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“हिंदुस्थान की नव चेतना का दूसरा नाम है नरेंद्र दामोदर दास मोदी”- सुरेश चव्हाणके जी का सम्पादकीय

हिंदुस्थान की नव चेतना का नाम है नरेंद्र दामोदरदास मोदी ! नरेंद्र मोदी जी पर बहुत लिखा गया है। विराट व्यक्तित्व के धनी मोदी जी का मुझे प्रभावित करनेवाला पहलू है उनका विलक्षण व्यक्तित्व का वह चरित्र जो प्रचंड ऊर्जा की चेतना निर्माण करता है। उस ऊर्जा को राष्ट्रीय चेतना में परवर्तित करने की उनकी अद्भुत क्षमता को आज तक मैंने तो किसी में नहीं देखा है। देश के लिए कार्य करने वाले मोदी जी पर तो हम हमेशा बोलते-लिखते हैं। आज मैं उनके राष्ट्र के प्रति किए कार्य को लेकर लिख रहा हूँ। लोग अधिकतर देश नाम की व्यवस्था और उसके इर्द गिर्द ही ज़्यादा केंद्रित होते हैं। उसी का ज़्यादा मूल्याँकन करते हैं, परंतु एक राष्ट्रवादी पत्रकार होने के नाते मैं मोदी जी के राष्ट्र के लिए किए

हुए कार्यों को अधिक महत्व देता हूँ। इसलिए कि विश्व पटल पर कई देश ऐसे थे जिनमें राष्ट्र भाव नहीं था तो वह देश समय के साथ समाप्त हो गए। दूसरी ओर कई समूहों के पास भूमि और देश नहीं था।लेकिन उनके पास प्रखर राष्ट्रीय भावना थी। उनके निरन्तर ज्वलंत राष्ट्रीय भावना ने उनको देश दे दिया। इसलिए मैं मानता हूँ कि राष्ट्रीय भावना सबसे अधिक आवश्यक है। मोदी जी इस राष्ट्रीय भावना को न केवल समझते हैं , बल्कि उसको जगाने, उसमें निरन्तर चेतना भर कर उसे प्रज्ज्वलित रखने और उससे असम्भव प्राय कार्य को करोड़ों लोगों से एक साथ करवाने में सफल भी हुए हैं। उनके प्रधानमंत्री बनने के पहले २०१२/१३ का परिवेश क्या था देश का? अनिवासी भारतीय तो छोड़िए देश के

नागरिकों को भी धीरे-धीरे भारतीय होने पर गर्व होना काम हो गया था!चारों ओर भ्रष्टाचार, अव्यवस्था के साथ निराशा का वातावरण था। अपने देश का कभी कुछ होने वाला नहीं है, यह एसे ही चलने वाला है, सरकारी काम है भाई। ऐसे ही होता है। ऐसे न जाने कितने नकारात्मक वाक्य आपको सुनने को मिलते होंगे और इस प्रकार के भाव आपके भी मन में आते होंगे! परंतु २०१४ के बाद मोदी जी ने न केवल स्वयं के प्रति, प्रधानमंत्री पद के पद के प्रति बल्कि राजनीतिक लोगों के प्रति देखने का दृष्टिकोण बदल दिया है। बल्कि उसी सरकारी तंत्र को जिसे लोग मृतप्राय और भ्रष्ट कहते थे, आज उसी तंत्र में लोगों ने आशा निर्माण की है। उसके लिए उन्होंने ग़लत अधिकारियों को बाहर भी किया और समाज के अंदर के क्षमतावान और प्रतिभावान पेशेवर को सीधे सरकार में संयुक्त सचिव पदों पर भी नियुक्त करने का निर्णय लिया। करोड़ों रुपए के पैकेजेज छोड़ कर कई लोग आज उसी सरकार नाम की व्यवस्था में रम कर माँ भारती की सेवा कर रहे हैं। यह चेतना निर्मिती का उच्च मानक और परिणाम है।

राजनीतिक क्षेत्र में भी पद और प्रतिष्ठा से आगे बढ़ कर समाज कार्य करने के लिए अच्छे लोग आने लगे। कुछ ही वर्ष पहले भ्रष्ट दिखाने वाला राजनीतिक महकमा पूरे पाँच वर्ष के कार्य के बावजूद भ्रष्टाचार के आरोपों से दूर रहा।

