CAA में रखी शांति और काबू रखा उन्माद. इसीलिए अब खोजा एक नया बहाना पुलिस बल को बदनाम करने का, उन्हें भी जिनका नहीं है कोई दोष


पिछले कुछ माह से अगर पूरे प्रदेश के आंकड़ो और परिदृश पर नजर दौड़ाई जाए तो जो विभाग विपक्षी पार्टियों और कुत्सित सोच वालों के निशाने पर सबसे जायदा रहा है, वो है उत्तर प्रदेश पुलिस. यद्दपि पुलिस बल के खिलाफ हंगामा नया विषय नहीं है लेकिन जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश में पुलिस वालों ने अपनी जान पर खेल कर CAA – NRC आदि के नाम पर हिंसक शोर मचाने वालों का दमन किया, उसके बाद इस विभाग के ऊपर हर उस मौके की तलाश रहने लगी जब इस पर लांछन लगाया जा सके.

अगर उन जिलों की बात की जाय जहाँ हिंसा या उन्माद फैलाने वाले ज़रा सा भी सफल नही हो पाए तो उसमे से सबसे मुख्य है जिला चंदौली. बिहार की सीमा से सटे इस जिले में पुलिस बल ने जिस प्रकार सराहनीय कार्य किया उसके लिए यहाँ की जनता भी अपने पुलिस बल का आभार अभी तक व्यक्त करती है जबकि चरमपंथी हिंसा की लपट ठीक बगल वाराणसी तक आ गई थी. इस शांतिपूर्ण माहौल को बनाए और बचाए रखने के लिए जिन अधिकारियों ने सबसे ज्यादा प्रयास किया उसमे SP हेमंत कुटियाल, DSP प्रदीप सिंह चन्देल व् DSP त्रिपुरारी पाण्डेय प्रमुख थे.

इन सभी अधिकारियो ने न सिर्फ सख्ती से बल्कि अपने बेहतरीन अनुभव से जिले में किसी भी प्रकार की ऐसी कोई वारदात नहीं होने दी थी जो लखनऊ में बैठे उच्चाधिकारियों अथवा शासन को जवाबदेह बनाए. विशेष रूप से क्षेत्राधिकारी प्रदीप सिंह चन्देल जिस क्षेत्र को संभाल रहे थे उस क्षेत्र में हिन्दू मुस्लिम आबादी मिश्रित रूप में है इसलिये उन पर जिम्मेदारी ज्यादा थी और इसका उन्होंने बहुत ही सफलता के साथ निर्वहन किया..प्रदीप सिंह चंदेल जैसे अधिकारियों के साथ मिल कर चंदौली पुलिस द्वारा स्थापित की गई यही शांति और सौहार्द उन्हें रास नही आ रही थी जो कुछ बड़ा तमाशा होने की उम्मीद जताए हुए थे.

इसके बाद ख़ुफ़िया इनपुट भी आने शुरू हो गये जिसमे सबसे जायदा ख़ुफ़िया इनपुट इस बात के थे कि हिन्दुओ के धार्मिक पर्वो व् उनके समूह वाले स्थलों पर साधू वेश में या किसी अन्य वेश को बदल कर आतंकी हमले हो सकते हैं. इसको ले कर विशेष सतर्कता पुलिस विभाग के अंतिम स्टाफ तक को भेजी गई और बड़ी चुनौती को चुटकियो में हल कर देने वाले चंदौली पुलिस में भी मौनी अमावस्या के स्नान व मेले को सकुशल निबटा देने का दबाव था और ये जिम्मेदारी भी प्रदीप सिंह चन्देल को मिली.

अपने अधिनस्थो के साथ प्रदीप सिंह चन्देल भारी भीड़ को सम्भाल रहे थे और एक एक व्यक्ति पर नजर रखे हुए थे.. उनके साथ पुरुष और महिला पुलिस स्टाफ थे और न सिर्फ भीड़ को नियंत्रित करने और आवागमन सुचारू चलाने की जिम्मेदारी उन पर थी बल्कि किसी भी संदिग्ध हरकत पर नजर रखते हुए उसके निराकरण का भी अतिरिक्त जिम्मा था उन पर. अचानक ही उनके साथ पुलिस बल मुख्य मार्ग पर पहुचा जहाँ से लाखो लोगों को स्नान के लिए आना जाना हो रहा था.

