अपहरण और फिरौती से भी ख़तरनाक काला धंधा है “ब्लैकमेलिंग” का, जो है चरम पर. कई IAS, IPS, मंत्रियों के बाद अब कलाकार राजू श्रीवास्तव भी चपेट में


इस खबर को शुरू करने से पहले मुख्य समाचार ये है कि भारत के सबसे बड़े हास्य कलाकारों में से एक राजू श्रीवास्तव से 10 लाख रुपये की मांग ये कह कर हुई है कि अगर उन्हें पैसे नही मिले तो उनकी कोई वीडियो वायरल कर देगा जो उसके हिसाब से आपत्तिजनक है.. यद्द्पि राजू श्रीवास्तव ने खुद ही आगे बढ़ कर इस मामले की FIR लखनऊ पुलिस में करवाई है जिस से साफ पता चलता है कि वो खुद को ले कर आश्वस्त हैं कि सच क्या है और सँभवतः किसी ने खुद से ही ऐसे वीडियो बना कर केवल पैसे के लिए ये सब साजिश रची हो..

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद तमाम तरह के अपराधों पर कड़ाई से काबू करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश मिले.. इसका सार्थक असर भी तब देखने को मिला जब कई दुर्दांत अपराधी, कई आतंकी, कई डाकू आदि को मुठभेड़ में मार गिराया गया.. इसमे कहना गलत नहीं होगा कि चोरी, फिरौती, हत्या, डकैती जैसे अपराधों का कड़ाई से दमन हुआ जिस अभियान में अंकित तोमर और जे पी सिंह जैसे वीरों ने अपनी आहुति भी दी..लेकिन इन सभी बलिदान और प्रशासन व शासन की अथक कोशिश के बाद भी अगर कुछ नही काबू हुआ तो वो है लूट, फिरौती, अपहरण आदि से भी कहीं बड़ा अपराध ब्लैकमेलिंग का ..

इसी ब्लैकमेलिंग की चपेट में कई ऐसे नाम आ चुके हैं जो कर्णधार हुआ करते थे समाज की शांति और सुरक्षा के.. सिर्फ राजू श्रीवास्तव ही नहीं बल्कि इसके पहले भी कई ऐसे लोग बन चुके हैं इस प्रकार के अपराधों का शिकार जो दिन रात खुद किसी अपराध को खत्म करने के लिए दिन रात एक किये हुए थे.. लखनऊ में राजू श्रीवास्तव के साथ हुई ब्लैकमेलिंग ने गाजियाबाद की एक दुर्दांत ब्लैकमेलर की तरफ सबका ध्यान आकर्षित करवा दिया है जिसके निशाने पर तो सीधे सीधे अपराधियो को पकड़ने की जिम्मेदारी रखने वाले पुलिसकर्मी ही हैं..

लखनऊ में राजू श्रीवास्तव के साथ हुई ब्लैकमेलिंग ने गाजियाबाद ही नही बल्कि पूरी NCR और पश्चिम उत्तर प्रदेश की उस ब्लैकमेलर की तरफ सबको देखने और सोचने पर मजबूर कर दिया है जिसके निशाने पर उसके मकान मालिक, उसके पड़ोसी, उसके जिले ही नही बल्कि आस पड़ोस के प्रशासनिक अधिकारी और यहां तक कि सोशल मीडिया पर उस से न सहमत होने वाले लोग भी हैं.. ये कहना गलत नही होगा कि ब्लैकमेलर द्वारा बनाई इसी दहशत के चलते ही पुलिस वाले भी आधे दर्जन मामले होते हुए भी उसके खिलाफ कोई कार्यवाही करने में हिचकिचा रहे हैं.. एक पुलिसकर्मी के पास किसी को डराने या दबाव में लेने के लिए गिरफ्तारी या जेल भेजने आदि के रास्ते होते हैं जिस से किसी को अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा गिरने का डर हो लेकिन गाजियाबाद की ब्लैकमेलर अपनी सोशल मीडिया पर की जा रही हरकतों के अनुसार इन सभी से बेपरवाह दिखती है ..

