श्रीराम मंदिर मामले के निपटारे के बाद अब धर्मान्तरण की मशीनों पर योगी सरकार का वार.. बन रहा ऐसा कानून कि कांपेंगे धर्मान्तरणकारी


अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने के बाद अब योगी सरकार धर्मान्तरण की मशीनों पर वार करने की तैयारी में है. जानकारी के मुताबिक़, योगी सरकार धर्मान्तरण रोकने के लिए योगी सरकार कानून बनाने जा रही है. सूत्रों के मुताबिक़, योगी सरकार का ये कानून काफी कड़ा होगा. इस क़ानून में कम से कम 1 साल से 5 साल तक जेल की सजा का प्रावधान हो सकता है. ये जानकारी सामने आने के बाद यूपी की जनता निश्चित रूप से काफी खुश होगी.

खबर के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर जबरन धर्मांतरण कराए जाने की रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य विधि आयोग ने योगी आदित्यनाथ सरकार से सख्त कानून बनाने की सिफारिश की है. इसमें प्रावधान किया गया है कि जबरन धर्मांतरण कराने पर कम से कम एक साल और अधिकतम पांच साल की सजा होगी. विधि आयोग के अध्यक्ष आदित्यनाथ मित्तल और सचिव सपना त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुरुवार को मुलाकात की और उन्हें इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है.

रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में बड़े पैमाने पर जबरन धर्मांतरण हो रहा है, लोगों को प्रलोभन देकर भी उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार धर्म परिवर्तन के लिए लव जिहाद भी एक कारण है. रिपोर्ट्स की मानें तो राज्य में बड़े पैमाने पर पहचान छिपाकर लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है. स्टेट लॉ कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि यूपी में गरीब हिंदुओं और खास तौर पर एससी/एसटी को लालाच देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है. कुछ दिन पहले जौनपुर में एक साथ 300 लोगों के धर्मपरिवर्तन का मामला भी सामने आया था. साथ ही रिपोर्ट में कहा गया कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अभी भी धर्म परिवर्तन हो रहा है.

268 पेज की इस रिपोर्ट में बिल का ड्राफ्ट पेश किया गया है. इसमें कहा गया है कि किसी तरह जबरन, धोखाधड़ी, तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर धर्मांतरण कराने को प्रतिबंधित किया गया है. अगर गलत तरीके से धर्मांतरण कराया गया है तो पीड़ित पक्ष इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवा सकता है. एक साल से कम सजा नहीं होगी जबकि इसे पांच साल किया जा सकता है. इसमें जुर्माने का भी प्रावधान है. यदि कोई संस्था या संगठन इसके प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो उससे जुड़े संचालक को भी उसी तरह की सजा दी जाएगी. साथ ही संगठन का रजिस्ट्रेशन भी रद किया जा सकता है. इस एक्ट का उल्लंघन करने वाली संस्था या संगठन को राज्य सरकार की ओर से किसी तरह की  वित्तीय व अन्य मदद नहीं दी जाएगी.

घर वापसी नहीं आएगी अपराध की श्रेणी में

ड्राफ्ट में कहा गया है कि अगर किसी ने दूसरा धर्म अपना लिया था लेकिन वह अपने पुराने धर्म में दोबारा वापसी करना चाहता है तो वह कर सकता है. यह अपराध नहीं माना जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया को धर्म परिवर्तन कानून से बाहर होगी. ड्राफ्ट में सिफारिश की गई है कि अगर कोई व्यक्ति धर्मांतरण करना चाहता है तो वह पहले जिलाधिकारी या उसके द्वारा नामित अपर जिलाधिकारी को एक महीने पहले शपथ पत्र देना होगा. उसे यह भी घोषित करना होगा कि यह धर्मांतरण छल, प्रलोभन, जबरन या किसी अन्य प्रभाव में नहीं किया जा रहा है. इतना ही नहीं धर्मांतरण करने वाले धर्म गुरुओं को भी डीएम ऑफिस से प्रस्तावित फॉर्म भरकर एक महीने की नोटिस देनी होगी.


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