देश के प्रधानमंत्री राजनीतिक लोगों के बाहर के लोगों के भी नायक हो सकते हैं। यह दौर समाप्त सा हो गया था। परंतु किसी भी राष्ट्र के लिए उसके प्रधानमंत्री राष्ट्रीय नायक होने के लाभ हो सकते हैं , बल्कि यही सबसे बड़ी ज़रूरत है इस पर ज़्यादा किसी ने ध्यान नहीं दिया। राजनीति के कुछ नेता सर्व या ज़्यादा स्वीकार्य तो थे परंतु वह देश के सारे क्षेत्र के लिए चेतना नहीं थे। बदलते राजनीतिक परिदृश्य में तो यह होने की सम्भावना लोगों ने छोड़ दी थी। परंतु मोदी जी ने उसे जगाया, उसमें विश्वास निर्माण किया। उसके प्रभाव में लोग साथ आते गए।कारवां बनता गया और देश आज एक अपार नई संभावनाओं के द्वार पर खड़ा है। ऐसा नहीं की चुनौतियाँ नहीं है, परंतु अब हम प्रत्येक चुनौती को परास्त कर सकते हैं। यह प्रबल और सशक्त भाव भी है। इसे ही मैं चेतना का परिणाम कहता-मानता हूँ।

देश के क्रीड़ा क्षेत्र को भी उनका व्यक्तित्व संबल प्रदान करता है। वह ना केवल पुरस्कार प्राप्त करने पर शुभकामनाएं देते हैं ,  बल्कि इस देश के खिलाडियों को मिलने के लिए अपना बहुमूल्य समय भी देते हैं। कई बार तो बड़ी-बड़ी स्पर्धाओं में जाने वाले खिलाडियों को मिल कर उनको प्रोत्साहित कर के असम्भव से दिखाने वाले परिणाम उन्होंने कर के दिखाए हैं। खिलाडियों में भी वही राष्ट्रीय चेतना शरीर के क्षमताओं से ज्यादा ऊर्जा और आत्मविश्वास निर्माण करती है।

विज्ञान भी देश को एक सूत्र और विशिष्ट राष्ट्र भाव से जोड़ने का काम कर सकता है। शोधों और प्रयासों के साथ देश खड़ा हो सकता है। पूरी रात देश जो चंद्रयान के लिए जाग रहा था— वह राष्ट्रीय भावना की चेतना का अपूर्व चमत्कार था। ‘इसरो’ तो पहले से था। कई यान और उपग्रह पहले भी छोड़े जा चुके हैं। परंतु मोदी जी ने लगातार ऐसे प्रयास किए, कार्यक्रम किए, स्वयं की सहभागिता पहले दिखायी और बाद में लोगों को कहा तो सब साथ खड़े थे। (इस पर अलग से लिखे हुए मेरे सम्पादकीय ज़रूर पढ़ें .

आध्यात्मिक और धार्मिक क्षेत्र के प्रति अस्पृश्यता का भाव उन्होंने समाप्त किया। ख़ुद के आस्था को छुपाने के बजाए उसे खुल कर दूसरों को प्रेरणा देने के शक्ति के रूप में सामने रखा। इसी प्रकार उन्होंने कुम्भ मेले में अध्यात्म के साथ सामाजिक समरसता का ऐसा उच्च प्रतिमान स्थापित किया कि लोगों को प्रतीत हुआ कि यह पहले किसी ने क्यों नहीं किया? हमने क्यों किया। कितना अद्भुत था !

बॉलीवुड में भी उनकी प्रेरणा से आज कई अच्छी फ़िल्मे बन रही हैं। जो सोचा भी नहीं जा सकता वह संभव हो रहा है। समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को उन्होंने प्रभावित किया है। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर महिलायें और बुज़ुर्गों तक मोदी मोदी कहने वालों की बड़ी संख्या है।  विदेश में रहने वाले भारतीयों को राजनीति में सबसे काम रुचि होती थी। प्रधानमंत्री या मंत्रियों के नाम को शायद ही वह याद रखते होंगे! परंतु २०१२ के बाद से इस पर बड़ा असर हुआ । अब तो विदेश के भारतवंशियों , अनिवासी भारतीयों को तो छोड़िए, विदेशियों में मोदी जी के समर्थक मिलेंगे। बल्कि कई देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी मोदी के प्रशंसक हैं। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प , पूर्व राष्ट्रपति ओबामा और रूस के राष्ट्रपति पूतिन जैसों के साथ उनकीमित्रता सुपरिचित है ही। उस व्यक्तिगत संबंधों से देश को क्या लाभ लेना है वह भलीभांति जानते हैं।

प्रधानमंत्री ने क्या करने क्या नहीं करने के प्रोटोकोल को अलग कर के मोदी जी ने नए मापदंड स्थापित किए हैं। यहाँ शब्दों और समय की मर्यादाएं हैं। परंतु आज के लेख में मुझे प्रतीत हो रहा है की मोदी जी पर इसी मुद्दे को लेकर अच्छी सी पुस्तक भी लिखी जा सकती है। जो ना केवल हिंदुस्थान के आज, कल और कल के लिए बल्कि दूसरे देशों के नेतृत्व के लिए भी एक यशस्वी और अपने अपने देश-राष्ट्र के लिए उपयोगी हो। यही तो विश्व के गुरुत्व की ओर जाना है। मोदी जी को भविष्य के जीवन के लिए शुभ कामनाएं।

आपका – सुरेश चव्हाणके

 

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