“वन्देमातरम” पर तो सैकड़ों फतवे हैं, “पाकिस्तान जिंदाबाद” पर पहला फतवा कब आएगा ?- सुरेश चव्हाणके

वन्देमातरम वो नारा है जो आज़ादी आने के बहुत पहले बना था , वन्देमातरम वो हुंकार है जिसके पीछे लाखों लोगों का खून है , वो लाखों लोग जो देश की एकता और अखंडता बचाने के सपने को ले कर अपने प्राणो की बलि चढ़ा गए . वन्देमातरम वो नारा है जो अखंड भारत के साथ प्रबल राष्ट्रवाद और महानता का प्रतीक है . जो देश में शान्ति , खुशहाली के साथ पूर्ण स्वराज का एहसास कराता है . लेकिन इस भारत में वीरों और बलिदानियों के दिए उस वन्देमातरम को साम्प्रदयिक बना डाला गया .. सरकार ने शुरू में हाथ खोले तो कट्टरपंथ के हौसले बढे और उन्होंने इसमें गैर मजहबी बातें खोज डाली . फिर शुरू हुआ इस पावन , पवित्र और बलिदान से सने शब्द का विरोध .

उस विरोध करने वाली गैंग में जिसकी जितनी हैसियत थी उसने उतना विरोध किया .. कुछ सड़क तक आये , कुछ संसद तक गए .. तमाम ने सोसल मीडिया का सहारा लिया . जिसके पास फतवा जारी करने की हैसियत या अधिकार था उन में से कुछ ने अपने उस अधिकार का बाखूबी प्रयोग किया और हमारे पूर्वजों के रक्त से सने भारत की आज़ादी के आधारबिंदु को साम्प्रदयिक और गैर मज़हबी बता कर केवल के वर्ग विशेष का बना डाला गया . लेकिन यहीं नहीं रुका ये विरोध . फतवों आदि से उत्साहित हो कर कुछ ने इसको बोलने वालों पर हमले भी किये , कुछ को मारा पीटा भी गया .. तमाम स्कूलों में इसको बंद करवा दिया गया .. ध्यान दीजियेगा यहाँ बात पाकिस्तान या बंगलादेश की नहीं बल्कि मजहबी आधार पर बंटने के बाद भारत वर्ष की हो रही है .

दूसरी तरफ आज़ादी आने के बाद पहली बार जिन्ना के प्रयासों से अस्तित्व में एक शब्द आया जिसका नाम ” पाकिस्तान” है . उस पकिस्तान शब्द का आज़ादी से कोई लेना देना नहीं , उस पाकिस्तान शब्द का देश के विकास , तरक्की में कोई योगदान नहीं , उस पाकिस्तान शब्द का त्याग या बलिदान से दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं . सबको पता है की पाकिस्तान का रिश्ता केवल जवानो की लाशों , बार बार जंग , बम ब्लास्ट , आतंकियों की घुसपैठ आदि से ही है . इसके अतिरिक्त पाकिस्तान का कोई भी रिश्ता अब तक भारत के साथ स्थापित नहीं हो सका है जिसे दुनिया को दिखाया जा सके … पाकिस्तान के माथे पर आज़ादी के बाद लाखों हिन्दुओं और सिखो के नरसंहार का दाग जरूर है जिसे वो कभी धो नहीं पायेगा .

पर उस पाकिस्तान के प्रति भारत पाकिस्तान के बीच हुए मैच के बाद भारत के तमाम हिस्सों में जो प्रेम देखने को मिला वो यदि ध्यान देंगे तो तथाकथित उन धर्मनिरपेक्षों के लिए या बुद्धिजीवियों के लिए एक सबक है जो कम से कम साजिश के नहीं बल्कि अज्ञानता के शिकार हैं . भारत की हार का जश्न बंद कमरों में नहीं बल्कि खुलेआम सड़कों पर मनाया गया . मंसूरी की पहाड़ियों से ले कर केरल के समंदर तक पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे . राजस्थान के रेगिस्तान से ले कर असम के जंगलों तक पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे ..  पुलिस दिन रात दौड़ कर उन्हें लाखो के बीच जैसे तैसे छांट बीन कर पकड़ती रही . कई कई जगहों पर तो ये हालत दिखे कि लोगों को शक हुआ कि वो भारत में ही हैं या कहीं और ?

हैरानी की बात ये रही कि उस पावन , पवित्र “वन्देमातरम’ पर सैकड़ों फतवे जारी होने के बाद आज तक अपने अधिकार का प्रयोग ‘पाकिस्तान जिंदाबाद” जैसे अपशब्द समान आपत्तिजनक और देशद्रोही बयान पर कभी नहीं किया . ना जाने बाबर तक के इतिहास की सच्ची जानकारी की गारंटी लेने वाले वो तमाम लोग बंटवारे का वो इतिहास क्यों भूल जाते हैं ? ये चुप्पी है या जान बूझ कर छिपाने की कोई साजिश ? मुझे आशा है कि उन्हें वन्देमातरम का भी इतिहास भी पता होगा और पाकिस्तान का भी . पर उनका सिर्फ और सिर्फ पावन शब्द वन्देमातरम पर ही आपत्ति करना और पाकिस्तान जिंदाबाद पर खामोश रहना कई सवाल खड़े कर रहा है . कुछ शायद ये भी कह सकते हैं कि उन्हें मेरे सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है पर ये सवाल अब पूरे भारत के हर उस हिस्से का है जहाँ ये जहरीला नारा लगा है और हाँ , भारत में रह कर राष्ट्रभक्ति दिखाना कोई अपराध नहीं है .

अब तक “पाकिस्तान जिंदाबाद” पर एक भी फतवा कम से कम मेरी जानकारी में नहीं आया है . यदि आया है तो उसका प्रमाण कमेंट बॉक्स में प्रमाण भेजें और उसको खुद सम्मानित करूंगा . . मैं सुरेश चव्हाणके सीधा सवाल करता हूँ वन्देमातरम को हराम , साम्प्रदायिक और गैर मजहबी बोलने वाले उन सभी तथाकथित मज़हबी लोगों और उनके पैरोकारों से कि वो भारत को इतिहास में रक्तरंजित करने वाले और वर्तमान में भी लगातार घाव दे रहे गद्दार , आतंकी मुल्क पाकिस्तान के साथ “जिंदाबाद” शब्द जोड़ रहे पूरे भारत में फैले उन गद्दारों के खिलाफ पहला फतवा कब जारी करेंगे ? ठीक वन्देमातरम की तरह उन्हें पाकिस्तान जिंदाबाद शब्द से नफरत कब होगी ? एक बार फिर आह्वान दोहरा रहा हूँ कि मेरे साथ करोड़ों राष्ट्रभक्तों को ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के खिलाफ पहले फतवे का इंतज़ार है … 

“वन्देमातरम”

(सुरेश चव्हाणके)

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