तू छत पर क्यों गयी बिना शौहर से पूंछे.. ले अब घर से भी निकाल रहा.. सुप्रीम कोर्ट और सत्ता को फिर मिली चुनौती एक कट्टरपंथी से

देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि तीन तलाक सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि ये कुप्रथा मुल्सिम महिलाओं को प्रताड़ित करने वाली है. इसके बाद कोर्ट ने तीन तलाक को अवैध घोषित कर दिया तथा केंद्र सरकार को तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने का आदेश दे दिया. केंद्र सरकार तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाला क़ानून बना चुकी है तथा इस पर अध्यादेश भी लाया ला चुका है लेकिन इसके बाद भी वह कौन सी सोच है जो न तो कोर्ट को मानती और न ही केंद्र सरकार द्वारा बनाये गये क़ानून को ? आखिर वह कौन सी सोच है जिसके लिए देश के संविधान से बढ़कर उसका मजहबी कानून होता है तथा इसके बाद भी वह खुद को संविधान का सबसे बड़ा झंडबरदार बताती है?

कोर्ट, कानून, संविधान तथा सरकार को सरेआम ठेंगा दिखाने वाली इसी सोच का शिकार उत्तर प्रदेश के बरेली की एक विवाहिता हुई है जिसे उसके शौहर ने इसलिए तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया क्योंकि वह छत पर चली गयी थी जो उसके शौहर को पसंद नहीं आया. मामला बरेली के ठिरिया निजावत खां का है. बताया गया है कि बरेली के ठिरिया निजावत खां निवासी गुलशन का निकाह चार महीने पहले गांव के कौसर खां के साथ हुआ था. 27 सितंबर को गुलशन मकान की छत पर चली गई. उसके शौहर कौसर खां ने इस पर नाराजगी जताई. उसने बीवी से नीचे जाकर बैठने की बात कही मगर बीवी ने उसकी बातों को नजरअंदाज कर दिया.

इसके बाद कौसर खां गुस्से में आगबबूला हो गया तथा उसने गुलशन को तीन तलाक दे दिया. कौसर यहीं नहीं रुका बल्कि वह अपनी बीवी गुलशन को थाने ले गया. वहां उसने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी. लेकिन पुलिस ने उसकी बात को मानने से इनकार कर दिया. इसके बाद कौसर ने कागजी कार्यवाही करते हुए बीवी से अंगूठा लगवा लिया गुलशन को घर से निकाल दिया. गुलशन ने पुलिस में तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई है.

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