मुख्यमंत्री की सुपारी, आस्था रूपी गौ को खाना, प्रधानमंत्री को गाली , सेनाध्यक्ष को गुंडा ..कभी भी , कहीं भी देखा है आप ने ऐसा विपक्ष ?

पहले बचपन में जहाँ तक आप ने देखा रहा होगा तो राजनीति बिल्कुल अलग स्वरूप में हुआ करती थी . तब संसद में बेहद खामोशी से अपनी बारी की प्रतीक्षा होती थी , अधिकतर मामले संसद मे ही तर्क वितर्क कर के सुलझा लिए जाते थे और जनता के बीच जा कर केवल एक मुद्दे पर प्रतिस्पर्धा होती थी कि किस ने कितना अच्छा काम किया है और कौन सा काम जनता के मन या भावना से जुड़ा है ..

तब 200 सीट पाने के बाद भी कोई पार्टी विपक्ष में संयमित रूप से बैठती थी .. देश के बंटवारे के जिम्मेदार लोगों को भी आदर मिलता था , चीन से अपने देश की सेनाओं को भट्टी जैसे में झोंकने वालों को भी शांति से स्वीकार कर लिया जाता था ..विदेश में प्रधानमंत्रियों की सन्देहास्पद मौत को भी हंगामा नहीं बनाया जाता था और सब चुपचाप जनता को अपना एक नेक चेहरा दिखाने की होड़ लगाते थे …

फिर अचानक ही राजनीति ने करवट ले ली .. बिल्कुल नई तरह की राजनीति का उदय हुआ .. भगवा शब्द से चिढ़ के कारण ही कभी भगवा आतंकवाद शब्द को पाला पोसा गया और एक भगवाधारी मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठ गया .. प्रधानमंत्री की गद्दी उसको मिल गयी जो तिलक लगा कर पूरी दुनिया मे घूम घूम कर मन्दिरों में मत्था टेकरहा था और मंच से जय श्री राम का उद्घोष कर रहा था …

फिर क्या था , अचानक ही कुछ के सब्र का बांध टूट पड़ा .. 70 साल एकछत्र राज्य जाने का गम तो था ही , साथ मे उस भगवा का उदय भी समस्या थी उनके लिए जिसे कभी आतंकी तो कभी दुराचार बनवाने और घोषित करने के हर सम्भव प्रयास किये गए थे ..अचानक ही गठबंधन शुरू हो गए और एक शर्त ही हर कहीं थी गठबंधन की कि भगवाधारियों व हिंदुत्व की बात करने वालों को हराना है ..

फिर भी वो भगवा धारी कारवां आगे ही बढ़ता गया , वहां फैल गया जहां सोच भी नही पहुचती थी .. आसाम में पूर्ण बहुमत की सरकार बन गयी , अरुणांचल , मेघालय में भी सत्ता के करीब आ गए …ये मानवीय भी नहीं ईश्वरीय चमत्कार जैसे ही था …. सत्ता की इच्छा देख कर सेना भी रंग में आई और जवानों की मौत के साथ पाकिस्तानी गोलीबारी का जवाब अपनी खामोशी से देने वाली सेना को खुली छूट मिल गयी तो उसने रौद्र रूप धारण कर के चीन , पाक और भारत मे छिपे गद्दारों से एक साथ युद्ध की ताल ठोंक दी ..अब इतना देख कर तो कुछ से ना रहा गया और उन्होंने अपनी शराफत का लबादा उतार फेंका ..

फिर कहीं शोशल मीडिया पर योगी की सुपारी बंटने लगी , किसी ने 1 करोड़ किसी ने कुछ लाख कीमत लगाई .. मोदी की माँ से ले कर पत्नी तक को घसीट लिया गया गैर जरूरी ढंग से जबकि विपक्ष के मुखिया में विदेश में बैठे रिश्तेदारों पर ये सत्ता में रह कर भी बिना ध्यान दिए केवल 70 साल धर्म, राम , भगवा आदि के प्रति भरी नफरत को खत्म करने में लगे रहे …

उसके बाद सेना को भी बीच मे घसीट लिया गया जो इतिहास में कभी नहीं हुआ था .. सेना के जवानों को क्रूर और पत्थरबाज़ों को महान बताया जाने लगा .. सेना प्रमुख को गाली से भी बदतर गुंडा शब्द बोला जाने लगा .. आतंकियों के लिए आधी रात में कोर्ट खुलने लगी . गौ माता जो दुनिया मे दूध के लिए जानी जाती थीं , उनको मांस का प्रतीक बना डाला गया … ऐसा नजारा कभी किसी ने सोचा भी नहीं रहा होगा .. एक दम अलग नज़ारा दिखा जहां दुश्मन पाकिस्तान, चीन नहीं बल्कि सेना , सेना प्रमुख , प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को घोषित कर दिया गया ….

भारत और जनता हैरान है इस राजनीति से , शायद उन्हें लगता हो कि वो बिल्कुल सही कर रहे हैं पर जो हो रहा है वो जनता के गले उतर ही नहीं पा रहा है ..ये राजनीति कैसी बना दी गयी जहां विपक्ष ने सेना को भी अपने विपक्ष में मान लिया है ? आशा है कि जनता एक एक पल की गवाही देगी .. वो सही गलत का फैसला यक़ीनन कर रही होगी और वो वही करेगी जो न्यायोचित होगा …

**राहुल पाण्डेय

* उपरोक्त विचार लेखक के स्वयं के विचार हैं ।।

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