19 अप्रैल: बलिदान दिवस पर नमन है देश के दूसरे खुदीराम बोस अनंत लक्ष्मण कन्हेरे को, वो योद्धा जो जैक्सन को मार कर 19 साल में ही अमर हो गया


वो आजादी के असली हकदार थे , उन्होंने न अपनी आयु देखी और न ही अपना भविष्य. उनके लिए सब कुछ राष्ट्र था और वो सब कुछ राष्ट्र पर ही न्योछावर कर के चले गये. राष्ट्र को आज दूसरा खुदीराम मिला था जो मात्र 19 वाल की आयु में संसार छोड़ कर फांसी के फंदे पर झूल गया था. अफ़सोस की बात ये है कि केवल ही ही परिवार के लिए अपनी स्याही खत्म कर के इतिहास को विकृत करने वाले झोलाछाप और चाटुकार कुछ इतिहासकारों ने वो अन्याय केवल इन वीर बलिदानियों के साथ ही नहीं बल्कि राष्ट्र के साथ और राष्ट्र के लिए समर्पण रखने वाले हर भारतीय के साथ किया.

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इस वीर बलिदानी अनंत लक्ष्मण कन्हेरे का जन्म १८९१ ई. इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ था. ये भारत के युवा क्रांतिकारियों में से एक थे. इनके पूर्वज महाराष्ट्र के रत्नागिरी ज़िले के निवासी थे. कन्हेरे के परिवार में उनके दो भाई तथा दो बहनें थीं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा इंदौर में ही हुई थी. इसके बाद अपनी आगे की पढाई के लिए वे अपने मामा के पास औरंगाबाद चले गए. उन्हें देश की आज़ादी के लिए शहीद होने वाले देशभक्तों में गिना जाता है. मात्र 19 साल की आयु में ही राष्ट्र पर जबरन कब्जा कर के बैठे अंग्रेजो के लिए इन योद्धा का खून खौलता रहता था जिसका अंजाम जो हुआ उस से काँप गया था ब्रिटेन भी.

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१९०९ ई. में ब्रिटिश सरकार के ख़िलाफ़ एक लेख लिखने के कारण गणेश सावरकर को आजन्म कारावास की सज़ा हुई थी. अंग्रेज़ सरकार के इस फैसले से क्रांतिकारियों में उत्तेजना पैदा हो गई. प्रतिशोध की भावना से प्रेरित होकर अनंत लक्ष्मण कन्हेरे ने २१ दिसम्बर,१९०९ ई. को नासिक के ज़िला अधिकारी जैक्सन को गोली मार दी. जैक्सन की हत्या के बाद अंग्रेज़ पुलिस ने कई स्थानों पर छापेमारी की. अनेक गिरफ्तारियाँ हुईं और मुकदमे चले. यद्दपि ये सजाये और ये गिरफ्तारियां किसी भी रूप में इन युवाओं के चेहरे पर शिकन नही डाल पाई . सबसे बड़ी बात ये रही कि आज के आज़ादी के वो ठेकेदार इन युवाओं को मिल रही अनंत प्रताड़ना पर खामोश रहे और चुपचाप अंग्रेजो के साथ मीटिंग आदि में व्यस्त रहे.

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जैक्सन की हत्या के मामले में अनंत लक्ष्मण कन्हेरे, धोंडो केशव कर्वे और विनायक देशपाण्डे को फ़ांसी की सज़ा हुई. दूसरे मुकदमें में राजद्रोह फैलाने के अभियोग में 27 लोगों को सज़ा मिली, जिनमें विनायक सावरकर को उम्रकैद की सज़ा हुई. अनंत लक्ष्मण कन्हेरे आज ही के दिन अर्थात १९ अप्रैल, १९१० को केवल 19 वर्ष की आयु में फ़ांसी पर लटका दिये गए। इतनी छोटी-सी आयु में ही शहीद होकर भारत माँ के इस सपूत ने भारतीय इतिहास में अपना नाम अमर कर लिया. आज राष्ट्र के लिए सर्वस्व बलिदान कर गये उस युवा अमर बलिदानी को सुदर्शन परिवार उनके बलिदान दिवस पर बारम्बार नमन करते हुए उनकी गौरवगाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है.

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