3 तलाक बिल के लिए मोदी सरकार में सबसे ज्यादा संघर्ष किया रविशंकर प्रसाद जी ने.. तब खत्म हुई वो कुप्रथा जो चली आ रही थी सदियों से

ये वो कुप्रथा जी जो चली आ रही थी सदियों से अनवरत रूप से.. इस कुप्रथा ने न जाने कितने घर उजाड़े थे और कितनी जिंदगियां बर्बाद कर डाली थीं. एक अच्छे जीवन की कल्पना कर के अपने घर और परिवार को छोड़ कर नये घर में जाने वाली लडकी के तमाम सतरंगी सपने उस समय टूट कर बिखर जाते थे जब उसके आगे उसका शौहर छोटी छोटी बातों पर 3 बार तलाक बोल दिया करता था .. यकीनन उन महिलाओं के दर्द पर खामोश रहने वाले उस अक्षम्य पाप में भागीदार जरूर रहे होंगे .

भारत में सदियों से बाकायदा लागू रही इस परम्परा को न जाने कितने राजाओं , महाराजाओं , शासको ने देखा और महसूस किया रहा होगा .. बीच में तमाम समाज सुधारक भी आये लेकिन कतिपय कारणों से उनमे साहस नहीं हुआ इस कुप्रथा पर कार्य करना तो दूर , इसके खिलाफ एक शब्द बोलने का भी.. किसी को कानून व्यवस्था बिगड़ने का डर सताया , किसी को कुछ लोगों की नाराजगी गंवारा नहीं लगी तो किसी ने कट्टरपंथ के आगे घुटने टेक दिए और सब कुछ चलता रहा..

लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद शायद भारत की एक बड़ी आबादी ने पहली बार जाना था कि लाखो मुस्लिम महिलाएं क्या सह रही हैं एक लम्बे समय से ..उनका दर्द पहली बार तब झलका जब उन्हें एहसास हो गया कि सत्ता में वो सरकार है जो उन्हें इस कुप्रथा से मुक्ति दिला सकती है.. बेटी बचाओ और बेटी पढाओ के नारे को प्रमुखता देने वाली मोदी सरकार ने उन बेटियों का दर्द समझा जिनकी प्रताड़ना अंतहीन थी . और उस दर्द को दूर करने का जिम्मा दिया केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद जी को. यद्दपि ये कार्य सरकार और जनता का सामूहिक प्रयास था लेकिन इस रथ के सारथि रविशंकर प्रसाद जी ही थे .

वो सेनापति बने इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए और उनके बढाये गये पहले कदम के बाद पीछे कारवां बनता चला गया.. ऐसा भी नही कि ये कानून बन जाता इतना आसन था , शायद वो तमाम बाधाएं श्री रविशंकर प्रसाद जी के सामने आई जो उन्होंने पहले से ही सोचा रहा होगा .. उन्हें साम्प्रदायिक बताया गया , उन्हें मुस्लिम विरोधी घोषित करने की कोशिश की गई , उन्हें शरिया कानून में हस्तक्षेप करने वाला कहा गया , उन्हें कोर्ट में खड़ा करने की कोशिश हुई लेकिन अपनी धुन के पक्के रविशंकर प्रसाद जी ने सब कुछ सहा लेकिन विचलित नहीं हुए .

उन्होंने सबका साथ सबका विकास को अपना आर्श वाक्य मान कर उसी पर कदम बढाते रहे .. पहले कुछ ने समझा फिर धीरे धीरे सबने समझा. वो अपने सोशल मीडिया और अन्य जिम्मेदार समाचार चैनलों से अपनी बात जनता तक पहुचाते रहे कि क्यों इस कानून के हटने के बाद लाखो महिलाओ को लाभ होगा और ये कानून बनने के बाद कैसे कई परिवार बिना बात के टूटने से बच जायेंगे.. उनकी आवाज में सच्चाई थी इसलिए उसको कोर्ट ने भी माना और जनता ने भी ..

आज सख्त तीन तलाक कानून संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है .. अब पुलिस को भी कानूनी अधिकार मिल चुके हैं इस कानून का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कार्यवाही करने के.. निश्चित तौर पर वो दिन इतिहास में दर्ज होगा जिस दिन तीन तलाक बिल राज्यसभा में पास हुआ और आज के कई पीढियों बाद भी जब तीन तलाक की विभीषिका से निर्भीक कोई मुस्लिम महिला अपनी बच्ची को निर्भीक रहने की शिक्षा देगी तो इतना जरूर बताएगी कि नरेंद्र मोदी सरकार में एक मंत्री रविशंकर प्रसाद जी थे जिनके चलते आज हम जहर जैसे चुभने वाले उन 3 शब्दों से सुरक्षित हैं ..


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