बहुत बड़ी साजिश है उस रिपोर्ट में जिसमें दुनिया के खुश और दुखी देशों की सूची है…क्या आपको कभी कोई मिला?

दुनिया में हिंदुस्तान की छबि ख़राब करने के लिए अनेकों कोशिशें होती रहती हैं. सबसे बड़े बात इसमें देश के साथ साथ कुछ विदेशी ताकतें भी हैं जिनका ये प्रयास रहता है कि किसी न किसे प्रकार से हिन्दुस्तान की छबि धूमल की जाये, हिंदुस्तान को बदनाम किया जाये. और जब पिछले कुछ सालों में हिंदुस्तान दुनिया की आँखों में आँख डालकर बात कर रहा है, दुनिया भी हिन्दुस्तान को एक नई सुपर पॉवर के रूप में देख रही है उस समय संयुक्त राष्ट्र ने एक ऐसी लिस्ट जारी की है जो निश्चित रूप से भ्रामक है तथा हिंदुस्तान की छबि को धूमिल करने वाली है.

बता दें कि सयुंक्त राष्ट्र ने इस साल दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची जारी की है जिसमें फिनलेंड पहले स्थान पर है.  इस सूची में दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सोची में भारत को 133वां स्थान दिया गया है लेकिन इस सूची में आश्चर्यजनक बात ये है कि इसमें भारत का स्थान पकिस्तान तथा बांग्लादेश से भी नीचे रखा गया है. इस लिस्ट में जहाँ पाकिस्तान का स्थान 75वां तथा बांग्लादेश का स्थान 115वां है. संयुक्त राष्ट्र की ये सूची 6 कारकों पर तय की जाती है. इन 6 कारकों में आय, स्वस्थ्य जीवन प्रत्याशा, सामाजिक सपोर्ट, आजादी, विश्वास और उदारता शामिल हैं.

अब विचार कीजिये कि क्या पकिस्तान हिन्दुस्तान से ज्यादा खुशहाल है? क्या पकिस्तान की आय भारत से ज्यादा है? क्या पाकिस्तान हिंदुस्तान से ज्यादा स्वस्थ है? क्या पकिस्तान में भारत से ज्यादा आजादी है? क्या पाकिस्तान भारत से ज्यादा उदार देश है? वो पाकिस्तान जहाँ खुलेआम महिलाओं का बलात्कार किया जाता है, वो पकिस्तान जहाँ कोई ऐसा दिन खाली नहीं जाता जब किसी बम ब्लास्ट या किसी अन्य हमले में लोगों की जानें न जाती हों, वो पाकिस्तान जहाँ गैर मुस्लिम समुदाय पर भीषणतम अत्याचार किये जाते हैं क्या ये पकिस्तान हिन्दुस्तान से अधिक खुशहाल हो सकता है

लेकिन इससे भी बड़ा सवाल ये है कि आखिर सयुंक्त राष्ट्र ने ये रिपोर्ट कैसे तैयार की? सयुंक्त राष्ट्र की टीम ने कहाँ सर्वे कराया जहाँ उन्हें हिन्दुस्तान के लोगों से ये जानकारी प्राप्त हुई कि हिन्दुस्तान पकिस्तान से कम उदार है, हिन्दुस्तान पकिस्तान से कम स्वस्थ है, हिन्दुस्तान में पाकिस्तान के मुकाबले कम आजादी है? हमारे पास आज तक सयुंक्त राष्ट्र की कोई टीम इस तरह के सर्वे क लिए नहीं आयी है, और सुदर्शन न्यूज़ ने संवाददाताओं ने अपने क्षेत्र में सुदर्शन के दर्शको/पाठकों से भी पूंछा लेकिन सबने यही कहा कि उनके पास इस तरह के सर्वे करने के लिए कोई नहीं आया? अगर आप लोगो के पास आया हो तो हमें जरूर बताएं.

इससे एक बात जरूर साबित होती है कि सयुंक्त राष्ट्र में भी कुछ विकृत मानसिकता के लोग भी मौजूद हैं जो हिन्दुस्तान से द्वेष रखते हैं और इसी कारण ये भ्रामक रिपोर्ट जारी की गयी है जिसमें हिन्दुस्तान को पकिस्तान से भी कम खुशहाल बताया है जो सिर्फ दुनिया के सामने हिन्दुस्तान की गलत छबी पेश करने के लिए है लेकिन सुदर्शन न्यूज़ सयुंक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट को ख़ारिज करता है.

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