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संस्कृत स्कूलों को बंद करने के असम सरकार के फैसले का हैरान कर देने वाला फैसला


जब से दिल्ली में जनता ने अपना जनादेश दिया है तब से उसका असर पूरे देश में किसी न किसी रूप में सामने आ रहा है. दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ने हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का मुख्यता से आगे रख कर चुनाव लड़ा लेकिन आख़िरकार भाजपा से एकदम भिन्न विचारधारा वाली आम आदमी पार्टी को दिल्ली की जनता ने प्रचंड जनादेश दे कर सत्ता दे दी. उसके बाद देश की राजनीति में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहे हैं.

इसका सबसे पहले असर उडीसा में देखने को मिला है जब उडीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मन्दिरों के लिए किये जा रहे तमाम योजनाओं के साथ साथ अब अल्पसंख्यको के तीर्थो को भी विकसित करने के लिए सरकारी कोष से अनुदान देने का फैसला किया. इस फैसले को दिल्ली के चुनाव परिणाम के असर से जोड़ कर देखा जा रहा है लेकिन अब वही असर पूर्वोत्तर के असम तक पहुचता दिखाई दे रहा है.

ध्यान देने योग्य है कि भारतीय जनता पार्टी शासित असम में मुख्यमंत्री सर्वानन्द सोनोवाल ने एक हैरत भरा फैसला लेते हुए राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी संस्कृत स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है. इस फैसले के बाद अब निजी संस्थान भले ही संस्कृत पढ़ा पायेंगे लेकिन सरकारी संस्थाओ में संस्कृत की शिक्षा नहीं दी जायेगी. राज्य के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा था कि राज्य सरकार द्वारा संचालित संस्कृत केंद्रों को अगले तीन से चार महीनों के अंदर बंद कर दिया जाएगा. असम बीजेपी ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है।


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