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मीडिया के एक वर्ग ने पहली बार बनाया किसी लाचार पिता का ऐसा मजाक.. सोशल मीडिया में हो रही बायकाट की अपील

पिछले 3 दिनों से अगर मीडिया ने किसी को सबसे ज्यादा जगह दी तो वो रही है साक्षी मिश्रा और एक अन्य लड़के की शादी की खबर को .. यहाँ मामला भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक से जुडा था, इसलिए शायद इसमें जितना नमक मिर्च और मसाला डाल कर चलाया जा सकता था वो किया गया .. अपने ट्विट पर एक कमेन्ट करना भी निजता का हनन मानने वालों ने अपने दोनों हाथ खोल दिए और इस प्रकार से एकतरफा खबर चलाई जैसे कि लड़की के पिता से बड़ा गुनाहगार ओसामा या बगदादी भी न हों ..

अगर इसी 3 दिन की खबरों को देखा जाय तो कश्मीर में हिंसा हुई , प्रयागराज में पुलिस को गौ तस्करों ने घेर कर मारा , रामपुर में सामान्य मीट की दूकान पर गाय का मांस बेचा जाता मिला , आज़म खान के ऊपर पुलिस का शिकंजा कसा , नॉएडा के बलात्कारी मौलवी को २२ साल की जेल हुई. लेकिन इनमे से एक भी खबर को प्रमुखता नहीं मिली और लगातार प्रेम की दुहाई देती एक बेटी से ज्यादा उसके उस पिता को निशाने पर लिया गया जो मीडिया में आ कर एक लाइन बोला था .

उस पिता के शब्द थे कि – “मेरी बेटी बालिग है , वो अपने जीवन के फैसले बेहतर ले सकती है , मुझे को दिक्कत नहीं उसके फैसले से”.. जरा विचार कीजिये उस पिता की उस समय मनोदशा की जब उसके आगे दर्जनों कैमरे लगे थे और प्रसारण पूरी दुनिया में हो रहा था . क्या ऐसे मौके पर मीडिया को सामने आ कर जवाब देना और उसी जवाब के साथ अपनी बेटी को संदेश देना कम हिम्मत का काम था ? फिर भी मीडिया के एक वर्ग द्वारा उस पिता को लगातार ऐसे दिखाया जाता रहा जैसे इस से बड़ा दरिंदा कोई नही हो .

इस घटना की शुरुआत में ही ये मामला बरेली पुलिस तक गया था और बरेली पुलिस के प्रमुख ने फ़ौरन ही प्रेमी जोड़े को सुरक्षा दिलाने की बात कही थी . उन्हें पुलिस सुरक्षा भी मिल गई लेकिन अगर कुछ लगातार चलता रहा हो वो थे कुछ लोगों के मुह.. इसको निश्चित तौर पर धैर्य के साथ विधायक राजेश मिश्र सुनते रहे पर अगर किसी ने धैर्य खोया तो वो थी जनता.. कहा जाता है कि जहाँ ज्यादा अनावश्यक दमन होता है वहां क्रान्ति होती है और वही हुआ करती है और अंत में वही हुआ .

जो पिता कुछ बोल भी नहीं रहा था और सब कुछ चुपचाप सुन रहा था उसकी आवाज अब सोशल मीडिया बन गई है .. उसकी ख़ामोशी ने ही बहुत कुछ कह डाला है , एक महिला के लिए एकतरफा सम्मान मांग रहे कुछ गिने चुने लोगों ने ये नहीं सोचा कि जिस घर के आंतरिक मामलो की वो धज्जी उड़ा रहे हैं उस घर में और भी महिलाएं है .. शायद कोई और लड़की भी हो जिसकी शादी आदि बाद में करने के लिए वो पिता निकले जिसकी इज्जत को टी वी स्क्रीन से वो तार तार कर रहे हैं ..

शुरू में मीडिया के एक वर्ग में अपने समर्थन को देख कर दोनों प्रेमी युगल इतने उत्साहित हुए कि उन्होंने बाकायदा ट्विटर ID अदि बना लिए .. उसमे से लड़के ने अपना प्रोफाइल लिखा था कि “साक्षी का पति” .. शायद उनकी यही पहिचान थी .. फिर जब पानी सर से ऊपर गया तब मीडिया के कुछ खास लोगों के बहिष्कार की आवाज कहीं कोने में उठी और धीरे धीरे उसने गति पकड लिया .. कल ट्विटर के टॉप ट्रेंड में वो संस्था और वो नाम बायकाट लिस्ट में आया था जिसने घर के इस मामले को दुनिया को चटकारे ले कर बताया ..

सोशल मीडिया की ताकत का ही ये असर था कि आखिरकार उस संस्था और उस व्यक्ति विशेष ने अपना धुन बदला लेकिन शायद अब एक लाचार पिता का खोया सम्मान कभी वापस नहीं आएगा .. वो अपूरणीय क्षति दे दी गई है उस परिवार को जो किसी को हृदय विराद्कता दे सकता है .. यहाँ धैर्य की प्रसंशा करनी होगी उस पिता की जिसने पहले अपनी बेटी से हाथ धोया और बाद में अपनी इज्जत से .. बेटी जाने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन इज्जत जाने की वजह मीडिया के वो खास लोग और खास नाम ..

शायद ही दुनिया में कोई ऐसा पिता हो जिसने अपनी औलाद बेटी या बेटे को डांटा न हो.. कुछ पश्चिमी देशो में ऐसा विधान है जिसमे बच्चो को डांटने पर भी बच्चे को हक होता है कि वो पुलिस बुला कर माता या पिता को जेल भिजवा सकता है .. क्या उस देश की नीति यहाँ पर भी लागू करवाने का प्रयास हो रहा है ? प्रेम का अर्थ सिर्फ वही नही हो सकता जो एक पति या पत्नी में हो , प्रेम के विशाल दायरे में माता , पिता , भाई , बहन के साथ संसार के हर जरूरतमन्द आते है ..

मदर्स डे या फादर्स डे पर मीडिया चैनलों के उन्ही बड़े नामो और मठाधीसो के ट्विटर पर माता पिता के सम्मान की बड़ी बड़ी बातें देखी जा सकती हैं … ये वो दिखावे का नकाब था जो इस घटना से उतर गया है . इतिहास में पहली बार एक परिवार में बाप बेटी के रिश्ते को ऐसे दिखाने की कोशिश हुई है जैसे कोई पिता ही अपनी बेटी का सबसे बड़ा शत्रु होता है .. निश्चित तौर पर जनता का गुस्सा प्रथम दृष्टया जायज लग रहा है क्योकि अभी भी भारत के ज्यादातर लोग परिवार के उन नियमो को मानते और आत्मसात कर के चलते हैं जो हमारे पूर्वज हमारे लिए बना कर गये हैं.. साक्षी को उनके सुखमय जीवन के लिए हार्दिक शुभकामना लेकिन उस पिता को परमात्मा ये सब सहने की शक्ति दे जो उसको कलम और कैमरे वाले दे रहे हैं ..

 

रिपोर्ट –

राहुल पाण्डेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

मुख्यालय नॉएडा 

मोबाईल – 9598805228

 

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