महादेव के दर्शन के लिए अब धारण करना होगा धार्मिक वेश. योगीराज में अब धर्मनगरी सिर्फ धार्मिको के लिए


ये वो मांग थी जो कभी हमारी परम्परा हुआ करती थी. परम्परा में धर्मिक स्थल कभी पर्यटन के लिए नहीं प्रयोग होते थे लेकिन दुर्भाग्य से समय परिवर्तन के साथ ये एक विकृति के रूप में फ़ैल गई और हिन्दुओं के तीर्थ स्थल धीरे धीरे उस प्रकार के पर्यटन के रूप में विकसित होते गये जो किसी धर्मस्थल के लिए कदापि सही नहीं कहे जा सकते हैं. अभी कुछ समय पहले मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने तीर्थ स्थलों के बगल शराब आदि बिकने की अनुमति दी थी जो बाद में हिन्दू संगठनों के भारी दबाव के चलते वापस ली गई थी.

लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अब लिए हैं ऐसे फैसले जो वापस लौटाएंगे भारत की प्राचीन परम्परा को और धर्मस्थल सिर्फ धार्मिक लोगों के लिए होने की दिशा में बढ़ाया है बेहद जरूरी कदम.  वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में अब दक्षिण भारतीय मंदिरों की तर्ज़ पर स्पर्श दर्शन के लिए ड्रेस कोड लागू होगा.ड्रेस कोड के मुताबिक़, पुरुष पारंपरिक परिधान यानी धोती और अंगवस्त्र (जो सिला हुआ न हो) और महिलाएं साड़ी पहनकर ही गर्भ गृह में स्पर्श दर्शन कर सकेंगी.

अब मकर संक्राति के बाद जींस, पैंट, शर्ट, सूट, कोट इत्यादि परिधानों में जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में सिर्फ़ दर्शन की व्यवस्था होगी, उन्हें गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी. रविवार को राज्य के धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी, मंदिर प्रशासन और काशी विद्वत परिषद की बैठक में फ़ैसला लिया गया कि गर्भ गृह में स्पर्श दर्शन के लिए पुरुषों को धोती और महिलाओं को साड़ी में आना अनिवार्य किया जाएगा. यह व्यवस्था मकर संक्रांति के बाद लागू की जाएगी.


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