तथाकथित बुद्धिजीवियों के अनुसार अगर ये धार्मिक कट्टरता की हार है तब तेलंगाना में ओवैसी की पार्टी के 7 विधायकों की जीत को क्या कहा जाये ?

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा राजस्थान के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की हार के बाद इस बात को लेकर सियासी बहस शुरू हो गई है कि आखिर भारतीय जनता पार्टी के चुनाव क्यों हारी ? हालाँकि मध्य प्रदेश में अभी तस्वीर साफ़ नहीं हुई है तथा वहां भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है. अपनी सत्ता वाले तीन राज्यों में भाजपा की हार के बाद तथाकथित बुद्धिजीवियों के बीच जारी बहस के बाद ये बात सामने आई है कि धार्मिक कट्टरता के कारण भारतीय जनता पार्टी की हार हुई है.

इन तथाकथित बुद्धिजीवियों की मानें तो बीजेपी की हार का मुख्य कारण हिन्दुत्व के धार्मिक मुदद्दों को लेकर कट्टरता है. अर्थात हिंदूवादी छबि के कारण भारतीय जनता पार्टी की हार हुई है. लेकिन यहाँ एक सवाल खड़ा होता है कि अगर भारतीय जनता पार्टी की हार धार्मिक कट्टरता की हार है तब फिर अक्सर भड़काऊ बयान देने वाले ओवैसी की पार्टी के तेलंगाना में 7 विधायकों की जीत को क्या कहा जाये? अगर भाजपा की हार धार्मिक कट्टरता की हार है तब ओवैसी की पार्टी 7 सीटों पर चुनावी जीत को मजहबी कट्टरता की जीत माना जाना चाहिए.

ओवैसी जो अक्सर हिन्दू विरोधी, देश विरोधी बयान देता रहता है, हिन्दू आस्थाओं का अपमान करता है उस ओवैसी की पार्टी की 7 सीटों पर जीत की चर्चा ये तथाकथित बुद्धिजीवी क्यों नहीं कर रहे हैं? ये बुद्धिजीवी भाजपा की हार का कारण धार्मिक कट्टरता को मान रहे हैं लेकिन ओवैसी की पार्टी की जीत को मजहबी कट्टरता की जीत नहीं मान रहे हैं, आखिर क्यों ?

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