वो बिना किसी की मर्जी के उसकी फोटो अपने साथ एडिट कर सकती है, वो मुख्यमंत्री तक के खिलाफ अभद्रता दिखा सकती है, वो खुद को किसी की बीबी खुद से ही घोषित कर सकती है, वो खुद से किसी को लुटेरा , घूसखोर या कुछ और बता सकती है.. इतने के बाद भी उस से कानून के हाथ डोर इसलिए रहते हैं कि कहीं उन हाथों को कलाई पकड़ कर गिरफ्तार करने के बाद भी कहीं और छूने का आरोप न झेलना पड़े.. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्रालय, DGP तक पुलिसकर्मियों को आम जनता से प्रेम, अपनेपन व शांतिपूर्ण बात करने के निर्देश अक्सर देते रहते हैं.. किसी से प्रेम से की गई बातचीत को कौन सा रूप देना है ये ब्लैकमेलर ही बेहतर ढंग से जानते हैं जिसके चलते न जाने कितने मंत्रियों और अधिकारियों की जिंदगी मानसिक तनाव से कई बार गुजरी..

इसी ब्लैकमेलिंग का शिकार नोएडा में केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा तक को बनाने की कोशिश की गई जिसमें एक महिला का भी नाम सामने आया था.. महेश शर्मा के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए ब्लैकमेलर को गिरफ्तार किया और सच को सच के रूप में सामने लाया..लेकिन क्या ये संभव नही की नोएडा की ब्लैकमेलर के तार गाजियाबाद की ब्लैकमेलर से भी जुड़े हों क्योंकि ये अपराध एक संगठित गिरोह की तरह से होते हैं जिसमे एक दूसरे को अलग अलग लोगों की जिम्मेदारी दे दी जाती है , उनके नाम पद व प्रतिष्ठा आदि को देखते हुए..

सूत्रों के अनुसार गाजियाबाद की ब्लैकमेलर पश्चिम उत्तर प्रदेश की इस काले धंधे वाली टीम की प्रमुख मानी जाती है जिसका रुतबा इसी बात से नापा जा सकता है कि पासपोर्ट में फर्जी कागजात जैसे अति गंभीर आधे दर्जन मामले होते हुए भी वो शान से सोशल मीडिया पर अपनी गैंग के सम्पर्क में सार्वजनिक रूप से है.. इतना सवाल तो बनता है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद बड़े से बड़े पहुँच के अपराधी मोबाइल सोशल मीडिया आदि से दूरी बना लेते हैं पर वो अभी भी बाकायदा सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर सक्रिय है..आखिर किस के दम पर या किस के भरोसे पर ? इसी महिला की बताई जाने वाली एक ऑडियो में एक बड़े पुलिस अधिकारी को अपना आदमी बताते सुनाई दे रही है जिस से इसके दुस्साहस का अंदाज़ा अपने आप लगाया जा सकता है..

फिलहाल निश्चित तौर पर यदि उत्तर प्रदेश में “परित्राणाय साधूना विनाशाय च दुष्कृताम” का दैवीय सिद्धांत एक योगी को स्थापित करना है तो जो प्रभावी कार्यवाही डाकुओं, चोरों, लुटेरों, हत्यारो के खिलाफ अब तक की है, ठीक वैसे ही प्रभावी कार्यवाही इसी समाज मे छिपे ब्लैकमेलरों के खिलाफ हो.. एक मंत्री, एक अधिकारी अलग अलग जिम्मेदारी व बोझ ले कर समाज के प्रति उत्तरदायी होता है और किसी की साजिश का शिकार होने पर आघात लगे मनोदशा से वो अपनी जिम्मेदारियों का सही से 100% कुशलता से निर्वहन नही कर पाता और इसका असर समाज की शांति, सुरक्षा व विकास आदि पर जरूर पड़ता है..


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