मुख्यमंत्री तथा एनसीपी के अजित पवार उपमुख्यमंत्री बन चुके हैं. इस खबर के आने के बाद हर कोई चौंक गया कि शरद पवार ने स्वयं उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने का एलान किया था तब आखिर एनसीपी ने बीजेपी का समर्थन कैसे  दिया.

लेकिन एनसीपी खेमे से भी बड़ी खबर सामने आई है. खबर के मुताबिक़, शिवसेना से हाथ मिलाने के कारण अजित पवार ने परिवार से बगावत कर दी है. इसकी पुष्टि एनसीपी प्रमुख शरद पवार तथा उनकी बेटी व सांसद सुप्रिया सुले ने भी है. शरद पवार ने कहा है कि अजित पवार ने एनसीपी तोडकर बीजेपी को समर्थन दिया है. शरद पवार ने कहा है कि इसमें उनकी सहमति नहीं है. इसके अलावा शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने भी कहा है कि उनका परिवार तथा पार्टी टूट गई है. सुप्रिया सुले ने कहा है कि उनको धोखा दिया गया है तथा उन्होंने इतना ठगा कभी महसूस नहीं किया.

वहीं इस सब घटनाक्रम पर अजित पवार ने कहा है कि उन्होंने किसी को धोखा नहीं दिया है. अजित पवार ने कहा है कि शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस में एक महीने से बातचीत चल रही थी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. तीन दल मिलकर स्थिर सरकार नहीं दे सकते इसलिए महाराष्ट्र की जनता को स्थिर और स्थाई सरकार देने के लिए बीजेपी के समर्थन का फैसला किया. अजित पवार ने कहा कि मैंने शरद पवार को सब कुछ पहले ही बता दिया था.

वहीं सूत्रों के हवाले से ये भी जानकारी सामने आई है कि अजित पवार शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने के पक्ष में नहीं थे. अजित पवार नहीं चाहते थे कि एनसीपी तथा कांग्रेस शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाएं. शरद पवार का मानना था कि अगर शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाई जा सकती है तथा विचारधारा का मुद्दा नहीं रहता तो फिर बीजेपी के साथ सरकार बनाने में क्या बुराई है. हालाँकि सियासी पंडित ये मानने को तैयार नहीं है कि अजित पवार ने ये सब शरद पवार की अनुमति के बिना किया है.

राजनीति के जानकारों का मानना है कि जैसी पवार की राजनैतिक शैली रही है, उसे देखते हुए ये पवार का मास्टरस्ट्रोक है जिसकी रूपरेखा मोदी तथा पवार की मीटिंग में बनाई गई थी. आज पवार भले ही कहें अजित पवार ने उन्हें धोखा दिया है लेकिन ये इतिहास रहा है कि शरद पवार की इजाजत के बिना अजित पवार चूं तक नहीं करते. हालाँकि सच क्या है, ये जानने के लिए हमें थोडा इतंजार करना होगा.


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