एक अभिनंदन के लिए तडप उठा था देश. पर यासीन मालिक तो मार चुका है एयरफोर्स के 5 वीरों को. फिर भी उसे “आतंकी” नहीं “अलगाववादी” कहती रही “इमरान गैंग”

उस हत्यारे के समूह पर बैन लग चुका है .इसके साथ ही नोच कर फेंक दिया गया है वो कथित सेकुलरिज्म का नकाब जिसको पहन कर कभी भारत के वीर जवानो से भागता वो हत्यारा बाद में उन्ही जवानो से लेने लगा था सुरक्षा और उनके खिलाफ ही उगलने लगा था जहर .. यासीन मलिक नाम है उसका जिसको नेता बनाने की भी सभी कोशिशे की गयी . उसको दिल्ली तक बुलाया जाता रहा ये साबित करने के लिए कि ये कथित रूप से ऐसी सेकुलर व्यवस्था है जिसमे आतंकी और सैनिक को शायद बराबर अधिकार मिले हों .

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अभी कुछ समय पहले ही भारत की जनता का अपने जवानों के प्रति प्रेम और अटूट लगाव उस समय देखने को मिला था जब भारत के जांबाज़ वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन को पाकिस्तानी सेना ने गिरफ्तार कर लिया था . उस समय देश ने एक स्वर में अभिनंदन की रिहाई के लिए प्रार्थना की थी . भारत की सरकार ने भी उस समय सीधे सीधे एलान किया था कि उनके पायलट को अगर कुछ हुआ तो गम्भीर परिणाम भुगतेगा पकिस्तान .

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यद्दपि उसी समय सक्रिय हो गयी थी इमरान गैंग भी और उसने फ़ौरन ही इस मामले में देश की भावनाओं के विपरीत जाते हुए #SayNoToWar नाम का अभियान चला दिया . जब ये अभियान उनके जैसी सोच वालों में सक्रिय हुआ तो उन्होंने आगे बढ़ कर इमरान खान की तारीफ भारत में ही करनी शुरू कर दी .. इतना ही नहीं , जब अभिनन्दन के लिए भावनात्मक पलों में वो अपने इरादों में सफल होते दिखे तो उन्होंने पूरी की पूरी पाकिस्तानी सेना की जयकार लगानी शुरू कर दी .

ये वही इमरान गैंग है जो मीडियाकर्मी , राजनेता , ब्यूरोक्रेट आदि मिला कर बनी है . इन्होने एक ऐसे इतिहास को छिपा रखा है जो सामने आया तो लोग इनके द्वारा बनाये गये नकली सेकुलरिज्म के जाल को तोड़ देंगे . एक अभिनंदन के लिए तडप उठे देश के अन्दर ही एक आतंकी रहता है जिसने कभी वायुसेना के 5 जांबाज़ अधिकारियो की हत्या की थी और 40 वायुसैनिको पर गोलियों की बौछार कर दी थी .. उसका नाम यासीन मालिक है जिसको इमरान गैंग आतंकी के बजाय अलगाववादी कहती है .

25 जनवरी 1990 को जेकेएलएफ ने भारतीय वायु सेना के पाँच अधिकारियों की हत्या कर दी थी। यहाँ तक कि खुद यासीन मलिक ने तब एक समाचार एजेंसी को बाकायदा इंटरवियु दे कर कहा था कि उसने ड्यूटी पर जा रहे 40 वायुसैनिकों पर गोलियाँ चलाई थीं। इसके बावजूद वह आजतक कानून के शिकंजे से बाहर खुला घूम रहा है। ध्यातव्य है कि यासीन मलिक एक आतंकी है और ‘अलगाववादी नेता’ के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है और जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का चीफ भी है। आतंकी यासीन का जेकेएलएफ ( जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट) अर्थात जम्मू कश्मीर मुक्ति फ्रंट मूलतः एक आतंकवादी संगठन है जिसकी स्थापना 1977 में की गई थी।

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कश्मीर ही नहीं बल्कि जम्मू की भी आज़ादी के नारे देशद्रोह हैं लेकिन इसके नापाक समूह का नाम लेते समय कुछ लोगो में सेकुलरिज्म के भाव दिखाई देते हैं . इसी आतंकी के साथियों कभी जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या की थी। ये वो जज थे जो  अपने अटल फैसलों के लिए अतिप्रसिद्ध हुआ करते थे . लेकिन इन तमाम  सच्ची घटनाओं को उस इमरान गैंग  और उसी से जुडी मीडिया की शाखा ने छिपा कर कहना गलत नहीं होगा कि देश के साथ गद्दारी की है . फिलहाल मोदी  सरकार ने एक लम्बे समय के बाद अन्य सरकारों से हट कर साहस दिखाया है और इस आतंकी की पुरानी फाइलें खोल कर इस पर बैन लगाया है .

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