ये स्थान संकरा था और एक बड़े जगह पर सडक पर बैठे कुछ संदिग्ध लोगों का कब्जा था. बताया जा रहा है कि ये भीख मांगने वाले लोग थे जबकि इनको कोई पहिचान उजागर नहीं थी. मानवीय आधार पर ये सभी भीख मांगने वाले भिखारी कहे जा रहे हैं लेकिन सुरक्षा के दृष्टिकोण से इनमे से कोई भी श्रद्धालुओं के लिए खतरा भी हो सकते थे. पुलिस ने इनको लगातार और बार बार वहां से जाने के लिए कहा था पर इन सभी ने उस स्थान को ही चुना था जहाँ भीड़ का दबाव बहुत अधिक बढ़ता था जिस से भगदड़ होने की संभावना रहती थी.

इनके द्वारा जब भीड़ जाम की स्थिति में आने लगी तब क्षेत्राधिकारी प्रदीप सिंह चंदेल अपने अधिनस्थो के साथ इन्हें हटाने के लिए पहुचे. थाना प्रभारी बलुआ अतुल नारायण सिंह ने यहाँ अपना आपा खो दिया और सडक के किनारे अनधिकृत रूप से बैठे उनमें से एक को पीट दिया. वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार जिस समय थाना प्रभारी बलुआ उस व्यक्ति पर हाथ उठा रहे थे ठीक उसी समय पीछे क्षेत्राधिकारी प्रदीप सिंह चन्देल प्रेम व् संयत भाव से उस व्यक्ति के पीछे अनधिकृत रूप से बैठे व्यक्ति को उठ कर जाने के लिए कह रहे थे.

बाद में प्रदीप सिंह चन्देल ने अपने अधीनस्थ थानाध्यक्ष को उसकी हरकत के लिए डांटा भी पर वो उस छोटे से कुछ सेकेण्ड के वीडियो में नहीं आ पाया. पूरे विडियो में कहीं एक भी जगह क्षेत्राधिकारी प्रदीप सिंह चन्देल किसी पर हाथ उठाना तो दूर किसी से मौखिक रूप से अभद्रता भी करते नही दिखाई दिए. लेकिन CAA प्रदर्शन के समय से चली आ रही खुन्नस में कुछ लोगों ने मात्र कुछ सेकेण्ड के वीडियो को ही उनके खिलाफ हथियार जैसा बना डाला और उनको बदनाम करने का कुत्सित प्रयास शुरू हो गया जबकि इस मामले में थाना प्रभारी पर कार्यवाही पुलिस अधीक्षक द्वारा की जा चुकी है.

भीड़ को नियंत्रित करने के साथ उन्होंने अपने अधीनस्थ को भी बाद में उसकी हरकत के लिए डांटा लेकिन तब तक वीडियो बननी बंद हो चुकी थी. प्रदीप सिह चन्देल को व्यक्तिगत रूप से जानने वाली स्थानीय जनता से जब सुदर्शन न्यूज़ संवाददाता प्रशांत सिंह ने सवाल जवाब किया तब स्थानीय लोगों ने उन्हें बेहद शांत और न्यायप्रिय स्वभाव का पुलिस अधिकारी बताया.. अभी हाल में ही एक पीड़ित महिला को न्याय दिलाने में उनकी भूमिका न सिर्फ जनपद चंदौली बल्कि पूरे प्रदेश में सराही गई थी.

ऐसे में मात्र कुछ सेकेण्ड की वीडियो के आधार पर व् किसी अन्य पुलिसकर्मी की हरकत को आधार बना कर उनकी छवि को धूमिल करने का विरोध चंदौली का हर वर्ग कर रहा है व् उच्चाधिकारियों से इस मामले में न्यायोचित कार्यवाही की आशा भी कर रहा है. क्षेत्राधिकारी प्रदीप सिंह चंदेल की भी सराहना करनी होगी यहाँ जो कर्म को सर्वोपरि मानते हुए इन विवादों पर ध्यान देने के बजाय अपने मूल कर्तव्य जनमानस की सुरक्षा पर खुद को केन्द्रित किये हुए है.

फिलहाल अफवाहबाजो और आधारहीन तथ्यो को दुष्प्रचारित करने वालों व् जनता की राय में बहुत अंतर है व् लगभग सभी को पुलिस अधिकारियो की कार्यशैली पर विश्वास है. एक बड़ा स्नान व् मेला सकुशल व् सुरक्षित बीता उसके लिए भी पुलिस बल को स्थानीय जनता व् आये श्रद्धालुओं द्वारा धन्यवाद किया जा रहा है , सिवाय उन कुछ गिने चुने लोगों को छोड़ कर जिनके निशाने पर उनके स्वभाव के अनुसार हमेशा पुलिस ही रहती है.


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share