टूटने की कगार पर बीजेपी-शिवसेना गठबंधन… शिवसेना नेता संजय राउत के बयान से मचा सियासी हड़कंप


महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन टूटने की कगार पर पहुँच गया है. महाराष्ट्र में सरकार के गठन को लेकर जारी खींचतान के बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने ऐसा बयान दिया है, जिससे इस बात के प्रबल संकेत मिल रहे हैं कि शिवसेना ने बीजेपी से अलग होने का मूड बना लिया है. संजय राउत ने साफ़ कर दिया है कि हर हालात में महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा तथा उनकी पार्टी बीजेपी के आगे नहीं झुकेगी.

बीजेपी को चुनौती देते हुए संजय राउत ने कहा है कि अगर बीजेपी के पास बहुमत है तो वह सरकार बनाकर दिखाए वरना स्वीकार करे कि वह बहुमत नहीं जुटा पा रही है. गवर्नर से मिलने के बाद बीजेपी नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस के जवाब में राउत ने कहा कि बीजेपी यदि सरकार नहीं बना रही है तो साफ है कि उसके पास बहुमत नहीं है. वे राष्ट्रपति शासन लगाने की मंशा रखते हैं. यदि वे सरकार नहीं बना पा रहे हैं तो फिर बताएं कि हमारे पास बहुमत नहीं है. यदि वे राज्यपाल से मिलकर आए हैं तो उन्हें 145 विधायकों की सूची उन्हें सौंपनी चाहिए थी.

संजय राउत ने बीजेपी को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे साथ ब्लैकमेलिंग नहीं चलेगी. राउत ने कहा कि जब बीजेपी गवर्नर के पास गई तो फिर सरकार गठन का दावा क्यों नहीं पेश किया. ठाकरे फैमिली के वफादार माने जाने वाले राउत ने कहा कि हम अब भी सीएम की मांग पर कायम हैं. सरकार में शिवसेना का मुख्यमंत्री होना चाहिए.

संजय राउत ने कहा कि “महाराष्ट्र के ऊपर राष्ट्रपति शासन जबर्दस्ती थोपा जा रहा है. यह राज्य की जनता का सरासर अपमान है. आप जनता को साफ बताएं कि सरकार नहीं बना सकते हैं और विपक्ष में बैठेंगे. बीजेपी राष्ट्रपति शासन बनाने के हालात पैदा कर रही है. यह संविधान बनाने वाले बाबा साहेब भीमराव आबंडेकर का अपमान है. आप राज्यपाल से मिलकर आए हैं. आपको उन्हें 145 विधायकों की लिस्ट सौंपनी चाहिए थी.”

उद्धव ठाकरे के साथ शिवसेना विधायकों की मीटिंग के बारे में संजय राउत ने कहा कि मीटिंग में उद्धव ठाकरे ने विधायकों से कहा कि क्या जो हम कर रहे हैं, वह गलत है? इस पर सभी विधायकों ने कहा कि आप जो कर रहे हैं, वह एकदम सही है. उन्होंने कहा कि सभी विधायकों ने उद्धव ठाकरे जी को सरकार गठन पर फैसले के लिए अधिकृत किया है. उनकी ओर से लिया गया फैसला आखिरी होगा. विधायकों ने भी कहा है कि मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होना चाहिए. विधायकों को होटल में रखने को लेकर उन्होंने कहा कि हमें बीजेपी की ओर से तोड़े जाने का डर नहीं है. नए विधायकों को आवास मुहैया नहीं हुए हैं, इसलिए उन्हें रखने की व्यवस्था पार्टी ने की है.


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