टुकड़े-टुकड़े समूह को सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम जवाब.. कश्मीर में सुधार में किया था दखल का प्रयास


कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से ही टुकड़े टुकड़े गैंग इस बात के लिए प्रयासरत है कि किसी प्रकार से कश्मीर के हालातों को सामान्य न होने दिया जाए. हालाँकि इसके बाद भी कश्मीर के हालात धीरे धीरे सामान्य हो रहे हैं तथा वहां के लोग धारा 370 हटाए जाने के फैसले को स्वीकार कर रहे हैं. यही कारण है कि टुकड़े टुकड़े गैंग इस बात को लेकर बेचैन है तथा इस बेचैनी को लेकर ये गैंग सुप्रीम कोर्ट गया लेकिन वहां से भी इसको झटका लगा है.

जम्मू-कश्मीर में जारी पांबिदियों के मद्देनजर उच्चतम न्यायलय ने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए कुछ लोगों को परेशान होना ही पडे़गा. उच्चतम न्यायलय ने यह टिप्पणी कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल द्वारा इस वर्ष 5 अगस्त को अनुच्छेद-370 हटाने के बाद सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में संचार व्यवस्था ठप्प होने के मुद्दे को उठाए जाने पर की. जस्टिस एम वी रमणा के नेतृत्व मे तीन जजों की पीठ में से एक जस्टिस सुभाष रैड्डी ने कहा वहां समस्या तो होगी और कुछ लोगों को परेशान होना पडे़गा.

आपको बता दें कि ये पीठ कश्मीर घाटी में लागू पांबदियों के खिलाफ याचिकाओं की सुनवाई कर रही है. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की दलीलों पर जज ने यह टिप्पणी की है. आजाद ने घाटी में सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदियों को चुनौती दी है. सिब्बल ने दलील दी कि आतंकवाद मुद्दे पर क्या 70 लाख नागरिकों का जीवन अवरुद्ध हो जाए और उनके मौलिक अधिकारों का हनन किया जाए.

जस्टिस एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कपिल सिब्बल से कहा कि इस तरह के मसले पर क्यों नहीं यह अंदेशा होना चाहिए कि पूरा इलाका या जगह अशांत हो सकता है? अनुच्छेद-370 को खत्म करने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में पाबंदी के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या अथॉरिटी को तब तक इंतजार करना चाहिए था जब तक कि वहां दंगा नहीं भड़क जाता?


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