चीन के मुस्लिमों पर अब खुद आया राष्ट्रपति जिनपिंग का बयान.. वो बयान जिसमें साफ़ है एक संदेश


भारत के पड़ोसी मुल्क चीन से अक्सर ये ख़बरें सामने आती रहती हैं कि वहां मुस्लिमों के साथ मजहब के आधार पर भेदभाव किया जाता है, उन्हें प्रताड़ित किया जाता है. चीन की सत्ता किसी भी हालात में इस्लामिक चरमपंथ को अपने देश में जड़ें नहीं जमाने देना चाहती है. चीन कभी मुस्लिमों को ट्रेनिंग के नाम पर शिविरों में कैद कर देता है तो कभी उन्हें जबरन सुअर का मांस खाने को मजबूर करता है.. ये बात सिर्फ हम नहीं कह रहे हैं बल्कि पूरी दुनिया कह रही है लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि दुनिया का कोई भी देश.. यहां तक इस्लामिक देश भी मुस्लिमों को लेकर चीन के इस खूंखार रूप के खिलाफ बयान तक नहीं दे पाते.

अब जो खबर आई है वो उइगर मुस्लिमों को लेकर चीनी राष्ट्रपति के रौद्र रूप को प्रदर्शित करने वाली है. खबर के मुताबिक, अमेरिकी मीडिया में लीक हुए दस्तावेजों में कहा गया है कि चीन ने लाखों उइगुर और मुस्लिम अल्पसंख्यकों को पिछले तीन साल से हिरासत कैंप और जेल में डाल रखा है क्योंकि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्पष्ट आदेश दिया है कि ऐसे लोगों पर किसी प्रकार की दया न की जाए. चीन का यह कदम आतंकवाद, घुसपैठ और अलगाववाद के खिलाफ बताया जा रहा है.
न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे 400 पेज के दस्तावेज में बताया गया है कि शिनजियांग में बड़े स्तर पर अंधविश्वास पसरा है जिसे खत्म करने की मांग की गई है. न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे दस्तावेज में राष्ट्रपति जिनपिंग के बयान का हवाला देते हुए लिखा गया है कि ‘हाल के वर्षों में शिनजियांग ने बड़ी तेजी से विकास किया है और लोगों का जीवन स्तर भी तेजी से सुधरा है. इसके बावजूद वहां जातिगत अलगाववाद और आतंकी हिंसा में बढ़ोतरी देखी गई है. इसका मतलब ये हुआ कि आर्थिक विकास से व्यवस्था और सुरक्षा अपने आप कायम नहीं हो जाती.’

उइगर मुस्लिमों रहम न दिखाने

अखबार के मुताबिक, ये दस्तावेज चीनी राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े एक अनाम शख्स ने लीक किये जिसने यह उम्मीद जताई कि यह खुलासा शी समेत नेतृत्व को बड़े पैमाने पर हिरासत के दोष से बचने से रोकेगा. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, दक्षिणपश्चिम चीन में अल्पसंख्यक उइगर उग्रवादियों द्वारा एक रेलवे स्टेशन पर 31 लोगों की हत्या करने के बाद अधिकारियों को 2014 में दिये गए भाषण में शी ने ‘आतंकवाद, घुसपैठ और अलगाववाद’ के खिलाफ पूर्ण संघर्ष का आह्वान करते हुए ‘तानाशाही के अंगों’ का इस्तेमाल करने और ‘किसी भी तरह की दया नहीं’ दिखाने को कहा था.

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