गोरखपुर BRD ऑक्सीजन काण्ड में अभियुक्त “कफील” के साथ खड़े होने वाले क्या अब खड़े हो जायेंगे बाराबंकी शराब काण्ड के अपराधी “कुरैशी: के साथ ?

हर किसी को याद होगा वो समय जब गोरखपुर में आक्सीजन की कमी के चलते बच्चो ने दुनिया देखने से पहले ही आँखे बंद कर ली थी . जब इसकी जांच शुरू भी नहीं हुई थी उस से पहले ही एक ख़ास वर्ग ने इस दोषी और एक हीरो निर्धारित कर लिया था . हीरो चिन्हित करने वाले और दोषी खोजने वालों में वो ज्यादा थे जो गोरखपुर से कई सौ किलोमीटर दूर बैठे थे.. उनके ट्विट ने ही उस समय एक स्वघोषित अदालत का रूप ले लिया था और फिर चल पड़ा था एक गंदा खेल .

पुलिस की विवेचना शुरू होने से पहले ही न जाने कहाँ से ये खबर वायरल हो गई थी कि गोरखपुर आक्सीजन काण्ड में एक मसीहा बना डाक्टर है जिसका नाम कफील है . उस समय गोरखपुर से ज्यादा कफील का नाम चर्चा में आ गया था और वो भी बच्चो को बचाने की चिंता से जायदा उस मीडिया के सामने तन कर खड़ा बाईट दे रहा था जिसने दिल्ली से ही उसको महान बता डाला था.. कुछ जानकार इसको पुलिस पर दबाव बनाने का एक हथकंडा भी मानते हैं जो सफल नहीं हुआ था .

उसी समय कफील की बाईट के पीछे कई डाक्टर बच्चो की चिंता में बदहवास हो कर भाग रहे थे लेकिन उनकी तरफ कैमरे नहीं घूमे , शायद उनके नाम में कफील नहीं रहा होगा .. फिलहाल कफील की महानता बताने के साथ मीडिया ने इसमें एक नाम  नकारात्मक रूप से भी उछाल रखा था और वो था उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का . दोनों खबरे एक साथ ऐसे चल रही थी कि जैसे उस समय कफील से अच्छा और योगी आदित्यनाथ से बुरा कोई अन्य उदाहरण हो ही न ..

फिलहाल उस समय सिर्फ और सिर्फ सुदर्शन न्यूज ने पूरी निर्भीखता के साथ सच को बताया था और सबसे पहले व अंत तक ये कहा कि कहीं न कहीं इस मामले में गुनाहगार कफील है .. यद्दपि ये बात तथाकथित सेकुलरिज्म के ठेकेदारों को रास नहीं आई थी और उन्होंने अपने अपने विरोधी विचार सुदर्शन न्यूज के खिलाफ रखे .. पर हम अटल थे अपनी बात पर और आख़िरकार पुलिस जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हुआ .. प्रदेश सरकार की नजर भी इस जांच पर थी जो उच्चस्तरीय थी .

अंत में कफील दोषी साबित हुआ जांच में और उसको जेल भेजा गया . जेल से आने के बाद आखिरकार कफील अपने असली रूप में दिखाई दे रहे हैं और वो लगातार भारतीय जनता पार्टी का विरोध एक मझे हुए राजनेता की तरफ कर रहे हैं . अब बाराबंकी में जहरीली शराब काण्ड में भी कुछ वैसा न हो जाय इसकी सम्भावना जताई जा रही है . अभी तक इस मामले में उत्तर प्रदेश शासन को दोषी बनाया और बताया जा रहा था लेकिन अब उसी मामले में एक नाम सामने आया है जिसका नाम शानू कुरैशी है .

शानू कुरैशी को आख़िरकार पुलिस ने एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है जिसने शराब में मिलाने के लिए जहरीला द्रव्य सप्लाई कर दिया था और वही 26 मौतों की वजह बन गया है . शानू कुरैशी ने ऐसा क्यों किया ये फिलहाल पुलिस जांच कर रही है . लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि कही बच्चो की मौत में अभियुक्त बनाये गये कफील के ही अंदाज़ में वो तमाम तथाकथित सेकुलर अब बाराबंकी शराब काण्ड में जहर बांटने वाले कुरैशी के समर्थन में तो नहीं उतर आयेंगे … फिलहाल इस मामले की जांच जारी है .

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