बीजेपी को अलविदा कहेंगी कद्दावर बीजेपी नेता पंकजा मुंडे ? किया कुछ ऐसा जिससे मचा सियासी हड़कंप


महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी का बेहद ही लोकप्रिया चेहरा पंकजा मुंडे क्या बीजेपी को अलविदा कहने वाली हैं. ऐसे संकेत कोई और नहीं बल्कि खुद पंकजा मुंडे ने दिए हैं. पंकजा मुंडे ने कुछ ऐसा किया है जिससे महाराष्ट्र में सत्ता गंवाने के बाद पहले से ही परेशान भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. दरअसल पंकजा मुंडे ने बीजेपी से बगावत के संकेत दिए हैं, जिसके बाद सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया हैं.

दरअसल पंकजा मुंडे ने अपने ट्विट्टर बायो से बीजेपी हटा दिया है अर्थात ट्विट्टर बायो के अनुसार अब पंकजा मुंडे बीजेपी नेता नहीं रही हैं. इसके बाद ये आशंकाएं लगाई जा रही हैं कि पंकजा अब बीजेपी छोड़ सकती हैं. ये भी कहा जा रहा है कि पंकजा बीजेपी छोड़ शिवसेना से जुड़ सकती हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ पंकजा के अच्छे संबंध हैं. इससे पहले पंकजा ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से भी कुछ इसी तरह के संकेत दिए थे.

पंकजा मुंडे ने फेसबुक पोस्ट के जरिए शक्ति प्रदर्शन के संकेत देते हुए अपने पिता गोपीनाथ मुंडे के जन्म दिवस पर 12 दिसंबर को समर्थकों की बैठक बुलाई है. उन्होंने कहा कि वे 8-10 दिन में बड़ा फैसला लेंगी. पंकजा मुंडे ने पोस्ट में लिखा है, चुनाव में हार के बाद समर्थकों के कई फोन-मेसेज आए और मिलने का आग्रह किया गया, लेकिन राजनीतिक स्थिति ऐसी रही कि समर्थकों से मिलना नहीं हो सका. पंकजा की इस फेसबुक पोस्ट के बाद से ही ये कहा जा रहा है कि पंकजा बीजेपी से नाता तोड़ सकती हैं.

पंकजा ने फेसबुक पर लिखा कि चुनाव हुआ, चुनाव के नतीजे भी आ गए, चुनाव के बाद राजनीतिक गतिविधियां, कोर कमिटी की मीटिंग, पार्टी मीटिंग ये सब आप लोग देख रहे थे. चुनाव नतीजे के बाद मैंने मीडिया के सामने जाकर हार की बात स्वीकर करते हुए पूरी जिम्मेदारी खुद ली. दूसरे दिन पार्टी की कोर कमिटी की मीटिंग में भी मैं उपस्थित रही. उन्होंने आगे लिखा ‘पहले देश, बाद में पार्टी और आखिर में खुद’ यह संस्कार बचपन से है. जनता के प्रति, कर्तव्य से बड़ा और कुछ नहीं होता. ऐसा मुंडे साहब ने बचपन से सिखाया है.

पंकजा ने लिखा कि पिता की मौत के बाद तीसरे दिन से मैं काम में जुट गई थी. 5 साल सत्ता के माध्यम से सेवा की, मुझे यह मौका सिर्फ और सिर्फ आपके विश्वास के कारण मिला. उन्होंने लिखा की आज हार के बाद मेरे लोगों ने मुझे बहुत मेसेज और फोन किए. उन्होंने ‘दीदी हमे मिलने का समय दीजिए’, दीदी हमे तुम्हारा दर्शन लेकर ही जाना है’ मेरे लिए ऐसी सहानुभूति व्यक्त की. पंकजा ने लिखा कि मैं आप लोगों की बहुत-बहुत आभारी हूं. आप मुझसे समय मांग रहे, मैं आपको समय देने वाली हूं. 8 से 10 दिनों के बाद…

पंकजा मुंडे ने आगे लिखा कि यह 8 से 10 दिन मुझे खुद से संवाद बनाने के लिए समय चाहिए. आगे क्या करना है ? किस मार्ग से जाना है ?  अपने लोगों को हम क्या दे सकते ? हमारी ताकत क्या है ? लोगों की अपेक्षा क्या है ? इन सभी बातों पर विचार करने के बाद 12 दिसंबर को मैं आपके सामने आने वाली हूं. 12 दिसंबर को मुंडे साहब का जन्मदिन है. उस दिन आप लोगों से बात करूंगी? आप लोगों के अलावा मेरा कौन है?


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